प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

विचार-रिपोर्ट | राजनीति

क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे का सबसे बड़ा मकसद पश्चिम बंगाल का चुनाव है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे को पश्चिम बंगाल में मतुआ समुदाय को रिझाने की कोशिश की तरह भी देखा जा रहा है

ब्यूरो | 27 मार्च 2021 | फोटो : पीआईबी

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प्रधानमंत्री का बांग्लादेश दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार दोपहर बांग्लादेश पहुंच गए. बांग्लादेश इस साल अपनी आजादी की 50वीं सालगिरह मना रहा है, भारतीय प्रधानमंत्री इसी के जश्न में शरीक होंगे. नरेंद्र मोदी अपनी इस यात्रा के दूसरे दिन यानी 27 मार्च को बांग्लादेश के बरीसाल जिले में स्थित सुगंधा शक्तिपीठ भी जाएंगे. इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और ये बांग्ला हिंदुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है. इसके अलावा वे राजधानी ढाका से 200 किमी दूर स्थित ओरकांडी में मतुआ समाज के मंदिर भी जाएंगे. ओरकांडी, मतुआ समुदाय के संस्थापक हरिचंद ठाकुर की जन्मस्थली है. यह समुदाय हरिचंद ठाकुर को भगवान की तरह पूजता है. हरिचंद ठाकुर ने 1870 के दशक में इस जाति के लोगों को जातीय भेदभाव और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाने के लिए बड़ा जनजागरण अभियान चलाया था. तभी उन्होंने इस समुदाय के लिए मतुआ महासंघ की भी स्थापना की थी.

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मतुआ समुदाय की पश्चिम बंगाल में स्थिति

मुख्यत: पूर्वी बंगाल से आने वाले मतुआ समुदाय का एक बड़ा हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान (जो अब बांग्लादेश है) बनने के बाद पश्चिम बंगाल आ गया. हरिचंद ठाकुर के वंशज प्रमथ रंजन ठाकुर और उनकी पत्नी बीणापाणि देवी भी इसमें शामिल थे जिन्होंने भारत आकर मतुआ महासंघ की कमान संभाली थी. पश्चिम बंगाल में इस समय मतुआ समुदाय की आबादी करीब तीन करोड़ जो राज्य की कुल आबादी की करीब 30 फीसदी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें से करीब एक करोड़ लोग चुनावों में वोट डालते हैं और राज्य की तकरीबन 70 विधानसभा सीटों के परिणामों को किसी भी ओर मोड़ने की क्षमता रखते हैं. बंगाल में मतुआ समुदाय की सबसे ज्यादा आबादी उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, नदिया, जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी, कूचबिहार और बर्दवान जिलों में है.

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मतुआ समुदाय में ममता बनर्जी की पैठ

1975 के बाद पश्चिम बंगाल लेफ्ट पार्टियों का गढ़ बन गया था और उस समय से ही मतुआ समुदाय इनका बड़ा वोट बैंक बना हुआ था. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुखिया ममता बनर्जी जानती थीं कि लेफ्ट को हराने के लिए मतुआ समुदाय का वोट पाना बहुत जरूरी है. इसलिए 2010 में उन्होंने मतुआ महासंघ की सर्वोच्च नेता बीणापाणि देवी से उनके घर जाकर मुलाकात की. इसके बाद बीणापाणि देवी ने न केवल ममता को अपना समर्थन देने की घोषणा की, बल्कि उन्हें मतुआ समुदाय का संरक्षक भी घोषित कर दिया. टीएमसी प्रमुख ने मतुआ समुदाय में गहरी पैठ बनाए रखने के लिए 2011 के बंगाल विधानसभा चुनाव में बीणापाणि देवी के छोटे बेटे मंजुल कृष्ण ठाकुर को और 2014 के लोकसभा चुनाव में बड़े बेटे कपिल कृष्ण ठाकुर को टीएमसी का टिकट दिया. ममता बनर्जी की इन कोशिशों के चलते मतुआ समुदाय लेफ्ट पार्टियों से छिटक कर टीएमसी का वोट बैंक बन गया.

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टीएमसी की पैठ में भाजपा की घुसपैठ

2015 में बीणापाणि देवी के बड़े बेटे और बनगांव से टीएमसी सांसद कपिल कृष्ण ठाकुर का निधन हो गया. इसके बाद टीएमसी ने उनकी पत्नी ममता बाला ठाकुर को बनगांव लोकसभा सीट से उपचुनाव में उतारा. इससे नाराज होकर बीणापाणि के छोटे बेटे और टीएमसी विधायक मंजुल कृष्ण ठाकुर भाजपा में शामिल हो गए. 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने मंजुल के बेटे शांतनु ठाकुर को टीएमसी की ममता बाला ठाकुर के खिलाफ बनगांव से मैदान में उतार दिया. इस चुनाव में शांतनु ठाकुर एक लाख से ज्यादा वोटों से विजयी हुए. इसकी एक वजह यह भी थी कि भाजपा ने इस समुदाय से वादा किया था कि पश्चिम बंगाल आए मतुआ समुदाय के जिन लोगों को भारत की नागरिकता नहीं मिली है, उन्हें कानून में संशोधन करके इसे दिया जाएगा. लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बीणापाणि देवी से मुलाकात कर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लाने की बात कही थी.

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भाजपा और टीएमसी में मतुआ समुदाय को रिझाने की होड़

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी और भाजपा दोनों ही मतुआ समुदाय को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. ममता बनर्जी ने मतुआ समुदाय के लिए मतुआ विकास बोर्ड और नमोशूद्र विकास परिषद की स्थापना करने की घोषणा की है. उन्होंने यह वादा भी किया है कि वे हरिचंद ठाकुर के सम्मान में उनके जन्मदिवस को राजकीय अवकाश घोषित करेंगी. उधर, भाजपा नेता और गृहमंत्री अमित शाह विधानसभा चुनाव से पहले इस समुदाय के लोगों से कई बार मुलाकात कर चुके हैं, उन्होंने एक मतुआ परिवार के साथ खाना भी खाया. गृहमंत्री ने हाल ही में मतुआ समुदाय का गढ़ कहे जाने वाले उत्तर 24 परगना जिले में अपनी एक सभा में कहा, ‘कोविड-19 के टीकाकरण की प्रक्रिया समाप्त होते ही, सीएए के तहत नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. आप सभी (मतुआ समुदाय के लोग) इस देश के सम्मानित नागरिक होंगे.’ अब कई लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हरिचंद ठाकुर की जन्मस्थली पर जाने को मतुआ समुदाय को रिझाने की एक और कोशिश की तरह देख रहे हैं.

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