राहुल गांधी

विचार-रिपोर्ट | राजनीति

क्या तीन राज्यों की जीत ने राहुल गांधी की छवि को बदल दिया है?

इस साल के अक्टूबर से चुनाव खत्म होने तक राहुल गांधी ने पांच राज्यों में करीब 82 रैलियों कीं और नरेंद्र मोदी ने 31

ब्यूरो | 20 दिसंबर 2018 | फोटो : आईएनसी

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मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हुई कांग्रेस की जीत के पीछे कमलनाथ, अशोक गहलोत, सचिन पायलट और भूपेश बघेल जैसे कई नेताओं की भूमिका है, लेकिन इस जीत में राहुल गांधी की भूमिका नहीं है यह कहना सही नहीं होगा. अगर कांग्रेस इन चुनावों में हार जाती तो इसकी ठीकरा पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के सर पर फोड़ा जाता. इस हिसाब से जीत का श्रेय उन्हें भी मिलना ही चाहिए.

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इस साल के अक्टूबर से चुनाव खत्म होने तक राहुल गांधी ने पांच राज्यों में करीब 82 रैलियों कीं और नरेंद्र मोदी ने 31. राहुल ने इस दौरान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में रोड शो भी किये. इसके बाद राहुल की ‘मजबूरी का नेता’ वाली छवि अब पुराने समय की बात हो जानी चाहिए.

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राहुल के चुनावी अभियान की एक खासियत यह थी कि उन्होंने इसके दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी केंद्र सरकार पर बहुत तीखे और लगातार हमले किये. उन्होंने अपनी रैलियों में ‘चौकीदार और चोर’ वाले जुमले को इस्तेमाल किया. कई लोगों को यह ठीक नहीं लगा लेकिन यह भी सच है कि यह मीडिया और लोगों में बड़ी चर्चा का विषय बन गया. इसके साथ-साथ उन्होंने नोटबंदी, जीएसटी, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और रफाल को लेकर भी प्रधानमंत्री और भाजपा पर तीखे हमले किये.

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तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत को जो लोग सिर्फ भाजपा के खिलाफ आया नतीजा बता रहे हैं वे सही नहीं लगते. किसानों की कर्जमाफी और एमएसपी को बढ़ाने के राहुल गांधी के वायदे की भी इसमें बड़ी भूमिका होनी चाहिए. राहुल ने किसानों से उन चीजों के वायदे किये जिनकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी.

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पिछले दिनों राहुल गांधी ने मंदिरों आदि में जाकर अपनी नर्म हिंदुत्व में विश्वास रखने वाली जो छवि बनाने की कोशिश की थी, इस जीत में उसकी भूमिका के बारे में पक्के तौर पर कहना मुश्किल है. लेकिन यह पक्का है कि इससे कांग्रेस का नुकसान नहीं हुआ. और ऐसे में राहुल और दूसरे कांग्रेसी नेताओं के मंदिरों में जाने का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है.

हिंदुस्तान टाइम्स के इस लेख पर आधारित

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