प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

लोग | वर्षांत

2020 में नरेंद्र मोदी सिर्फ सैनिकों की वेशभूषा में ही नज़र नहीं आए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल भी कुछ ऐसी पोशाकें पहनीं जो कई दिनों तक बाकी ज्यादातर खबरों पर भारी पड़ती रहीं

अभय शर्मा | 30 दिसंबर 2020 | फोटो : नरेंद्र मोदी/इंस्ट्राग्राम

1

मुंह पर गमछा

इस साल की शुरुआत में कोरोना वायरस महामारी के पैर पसारने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार इस संकट को लेकर राष्ट्र को संबोधित किया है. लेकिन, बीते 14 अप्रैल को जब वे देश को संबोधित करने पहुंचे तो उन्होंने मास्क की जगह गमछे से अपना मुंह ढंक रखा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस अंदाज को कुछ लोगों ने नाटक कहा तो कइयों ने इसे सराहा भी. कहा गया कि गमछे से मुंह ढंककर वे आम लोगों तक यह संदेश पहुंचाना चाहते थे कि जिन्हें मास्क नहीं मिल रहा हो, वे अपना मुंह ढकने के लिए गमछे को भी इस्तेमाल कर सकते हैं. नरेंद्र मोदी की गमछे वाली यह तस्वीर सोशल मीडिया पर छायी रही और हजारों लोगों की प्रोफाइल फोटो भी बनी.

फोटो : नरेंद्र मोदी/ट्विटर

2

पहाड़ी अवतार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते अक्टूबर में हिमांचल प्रदेश के रोहतांग में अटल सुरंग का उद्घाटन किया. यह दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग है. इस दौरान प्रधानमंत्री पहाड़ी अवतार में नजर आए. प्रधानमंत्री मोदी ने वहां पर स्वेटर पहना हुआ था, जिस पर लाल और पीले रंग का डिजाइन बना हुआ था. साथ ही उन्होंने एक टोपी भी पहनी हुई थी. इस तरह की टोपी और स्वेटर आम तौर पर हिमाचल प्रदेश के लोगों द्वारा पहने जाते हैं.

फोटो : नरेंद्र मोदी/ट्विटर

3

आर्मी के जवान

पिछले वर्षों की तरह से इस साल भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीवाली का त्योहार सेना के जवानों के बीच जाकर मनाया. इस बार मोदी राजस्थान के जैसलमेर में थे. जैसलमेर के लोंगेवाला पोस्ट पर उन्होंने सेना के जवानों के साथ दीवाली मनाई. इस मौके पर उन्होंने एक सैनिक की पोशाक पहनी थी. इस पोशाक में उनके दो फोटो काफी चर्चा में रहे – एक जिसमें वे टैंक पर सवार थे और दूसरा जिसमें वे सैनिक का मास्क पहने हुए थे. उनकी ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी साझा की गईं. इन तस्वीरों को लेकर सोशल मीडिया पर एक बहस यह भी छिड़ी कि क्या एक असैन्य नेता या नागरिक को भारतीय सेना की वर्दी पहनने का हक है? यह भी सवाल उठा कि किसी लोकतंत्र में असैन्य नेतृत्व का फौज की वर्दी पहनना कितना उचित है?

फोटो : नरेंद्र मोदी/इंस्टाग्राम

4

गुरुद्वारे में

2020 के अंतिम महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक ही सुबह-सुबह दिल्ली स्थित रकाबगंज गुरुद्वारा पहुंच गए. वहां उन्होंने गुरुद्वारे में मत्था टेका और गुरु तेगबहादुर को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान नरेंद्र मोदी ने सिर पर नारंगी रंग का कपड़ा बांध रखा था और उसी रंग के कपड़े पहने हुए थे. हालांकि, प्रधानमंत्री की पोशाक से ज्यादा इस बार उनके गुरुद्वारा पहुंचने के अंदाज ने सुर्खियां बंटोरी. दरअसल, नरेंद्र मोदी का यह दौरा अचानक तय हुआ था और जब वे गुरुद्वारे में पहुंचे तो वहां कोई विशेष पुलिस बंदोबस्त नहीं था और न ही आसपास के इलाके में किसी तरह का ट्रैफिक डायवर्जन किया गया था. दिल्ली में हरियाणा की सीमा पर इस समय पंजाब के किसान भी कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं. इस वजह से भी प्रधानमंत्री का अचानक गुरुद्वारा पहुंचना चर्चा का विषय बन गया.

फोटो : नरेंद्र मोदी/ट्विटर

5

कश्मीरी पोशाक – फिरन – में

बीते शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए ‘सेहत’ स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरुआत की. इस योजना के तहत राज्य के हर परिवार को पांच लाख का कैशलेस बीमा मिलेगा. इस दौरान भी नरेंद्र मोदी एक अलग पहनावे – फिरन – में नजर आये. ख़ास यह था कि उन्होंने जिस फिरन को पहना हुआ था उसे जम्मू-कश्मीर के एक खेतिहर मजदूर ने पिछले साल उन्हें तोहफे में दिया था. इस वजह से उनका यह पहनावा भी चर्चा का विषय बन गया.

फोटो : नरेंद्र मोदी/ट्विटर
  • न्यायपालिका

    विचार-रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश

    क्यों इलाहाबाद हाईकोर्ट के ये फैसले उत्तर प्रदेश में एनएसए के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाते हैं

    ब्यूरो | 08 अप्रैल 2021

    अगर विकल्प मिले तो कोवीशील्ड और कोवैक्सिन में से किसे चुनना ज्यादा सही होगा?

    खरा-खोटा | कंपैरिज़न

    अगर विकल्प मिले तो कोवीशील्ड और कोवैक्सिन में से किसे चुनना ज्यादा सही होगा?

    अंजलि मिश्रा | 08 अप्रैल 2021

    सेना को सेहत का घूंट देने वाले मिलिट्री फार्म्स को बंद क्यों कर दिया गया है?

    ज्ञानकारी | सेना

    सेना को सेहत का घूंट देने वाले मिलिट्री फार्म्स को बंद क्यों कर दिया गया है?

    ब्यूरो | 03 अप्रैल 2021

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    विचार-रिपोर्ट | राजनीति

    क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे का सबसे बड़ा मकसद पश्चिम बंगाल का चुनाव है?

    ब्यूरो | 27 मार्च 2021