कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

विचार-रिपोर्ट | राजनीति

क्या सिर्फ दक्षिण भारत में कांग्रेस का प्रदर्शन संभालने के लिए राहुल गांधी वायनाड से चुनाव लड़ रहे हैं?

कांग्रेस के नेताओं से बातचीत करने पर राहुल गांधी के केरल से चुनाव लड़ने के बारे में एक दिलचस्प जानकारी सामने आती है

ब्यूरो | 05 अप्रैल 2019 | फोटो: inc.in

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इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी के साथ-साथ केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड रहे हैं. अमेठी की सीट पारंपरिक तौर पर गांधी परिवार से जुड़ी रही है. ऐसे में राहुल गांधी के केरल से भी लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं.

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कांग्रेस ये कहकर राहुल गांधी का बचाव कर रही है कि पहले भी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व दक्षिण भारत से चुनाव लड़ता रहा है. और इससे दक्षिण भारत में पार्टी का प्रदर्शन सुधरेगा. वहीं भारतीय जनता पार्टी का ये कहना है कि अमेठी में हारने के डर से राहुल गांधी केरल से भी चुनाव लड़ रहे हैं.

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उधर, कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा को उत्तर भारत में होने वाले नुकसान की भरपाई दक्षिण भारत से होने की उम्मीद थी. लेकिन राहुल गांधी के वहां जाने से स्थिति थोड़ी बदल सकती है. इसलिए भाजपा इस तरह की बातें कर रही है. कांग्रेस के नेताओं से बातचीत करने पर राहुल गांधी के केरल से चुनाव लड़ने के बारे में एक और दिलचस्प जानकारी सामने आती है. इनका कहना है कि अध्यक्ष बनने के बाद से ही कांग्रेस के पुरानी पीढ़ी के नेताओं में राहुल गांधी का विश्वस्त बनने की होड़ लगी हुई है. और इसके चलते भी राहुल वायनाड से भी लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

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सोनिया गांधी के बेहद करीबी लोगों में अहमद पटेल और एके एंटनी का नाम लिया जाता था. राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद समीकरण बदल गए और अशोक गहलोत पार्टी अध्यक्ष के सबसे करीबी लोगों में शामिल हो गए. लेकिन गहलोत के राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने के बाद स्थितियां एक बार फिर से अहमद पटेल के अनुकूल हो गईं.

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ऐसे हालात में जब राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव पार्टी में आया. तो इसे कांग्रेस की पुरानी पीढ़ी के कई नेताओं का पूरा समर्थन मिला. ये नेता नहीं चाहते थे कि राहुल अहमद पटेल पर एक हद से ज्यादा निर्भर रहें. चूंकि वायनाड चुनाव की ज्यादातर जिम्मेदारी एके एंटनी को संभालनी होगी. ऐसे में एके एंटनी के राहुल गांधी की कोर टीम में जाने का रास्ता खुल सकता है और अहमद पटेल पर पार्टी अध्यक्ष की निर्भरता थोड़ी कम हो सकती है.

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