पवन कल्याण

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पवन कल्याण : जो आंध्र प्रदेश की राजनीति में दिख रहे बदलाव को एक पलटी और खिला सकते हैं

पहली बार चुनावी राजनीति में उतरे तेलुगु फिल्मों के अभिनेता पवन कल्याण आंध्र प्रदेश में बसपा और वाम दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं

ब्यूरो | 11 अप्रैल 2019 | फोटो : ट्विटर

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इस चुनावी मौसम में आंध्र प्रदेश से तीन नाम पूरे देश में सुर्ख़ियां बटोर रहे हैं. इनमें से पहला नाम है सत्ताधारी तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष और राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का. दूसरा, प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख जगन मोहन रेड्‌डी का. और तीसरा अभिनेता से नेता बने पवन कल्याण का. कई वजहों से यह नाम इस वक्त आंध्र प्रदेश में शायद सबसे ज्यादा चर्चा और आरोपों के घेरे में है.

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उदाहरण के तौर पर चंद्रबाबू नायडू ने उन पर आरोप लगाया है कि वे जगन मोहन रेड्‌डी के साथ मिले हुए हैं. वहीं जगन मोहन रेड्‌डी कहते हैं कि पवन कल्याण चंद्रबाबू नायडू को फ़ायदा पहुंचाने के लिए चुनाव मैदान में हैं. कुछ आकलनों की मानें तो पवन कल्याण ने आंध्र प्रदेश की चुनावी लड़ाई को तिकोना बना दिया है.

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पवन कल्याण का अतीत और वर्तमान देखें तो उन पर लगने वाले आरोप उनसे जुड़े आकलन पूरी तरह निराधार भी नहीं लगते. उन्होंने 2009 में अपने बड़े भाई चिरंजीवी और उनकी प्रजा राज्यम पार्टी के लिए पहली बार राजनीति की डगर पकड़ी. लेकिन प्रजा राज्यम पार्टी बाद में कांग्रेस का हिस्सा बन गई.

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फिर 2014 में जब पवन कल्याण ने अपनी जन सेना पार्टी बनाई तो वो भाजपा और टीडीपी के साथ थी. पवन कल्याण ने इस गठबंधन को न सिर्फ समर्थन दिया बल्कि उसका प्रचार भी खूब किया. हालांकि दो-ढाई साल बाद वे इससे अलग हो गए. इसी बीच उन्होंने एकाध बार जगन मोहन रेड्‌डी को भी शर्तों पर समर्थन देने की बात कही. और वर्तमान में वे बसपा और वाम दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. इस तरह मोटे तौर पर देखने से लगता है कि पवन कल्याण के लिए कोई भी पार्टी अछूत नहीं है.

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चुनाव पूर्व आकलनों की मानें तो इस बार पवन कल्याण कम से कम विधानसभा की इतनी सीटें तो जीत ही सकते हैं कि टीडीपी या वाइएसआर कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए उनकी ज़रूरत पड़ जाए. ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर वे आंध्र प्रदेश की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में दिख सकते हैं. या संभव है ‘किंग’ यानी राज्य के मुख्यमंत्री ही बन जाएं. जैसे कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी बने हैं.

  • राहुल और प्रियंका गांधी

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