अटल बिहारी वाजपेयी

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अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़े पांच दिलचस्प किस्से

आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन है

ब्यूरो | 25 दिसंबर 2018 | फोटो: विकीमीडिया कॉमंस

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अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी ‘हार नहीं मानूंगा’ में पत्रकार विजय त्रिवेदी एक किस्सा बयान करते हैं. एक बार वाजपेयी धर्मशाला जा रहे थे. उनके साथ वरिष्ठ पत्रकार और राज्यसभा सांसद रहे बलबीर पुंज भी थे. यात्रा के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी सो गये. इसी बीच विमान का सह-पायलट कॉकपिट से बाहर आया और उसने पुंज से पूछा कि क्या वे इससे पहले कभी धर्मशाला आए हैं? पुंज द्वारा ऐसा पूछने की वजह पूछे जाने पर उसने कहा कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया है. इतने में वाजपेयी की आंख खुली. उन्हें पूरी बात पता चली तो वे बोले ‘अगर जागते हुए क्रैश होगा तो बहुत तकलीफ होगी इसलिए फिर से सो जाता हूं.’ यह कहकर वे दोबारा सो गए. बाद में इस विमान को धर्मशाला की जगह कुल्लू में सुरक्षित उतार लिया गया.

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1953 की बात है. अटल बिहारी वाजपेयी को मुंबई में जनसंघ की एक जनसभा को संबोधित करना था. जब वे तैयार हुए तो देखा कि जो कुर्ता उन्होंने पहना है वह आस्तीन के पास से फटा हुआ है. उन्होंने अपना दूसरा कुर्ता निकाला. लेकिन वह भी गले के पास फटा हुआ निकला. वाजपेयी बस दो ही कुर्ते लेकर बंबई गए थे और वे दोनों के दोनों फटे हुए थे. अब कोई रास्ता नहीं था. लेकिन उनकी त्वरित बुद्धि ने वहां काम किया. उन्होंने फटे हुए कुर्तों में से एक के ऊपर जैकेट पहन ली. इसके बाद सभा में फटे कुर्ते के बारे में किसी को पता तक नहीं चला.

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अटल बिहारी वाजपेयी को खाने-पीने का बड़ा शौक था. यह बात उन दिनों की है जब देश में आपातकाल लगा था. उन्हें स्वास्थ्य कारणों से बेंगलुरु जेल से दिल्ली के एम्स लाया गया. अभी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता डीपी त्रिपाठी उस वक्त वाजपेयी के बगल वाले कमरे में थे. एक दिन वाजपेयी ने उन्हें बुलाया और पूछा कि देवी प्रसाद शाम के लिए क्या व्यवस्था है. इस पर त्रिपाठी ने पास के पीसीओ से अपनी किसी परिचित को फोन करके अच्छी व्हिस्की की व्यवस्था की. वाजपेयी ने चिकन और खाने की चीजों का भी ऐसे ही इंतजाम किया और शाम को एम्स में ही बैठक जमा ली.

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आपातकाल के बाद 1977 में बनी मोरारजी देसाई की सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री बने थे. विदेश मंत्री बनने के बाद जब वे पहले दिन विदेश मंत्रालय पहुंचे तो उन्होंने देखा कि दफ्तर की एक दीवार से जवाहरलाल नेहरू की तस्वीर गायब है. पता चला कि जब गैर कांग्रेसी सरकार बनी तो विदेश मंत्रालय के अफसरों को लगा कि जनसंघ से आने वाले नए विदेश मंत्री को नेहरू की तस्वीर अच्छी नहीं लगेगी. इसलिए उन्हें खुश करने के लिए अधिकारियों ने नेहरू की तस्वीर हटा दी थी. इसके बाद वाजपेयी ने विदेश मंत्रालय के अफसरों को जितनी जल्दी हो सके उस तस्वीर को फिर से लगाने का आदेश दिया.

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विजय त्रिवेदी ने अपनी पुस्तक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ विचारक और पांचजन्य के पूर्व संपादक देवेंद्र स्वरूप के हवाले से एक किस्से का उल्लेख किया है. स्वरूप के मुताबिक एक बार अमेरिका जाने वाले एक प्रतिनिधिमंडल में अटल बिहारी वाजपेयी के साथ कांग्रेस की नेता मुकुल बनर्जी भी थीं. एक सरकारी भोज में बीफ यानी गोमांस भी परोसा जा रहा था. बनर्जी वाजपेयी के बगल में ही बैठी थीं. उन्होंने जब वाजपेयी का इस ओर ध्यान दिलाया तो उनका कहना था – ये गायें इंडिया की नहीं, अमेरिका की हैं.

(सत्याग्रह की इस रिपोर्ट पर आधारित)

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