लोग और इतिहास | जन्मदिन

कमल हासन की पहली हिंदी फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ देखकर कौन सी पांच बातें दिमाग में आती हैं

हिंदी नायिका और तमिल नायक की ट्रैजिक प्रेम कहानी ‘एक दूजे के लिए’ के जरिए कमल हासन के साथ-साथ अभिनेत्री रति अग्निहोत्री ने भी डेब्यू किया था

ब्यूरो | 25 नवंबर 2018

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27 बरस की उम्र में जब कमल हासन ने हिंदी फिल्मों का रुख किया तब वे दक्षिण भारत में फिल्मों का शतक लगभग बनाने ही वाले थे. ‘एक दूजे के लिए’ उनकी 98वीं या 99वीं फिल्म रही होगी क्योंकि इसी साल यानी 1981 में रिलीज हुई ‘राजा पारवई’ के नाम उनकी 100वीं फिल्म होने का सम्मान दर्ज है. महज छह साल की उम्र से अपना फिल्मी करियर शुरू करने वाले कमल हासन के लिए यह रिकॉर्ड इतनी कम उम्र में बना लेना बहुत मुश्किल बात नहीं रही होगी.

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के बालाचंद्रन निर्देशित ‘एक दूजे के लिए’ कमल हासन की पहली हिंदी फिल्म थी जो उन्हीं की सुपरहिट तेलुगु फिल्म ‘मारो चरित्र’ का हिंदी रीमेक थी. आज से करीब चार दशक पहले रिलीज हुई यह फिल्म न सिर्फ तब ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी बल्कि आज भी कल्ट क्लासिक्स में गिनी जाती है. उस बरस का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के अलावा यह फिल्म फिल्मफेयर अवार्ड्स की 13 श्रेणियों में नॉमिनेट हुई थी और बेस्ट एडिटिंग, लिरिक्स और स्क्रीनप्ले का अवॉर्ड भी जीता था.

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एक दूजे के लिए के शुरुआती दृश्यों में ही हिंदी ना जानने वाले इस सुंदर-सजीले, भोले मगर शैतान नायक से आपकी मुलाकात करवाई जाती है. इसके बाद पूरी फिल्म में वे दृश्य उंगलियों पर भी गिने जा सकते हैं जिनमें कमल हासन मौजूद ना हों. हालांकि इंटरवल तक उनके हिस्से आने वाले संवाद न के बराबर होते हैं, फिर भी उनका चार्म और किरदार के मुताबिक की गई आड़ी-तिरछी हरकतें आपका ध्यान उन पर बनाए रखने में पूरी तरह सफल होती हैं.

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फिल्म के दूसरे हिस्से में कमल हासन खुशी और गम के उन तमाम एक्सप्रेशन्स की झलक देते हैं जो बाद में उनकी ‘सदमा,’ ‘सागर’ या ‘चाची-420’ में और विस्तार से नजर आते हैं. इस हिस्से में उन्हें लंबे-लंबे हिंदी संवादों को अपने दक्षिण भारतीय उच्चारण के साथ बोलते हुए सुना जा सकता है. एक घोर फिल्मी आशिक के उनके इस किरदार को, उसकी सारी विशेषताओं के साथ देखो तो लगता है कि इसे शायद उनके अलावा कोई और नहीं निभा सकता था. रजनीकांत भी नहीं!

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क्लासिकल डांस में ट्रेंड कमल हासन अपनी पहली फिल्म में अपना यह हुनर भी दिखाते हैं. फिल्म में एक्शन सीन ना होने की भरपाई वे इसी से करते हैं. आज इस फिल्म को देखकर लगता है कि शायद ‘एक दूजे के लिए’ के कल्ट फिल्म बन जाने की एक बड़ी वजह यह भी थी कि इसका नायक, उन सारे मानकों पर अनफिट था जो उस वक्त बंबइया फिल्मों के लिए जरूरी समझे जाते थे. इस हिसाब से देखें तो उस वक्त यह कह पाना मुश्किल रहा होगा कि दक्षिण भारत का यह गोरा-चिट्टा सुपरस्टार बॉलीवुड में अपनी जगह बना पाएगा या नहीं, पर शायद फिल्म की अपार सफलता ने सब बदल दिया.

(टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट पर आधारित)

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