नरेंद्र मोदी

विचार-रिपोर्ट | राजनीति

पांच मौके जब चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति नरम रुख अपनाता लगा

योगी आदित्यनाथ और मायावती के मामले में सख्त रुख अपनाने वाला चुनाव आयोग नरेंद्र मोदी के मामले में ऐसा करता नहीं दिखता है

ब्यूरो | 22 अप्रैल 2019 | फोटो: नरेंद्रमोदी.इन

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09 अप्रैल को महाराष्ट्र के लातूर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैली के दौरान पहली बार मतदान करने जा रहे युवाओं को भी संबोधित किया था. उन्होंने युवाओं को अपना पहला वोट बालाकोट में एयरस्ट्राइक करने वाले सैनिकों और पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को समर्पित करने की बात कही थी. नरेंद्र मोदी का यह बयान मतदान के पहले चरण के ठीक दो दिन पहले आया था. इससे ठीक एक महीने पहले 09 मार्च, 2019 को चुनाव आयोग ने पॉलिटिकल पार्टियों को सेना का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं करने के लिए लिखित चेतावनी दी थी. इस चेतावनी को नकारने वाले प्रधानमंत्री के इस बयान की आलोचना मीडिया में तो खूब हुई लेकिन चुनाव आयोग ने इस पर अब तक कुछ नहीं किया.

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01 अप्रैल को गुजरात के वर्धा में चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर हिंदुओं का अपमान करने का आरोप लगाया था. उनका कहना था कि कांग्रेस को ‘हिंदू आतंकवाद’ जैसा शब्द ईजाद करने के लिए माफ नहीं किया जाना चाहिए. नरेंद्र मोदी का यह बयान आचार संहिता के साथ-साथ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुच्छेद-123 का भी उल्लंघन है. अनुच्छेद-123 के मुताबिक कोई भी प्रत्याशी या प्रचारक धर्म, जाति, नस्ल या भाषा के नाम पर वोट नहीं मांग सकता है. नरेंद्र मोदी के इस बयान पर भी चुनाव आयोग की तरफ से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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लोकसभा चुनाव के लिए मतदान का पहला चरण 11 अप्रैल को संपन्न हुआ था. इसमें आंध्र प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, बिहार, ओडिशा आदि की कुल 91 सीटों पर चुनाव हुआ था. इस चरण में 48 घंटे के साइलेंस पीरियड के दौरान भी नमो टीवी ने प्रधानमंत्री के भाषणों का लगातार प्रसारण किया था. नमो टीवी के बारे में अब भाजपा यह मान चुकी है कि यह नमो एक का ही एक फीचर है यानी यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे-सीधे जुड़ा हुआ है. इस लिहाज से नमो टीवी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों का प्रसारण जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुच्छेद-126 का उल्लंघन था. यह मतदान के दौरान इसे प्रभावित करने वाले किसी भी तरह की सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाता है.

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लोकसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण का मतदान 18 अप्रैल को हुआ. इस चरण के सायलेंस पीरियड के दौरान भी नमो टीवी प्रधानमंत्री के भाषणों का लगातार प्रसारण कर आचार संहिता का उल्लंघन करता रहा. यहां बताने वाली एक बात यह भी है कि कुछ समय पहले एक साक्षात्कार के दौरान नरेंद्र मोदी ने नमो टीवी के साथ अपना कोई भी जुड़ाव होने से साफ इनकार किया था. कुछ समय पहले चुनाव आयोग ने नमो टीवी पर तो रोक लगा दी लेकिन उसने इस मामले में जो हो चुका है उस पर अभी तक उसने कोई कार्रवाई नहीं की है.

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स्क्रोल.इन की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दिनों नीति आयोग ने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से अपने-अपने लोकसभा क्षेत्रों से जुड़ी जानकारियां पीएमओ को भेजने के लिए कहा था. बताया जाता है कि वर्धा, गोंदिया और लातूर में प्रधानमंत्री की चुनावी रैली से पहले ये जानकारियां मंगवाई गई थीं. चुनावी गतिविधि के लिए किसी सरकारी मशीनरी या कर्मचारियों का इस्तेमाल किया जाना भी आचार संहिता का उल्लंघन होता है. लेकिन चुनाव आयोग ने इस मामले का अभी तक शायद संज्ञान भी नहीं लिया है.

हिंदुस्तान टाइम्स के इस आलेख पर आधारित.

  • अमित शाह, भाजपा

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