सुषमा स्वराज

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सुषमा स्वराज: दक्षिणपंथी पार्टी की ‘समाजवादी’ नेता

सुषमा स्वराज का राजनीतिक करियर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू होकर जेपी आंदोलन, जनता पार्टी से गुजरते हुए भारतीय जनता पार्टी तक पहुंचता है

ब्यूरो | 07 अगस्त 2019 | फोटो: ट्विटर-सुषमा स्वराज

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लोकप्रिय वक्ता से लेकर किसी राष्ट्रीय पार्टी की पहली महिला प्रवक्ता होने तक सुषमा स्वराज की तमाम विशिष्ट पहचानें रही हैं. इस कड़ी में सबसे नई यह थी कि उन्होंने आम आदमी को विदेश मंत्रालय से जोड़ा. ऐसा 2014 में उनके विदेश मंत्री बनने के बाद हुआ. सिर्फ एक ट्वीट पर सुषमा स्वराज विदेश में फंसे किसी भारतीय की मदद के लिए तुरंत सक्रिय हो जाती थीं.

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सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला में हुआ था. इसी शहर से कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से कानून की डिग्री ली. हिंदी वक्ता के रूप में सुषमा स्वराज तब भी असाधारण थीं. उन दिनों हरियाणा सरकार के भाषा विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उन्होंने लगातार तीन बार सर्वक्षेष्ठ हिंदी वक्ता का पुरस्कार जीता था. 1973 में सुषमा स्वराज ने सुप्रीम कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की. यहीं उनकी मुलाकात स्वराज कौशल से हुई जो 1975 में उनके जीवनसाथी बने. स्वराज कौशल के नाम 34 साल की उम्र में देश के सबसे युवा महाधिवक्ता और 37 साल की उम्र में देश के सबसे युवा राज्यपाल बनने की उपलब्धि दर्ज है. तो सुषमा स्वराज के नाम सिर्फ 25 साल की उम्र में हरियाणा की कैबिनेट मंत्री बनने का.

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उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की. फिर आपातकाल के दौरान उन्होंने जेपी आंदोलन में हिस्सा लिया. बाद में वे पहले जनता पार्टी और फिर भारतीय जनता पार्टी की सदस्य बन गईं. इसके बाद वे भारत की सूचना प्रसारण मंत्री, दूरसंचार मंत्री और विदेश मंत्री भी बनीं. लोकसभा की बहसों के दूरदर्शन पर सीधे प्रसारण का फैसला उनकी ही देन था. बीच में कुछ समय के लिए वे दिल्ली की मुख्यमंत्री भी रहीं और 2009 में उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी संभाला.

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अक्सर कहा जाता है कि भारत में विदेश मंत्रालय पीएमओ से चलता है. लेकिन सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्री के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई. उनसे पहले तक विदेश मंत्रालय को एक रूखी जगह माना जाता था जो आम आदमी से कहीं दूर थी. लेकिन उन्होंने यह छवि तोड़ी. इराक से लेकर यमन तक तमाम जगहों पर मुश्किलों में फंसे भारतीयों की मदद में उन्होंने व्यक्तिगत दिलचस्पी ली. ऐसा भी उदाहरण है कि किसी ने तड़के तीन बजे अपनी मुश्किल बताते हुए ट्वीट किया और सुषमा स्वराज ने उसका भी जवाब दिया.

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2016 में उनका किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन हुआ था और 2018 में सुषमा स्वराज ने ऐलान कर दिया कि वे अगला चुनाव नहीं लड़ेंगी. कश्मीर से धारा 370 हटाने के लिए प्रधानमंत्री का अभिनंदन करते हुए उन्होंने मंगलवार रात को एक ट्वीट किया था. इसमें उन्होंने कहा था कि मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी.’ इसके कुछ ही घंटे बाद उन्होंने यह संसार छोड़ दिया.

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