डॉक्टर

विचार-रिपोर्ट | कोविड-19

ऑक्सीजन और आईसीयू के बाद अगला महासंकट डॉक्टरों और नर्सों की कमी के रूप में सामने आ सकता है

लेकिन इस संकट से निपटने के कुछ सीधे और सादे तरीके भी हैं

ब्यूरो | 05 मई 2021 | फोटो: पिक्साबे

1

कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच देश भर में हर जगह से ऑक्सीजन की कमी की खबरें आ रही हैं. आलम यह है कि कई अस्पतालों में मरीज इसके चलते दम तोड़ रहे हैं. उधर, विशेषज्ञों का कहना है कि एक और समस्या मुंह बाए खड़ी है और यह है मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों और नर्सों की कमी. जैसा कि एक हालिया आयोजन के दौरान देश के जाने-माने कार्डिएक सर्जन देवी शेट्टी का कहना था, ‘कुछ हफ्तों में अगली समस्या होगी आईसीयू में मरीजों की मौत क्योंकि उनकी देखभाल के लिए डॉक्टर और नर्सें ही नहीं हैं.’

2

यह समस्या अवश्यंभावी दिख रही है. जैसा कि डॉ. देवी शेट्टी का कहना था, ‘मई और जून में इस कदर गर्मी होती है कि सबसे फिट लोगों के लिए भी कोविड आईसीयू में (पीपीई किट पहनकर) चार-पांच घंटे भी काम करना मुश्किल हो जाता है. जो डॉक्टर महामारी की पहली लहर से काम पर लगे हैं वे मानसिक तौर पर थक चुके हैं, उन्हें शारीरिक थकान भी है और उनमें से कई संक्रमण का शिकार भी हो रहे हैं.’ माना जा रहा है कि भारत में कोविड टेस्ट में प्रतिदिन पॉजिटिव पाये जाने वाले हर एक मरीज पर पांच से 10 मरीज ऐसे हैं जो संक्रमित तो हैं, लेकिन उनका टेस्ट नहीं हो रहा है. इसका मतलब है कि भारत में कोविड संक्रमण के मामलों की संख्या प्रतिदिन पांच से 10 लाख तक हो सकती है.

3

डॉ. देवी शेट्टी की मानें तो ‘हमें दो लाख नर्सों और डेढ़ लाख डॉक्टरों की जरूरत है जिनका काम अगले एक साल तक सिर्फ कोविड से निपटना हो.’ उनके मुताबिक देश के अलग-अलग नर्सिंग कॉलेजों में दो लाख 20 हजार नर्से हैं जिन्होंने अपनी ट्रेनिंग तो पूरी कर ली है, लेकिन फाइनल परीक्षा नहीं दी है. डॉ शेट्टी के मुताबिक इन प्रशिक्षित नर्सों को आईसीयू में काम करने का विकल्प दिया जाना चाहिए जिसके बाद उन्हें उनका डिग्री या डिप्लोमा सर्टिफिकेट दिया जा सकता है.

4

डॉ देवी शेट्टी का कहना है कि यही काम डॉक्टरों के मामले में भी किया जा सकता है. उनके मुताबिक अभी देश में 1.30 लाख ऐसे युवा डॉक्टर हैं जो पोस्ट ग्रेजुएशन की सीट के लिए होने वाली नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में यह परीक्षा तुरंत ऑनलाइन करवाई जानी चाहिए और जल्द ही नतीजे भी घोषित होने चाहिए. उसके बाद भी जो एक लाख डॉक्टर इसे पास नहीं कर पाते, उन्हें कोविड आईसीयू में काम करने की इजाजत दी जानी चाहिए. डॉ देवी शेट्टी के मुताबिक इन डॉक्टरों को इसके एवज में अगले साल की एंट्रेंस परीक्षा में ग्रेस मार्क्स दिये जाने चाहिए.

5

देश में ऐसे डॉक्टरों की संख्या करीब 25 हजार है जिन्होंने अपनी पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनिंग पूरी कर ली है, लेकिन अभी परीक्षा नहीं दी है. डॉ देवी शेट्टी के मुताबिक इन डॉक्टरों से कहा जाना चाहिए कि अगर वे अगले एक साल तक कोविड आईसीयू में काम करते हैं तो उन्हें बिना परीक्षा के ही डिग्री दे दी जाएगी. यही नहीं, देश में ऐसे डॉक्टरों की भी 90 हजार से एक लाख तक की तादाद है जिन्होंने अपनी डिग्री किसी विदेशी यूनिवर्सिटी से ली है, लेकिन अभी तक नेशनल एंट्रेस एक्जाम पास नहीं किया है. डॉ देवी शेट्टी का मानना है कि इन डॉक्टरों को भी यह विकल्प मिलना चाहिए कि अगर अगले एक साल तक वे कोविड आईसीयू में सेवा देते हैं तो वे एक्जाम के बगैर ही रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के पात्र हो जाएंगे.

  • रियलमी नार्ज़ो 30 5जी मोबाइल फोन

    खरा-खोटा | मोबाइल फोन

    रियलमी नार्ज़ो 30 (5जी): मनोरंजन के लिए मुफीद एक मोबाइल फोन जो जेब पर भी वजन नहीं डालता है

    ब्यूरो | 03 जुलाई 2021

    ह्यूंदेई एल्कजार

    खरा-खोटा | ऑटोमोबाइल

    क्या एल्कजार भारत में ह्यूंदेई को वह कामयाबी दे पाएगी जिसका इंतजार उसे ढाई दशक से है?

    ब्यूरो | 19 जून 2021

    वाट्सएप

    ज्ञानकारी | सोशल मीडिया

    ‘ट्रेसेबिलिटी’ क्या है और इससे वाट्सएप यूजर्स पर क्या फर्क पड़ेगा?

    ब्यूरो | 03 जून 2021

    कोविड 19 की वजह से मरने वाले लोगों की चिताएं

    आंकड़न | कोरोना वायरस

    भारत में अब तक कोरोना वायरस की वजह से कितने लोगों की मृत्यु हुई होगी?

    ब्यूरो | 27 मई 2021