सबरीमला मंदिर में प्रवेश करने वाली पहली महिलाएं - बिंदु अम्मिनी और कनकदुर्गा

लोग और इतिहास | महिला मुद्दे

सबरीमला मंदिर में प्रवेश करने वाली बिंदु अम्मिनी और कनकदुर्गा कौन हैं?

केरल निवासी, बिंदु अम्मिनी और कनकदुर्गा ने नए साल के दूसरे दिन सबरीमला मंदिर में प्रवेश कर इतिहास बनाया है

ब्यूरो | 03 जनवरी 2019 | फोटो: स्क्रोल

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बिंदु अम्मिनी और कनकदुर्गा पहली ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने 50 साल से कम यानी माहवारी की उम्र में मंदिर में कदम रखा है. बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाने का आदेश दिया था. इसके बाद से इस पर लगातार राजनीतिक खींचतान और विरोध प्रदर्शन चल रही थी. करीब तीन महीने तक कई असफल प्रयासों के बाद ये महिलाएं दो जनवरी को तड़के पौने चार बजे मंदिर में प्रवेश करने में सफल रहीं.

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42 साल की बिंदु अम्मिनी अपने कॉलेज के दिनों में ‘केरल विद्यार्थी संगठन’ की नेता रहीं थीं. यह एक वामपंथी संगठन है. उन्होंने केरल यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री ली है और अब वे कन्नूर विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज’ में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर काम करती हैं.

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जेंडर और सोशल जस्टिस पर अपने विचारों के लिए छात्रों में लोकप्रिय बिंदु अम्मिनी, एक दलित कार्यकर्ता के रूप में भी पहचानी जाती हैं. राजनीतिक कार्यकर्ता हरिहरन से शादी के बाद उनकी एक 11 साल की बेटी भी है. उनका परिवार केरल के कोझिकोड जिले में रहता है.

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सवर्ण, नायर समाज से संबंधित कनकदुर्गा  एक सरकारी फर्म ‘केरल स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन’ में काम करती हैं. पेशे से इंजीनियर कृष्णानुन्नी से शादी के बाद उनके दो बच्चे हैं और यह परिवार मलप्पुरम में रहता है. परिवार वालों के मुताबिक हिंदू धर्म में गहरी आस्था रखने वाली कनकदुर्गा ने यह कदम क्यों उठाया, इसका उन्हें अंदाजा नहीं है.

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कनकदुर्गा और बिंदु अम्मिनी की मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी. दोनों फेसबुक पेज ‘नवोत्थान केरलम सबरीमलायिलेक्कु’ पर मिली थीं. यह पेज उन महिलाओं को आपस में जोड़ने के लिए बनाया गया था जो सबरीमला मंदिर जाने की इच्छा रखती हैं.

स्क्रोल के इस आलेख पर आधारित

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