पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

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सत्ता के गलियारों की कानाफूसी: मनमोहन सिंह चाहते तो 1980 में ही केंद्रीय मंत्री बन सकते थे

मनमोहन सिंह | मुकेश अंबानी परिवार की शादी | लोकसभा चुनाव | बोगीबील पुल | राजस्थान, सचिन पायलट, अशोक गहलोत

ब्यूरो | 02 जनवरी 2019 | फोटो: पीआईबी

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मनमोहन सिंह चाहते तो 1980 में ही केंद्रीय मंत्री बन सकते थे

पिछले दिनों एक समारोह में मनमोहन सिंह ने बताया कि वे न केवल प्रधानमंत्री बनते वक्त बल्कि 1991 में वित्त मंत्री बनने के समय भी उतने ही हैरान हुए थे. उनसे पहले आरबीआई के गवर्नर रहे आईजी पटेल इस मामले में पीवी नरसिंह राव की पहली पसंद थे. जब उन्होंने इस पद को ठुकरा दिया तो कई लोगों के नाम चर्चा में चल रहे थे. चूंकि कुछ भी निश्चित नहीं था इसलिए मनमोहन सिंह एक कॉन्फरेंस में भाग लेने के लिए स्विटजरलैंड चले गये. अभी वे वहां से लौटे ही थे कि प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव का फोन आया. उन्होंने मनमोहन सिंह को अच्छे से तैयार होकर शपथ ग्रहण समारोह में आने के लिए कहा. इससे पहले इंदिरा गांधी भी उन्हें अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाना चाहती थीं. लेकिन मनमोहन सिंह पेंशन वाली एक सुरक्षित नौकरी चाहते थे इसलिए उन्होंने इसके लिए मना कर दिया.

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अंबानी परिवार की शादी: जाना है, दिखाना नहीं

हाल ही में हुई मुकेश अंबानी की बेटी की शादी में देश और दुनिया के तमाम महत्वपूर्ण लोग शामिल हुए. लेकिन प्रियंका चोपड़ा और विराट कोहली की शादी से जुड़े समारोहों में जाने वाले हमारे प्रधानमंत्री ने देश के सबसे बड़े उद्योगपति के परिवार से जुड़ी शादी के हर समारोह से अपनी दूरी बनाए रखी. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी इनमें से किसी में भी शामिल न होकर कांग्रेस और विपक्ष को भाजपा, केंद्र सरकार और खुद पर हमला करने का एक और मोका छीन लिया. चूंकि कुछ ही महीनों में अगले लोकसभा चुनाव भी होने हैं इसलिए हमारे देश के कई बड़े राजनेताओं आदि को इसमें शामिल होना ही था. शायद इस वजह से भी शादी के निमंत्रण के साथ एक पत्र भेजा गया था जिसमें समारोह के फोटो या वीडियो न बनाने का अनुरोध था. हालांकि इसे किसी ने माना नहीं. फिर भी इन कैमरों की जद में आने से महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी इसलिए बच गये क्योंकि इतने बड़े सितारों और राजनेताओं के आगे उनकी ओर ध्यान देने का किसी के पास वक्त ही नहीं था.

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अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी में

लोकसभा इलेक्शन आने ही वाले हैं और इसके चलते हमारे राजनेताओं का मुश्किल घुमक्कड़ी वक्त भी शुरू होने वाला है. इसकी तैयारी के लिए इनमें से कई ने अपने शरीर को मजबूत करने का काम जोर-शोर से शुरू कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो अपनी सेहत का ध्यान रखने के लिए जाने ही जाते हैं. हाल ही में उन्होंने एक वीडियो जारी कर इसका राज़ दुनिया के सामने रखा भी था. उनके अलावा एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर, पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन, इस्पात मंत्री बीरेंदर सिंह, संसदीय कार्य मंत्री विजय गोयल और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार को आजकल काम के साथ व्यायाम में मन लगाते देखा जा सकता है.

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बोगीबील पुल पर इन दो लोगों का कर्ज भी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार असम में हाल ही में बनकर तैयार हुए बोगीबील पुल का श्रेय ले रही है. लेकिन इस पुल के संदर्भ में दो ऐसे लोगों के बारे में जानना जरूरी है जिनके बिना ये पुल अब तक कागजों में ही रह सकता था. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह असम से राज्यसभा सदस्य थे और उन्होंने ही 2007 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाया. उनसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी और उनकी सरकार में अतिरिक्त सचिव रहे अशोक सिक्का ने इस प्रोजेक्ट को बनाने के लिए रेलवे पर जरूरी दबाव डाला. रेलवे को लगता था कि भारी लागत की वजह से बोगीबील पुल को बनाना उसके लिए बहुत बड़े घाटे का सौदा साबित हो सकता है.

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ऊंचा दिल्ली उठाती है

राजस्थान सरकार में इस वक्त राहुल गांधी के करीबी और उप मुख्यमंत्री होने के बाद भी सचिन पायलट एक तरह से हाशिये पर हैं. इस समय वहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास वित्त और गृह सहित नौ महत्वपूर्ण मंत्रालय हैं. राज्य कैबिनेट उनके वफादारों से भरा हुआ है. और उन्होंने करीब सौ आधिकारियों के ट्रांसफर भी किसी से मशविरा किये बिना कर दिये हैं. चल रही कानाफूसी की मानें तो सचिन पायलट इस वक्त अपना पूरा ध्यान अगले लोकसभा चुनाव पर लगाये हुए हैं. जिस तरह गहलोत ने संगठन में और हाईकमान के नजदीक रहकर जो चाहा वह पाया कुछ-कुछ उसी तरह की योजना उनकी भी है.

इंडियन एक्सप्रेस के इस लेख पर आधारित

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