पीएम नरेंद्र मोदी में विवेक ओबेरॉय

विचार-रिपोर्ट | राजनीति

क्या नरेंद्र मोदी का गुणगान करने वाले गाने ‘पब्लिसिटी मटीरियल’ में नहीं आते?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी फिल्म और वेबसीरीज से जुड़ी हर सामग्री पर प्रतिबंध लगने के बाद भी इनसे जुड़े गाने तमाम म्यूजिक स्ट्रीमिंग साइट्स पर उपलब्ध हैं

ब्यूरो | 25 अप्रैल 2019

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इन लोकसभा चुनावों में प्रचार करने के लिए तमाम तरीकों का इस्तेमाल हो रहा है. राजनीतिक पार्टियां आदर्श आचार संहिता से बचते-बचाते लोगों के मानस पर गहरा असर डालने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही हैं. ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर अपने टोपी, झंडे और टी-शर्ट आदि बेचने से लेकर वेब पर अपने राजनीतिक विज्ञापन देने तक के मामले में सत्ताधारी भाजपा इनमें सबसे आगे नजर आ रही है. तमाम मोबाइल गेम्स भी मोदी जी को राफेल, जीएसटी और महागठबंधन की बाधाएं पार कर दोबारा प्रधानमंत्री बनता दिखा रहे हैं!

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इन चुनावों में नमो टीवी के बाद सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी और इरोज नाउ की वेब सीरीज ‘मोदी : जर्नी ऑफ अ कॉमन मैन’ ने. काफी हो-हल्ले के बाद चुनाव आयोग ने ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ पर लोकसभा चुनाव शुरू होने से ठीक एक दिन पहले रोक लगा दी. वहीं ‘मोदी : जर्नी ऑफ अ कॉमन मैन’ को इसके करीब 10 दिन बाद प्रतिबंधित किया गया.

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इसके बाद इरोस नाउ ने अपनी वेबसाइट से इस सीरीज को हटाने के साथ-साथ इससे संबंधित हर प्रमोशनल मटीरियल को भी यूट्यूब से हटा लिया. इसी तरह ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ से जुड़ी कोई सामग्री भी अब यूट्यूब पर उपलब्ध नहीं हैं. लेकिन प्रधानमंत्री पर बनी फिल्म और वेब सीरीज से जुड़े गाने अभी भी कुछ स्ट्रीमिंग एप्स और उनकी वेबसाइटों पर मौजूद हैं?

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हिंदुस्तान में किसी भी स्तर के चुनाव प्रचार में गीतों का अहम स्थान होता है. लेकिन इसके बावजूद वेब सीरीज ‘मोदी : जर्नी ऑफ अ कॉमन मैन’ के दो गाने ‘गाना’ नामके सबसे मशहूर म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म पर उपलब्ध हैं. पीएम नरेंद्र मोदी के गाने भी ‘गाना.कॉम’ और एमजॉन के प्राइम म्यूजिक पर खुलेआम सुने जा सकते हैं.

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चुनाव आयोग ने दस अप्रैल के अपने वक्तव्य में सख्ती से कहा था कि चुनाव में भाग ले रहे नेताओं से जुड़े कोई भी पोस्टर या पब्लिसिटी मटीरियल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में नजर नहीं आने चाहिए. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुणगान करने वाले ये गाने उस तरह के ‘पब्लिसिटी मटीरियल’ में नहीं आते जिनसे चुनावों के दरमियान हिंदुस्तानी जनता प्रभावित हो सकती है.

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