राहुल गांधी

विचार-रिपोर्ट | राजनीति

पुलवामा हमले के बाद से कांग्रेस गठबंधन से दूर रहने पर विचार क्यों करने लगी है?

कांग्रेस के रणनीतिकार अब यह चाहते हैं कि अगला लोकसभा चुनाव गठबंधन से ज्यादा अपने दम पर लड़ा जाना चाहिए

ब्यूरो | 06 मार्च 2019 | फोटो : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

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27 फरवरी 2019. पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने पर भारतीय वायु सेना की कार्रवाई के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था. इसी माहौल में दिल्ली में विपक्षी दलों की एक बैठक हुई. इसके बाद एक संयुक्त बयान जारी हुआ जिसे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पढ़ा. ये बयान आज तक उनके लिए मुश्किल बना हुआ है.

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सूत्रों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस की अध्य्क्ष ममता बनर्जी के कहने पर ही राहुल गांधी को ये बयान पढ़ना पढ़ा था. इसमें राहुल ने कहा था कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सेना के जवानों के बलिदान का राजनीतिकरण कर रहा है. राहुल गांधी का यह बयान जारी होते ही पाकिस्तानी मीडिया मीडिया की सुर्खियां बन गया.

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इसके बाद से भाजपा के छोटे-बड़े सभी नेता एक सुर में एक ही बात कह कह रहे हैं – जब मोदी सरकार पाकिस्तान को घेर रही थी उस वक्त विपक्षी नेता पाकिस्तान की भाषा बोल रहे थे. इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है. उसके भीतर सवाल उठ रहे हैं कि राहुल गांधी के न चाहने के बाद भी उनसे ऐसी प्रेस कांफ्रेंस क्यों करवाई गई जिसने भाजपा को इतना बड़ा मुद्दा आसानी से दे दिया?

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कांग्रेस के रणनीतिकारों को अब लग रहा है कि राहुल गांधी को फिलहाल विपक्ष और उसके नेताओं से दूर ही रहना चाहिए. उन्हें लग रहा है कि अब देश का मिजाज ऐसा है जिसमें जनता एक पार्टी की ही मजबूत सरकार बनाना चाहेगी. ऐसे में अब कांग्रेस को लग रहा है कि अगला आम चुनाव राहुल गांधी बनाम नरेंद्र मोदी की तर्ज पर लड़ा जाना चाहिए. इन्हें लगता है कि इसका सबसे ज्यादा फायदा पार्टी को उत्तर प्रदेश में हो सकता है.

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कांग्रेस के नेताओं के मुताबिक नरेंद्र मोदी और भाजपा पाकिस्तान का डर दिखाकर वोट मांगते हैं तो कांग्रेस को सभी मोदी विरोधी वोटों को अपने पाले में लाने की कोशिश करनी चाहिए. इनका मानना है कि इस समय ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो भाजपा से खुश नहीं हैं. ऐसे में, कांग्रेस ये संदेश देना चाहती है कि जो मोदी के साथ हैं वे भाजपा को वोट दें और जो उनके खिलाफ हैं वे राहुल गांधी को चुनें. उसे लगता है कि इस तरह की साफ रणनीति के साथ सीधी बात करने से चुनाव में उसे काफी फायदा हो सकता है.

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