सड़क पर घूमते आवारा जानवर

विचार-रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं की समस्या और बड़ी होने की आशंका क्यों बनी हुई है?

उत्तर प्रदेश में गौवध पर पूरी तरह प्रतिबंध है जिससे यहां आवारा छोड़े गए अनुपयोगी गौवंश की तादाद तेजी से बढ़ रही है

ब्यूरो | 04 जनवरी 2019 | फोटो: फ्लिकर

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उत्तर प्रदेश की जनता, ख़ास तौर पर किसान और वहां की सरकार भी इन दिनों आवारा पशुओं की समस्या से परेशान हैं. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने गौवध पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया हुआ है. इसके अलावा रही-सही कसर गौरक्षक पूरी कर रहे हैं. इसके चलते आवारा छोड़े गए अनुपयोगी गौवंश की तादाद पूरे राज्य में तेजी से बढ़ी है.

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समस्या की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लग सकता है कि अलीगढ़, मथुरा, फ़िरोज़ाबाद और लखीमपुर खीरी जैसे उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ग्रामीण आवारा पशुओं को स्कूलों और अस्पतालों में बांध रहे हैं. मेरठ में तो ग्रामीण सैकड़ों पशु लेकर तहसील परिसर में ही घुस गए. इससे अव्यवस्था की स्थितियां पैदा होने लगी हैं. प्रशासन और ग्रामीणों में झड़पों की ख़बरें भी आ रही हैं.

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इस समस्या पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि समाजवादी पार्टी के लोग दूध निकालकर पशुओं को खेतों में छोड़ देते हैं. दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही कहते हैं कि पहले की सरकारों ने न तो पशुओं की उन्नत नस्लों के विकास पर ध्यान दिया और न उनके चारा और संरक्षण की सही व्यवस्था की जिसकी वजह से यह परेशानी दिख रही है. यानी समस्या का प्रभावी समाधान ढूंढने के बजाय सियासत के लिए रास्ते तलाशे जा रहे हैं.

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लेकिन ऐसा भी नहीं है कि राज्य सरकार कुछ कर नहीं रही हैं. उसने पूरे राज्य में ‘कान्हा उपवन’ के नाम से निराश्रित पशु आश्रय स्थल बनाने का फ़ैसला किया है. लेकिन बरेली में स्थापित प्रदेश के पहले कान्हा उपवन में अव्यवस्था, जानवरों के उत्पात और ठंड से गायों के मर जाने तक की ख़बरें आ चुकी हैं. गौवंश की देखभाल के लिए हाल ही में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने दो फ़ीसदी गौकल्याण उपकर लगाने का भी फ़ैसला किया है. लेकिन ‘गौकल्याण उपकर’ के विरोध की बात भी सुनने में आ रही है.

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जानकारों को लगता है कि ‘गौकल्याण उपकर’ का हश्र भी स्वच्छ भारत उपकर जैसा ही हो सकता है और बाकी उपाय अगर सफल होंगे भी तो ऐसा होने में काफी वक्त लगने वाला है. ऐसे में यह आशंका लगातार बनी हुई है कि उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं के मामले में हालात कहीं और ज़्यादा गंभीर न हो जाएं.

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