अरुण जेटली

विचार-रिपोर्ट | राजनीति

मोदी सरकार स्वच्छ भारत सेस खत्म कर चुकी है पर इसकी वसूली अब भी क्यों जारी है?

बीते साल आए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के चलते वित्त मंत्रालय ने कई सेस खत्म कर दिए थे. स्वच्छ भारत सेस भी इनमें से एक था

ब्यूरो | 19 दिसंबर 2018 | फोटो: पीआईबी

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स्वच्छ भारत सेस खत्म किए जाने के बाद भी केंद्र सरकार ने इसके तहत जनता से करोड़ों रुपये के टैक्स की वसूली की है. यह जानकारी सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत दायर किए गए एक आवेदन के जवाब में सामने आई है.

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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के चलते वित्त मंत्रालय ने कई सेस खत्म कर दिए थे. स्वच्छ भारत सेस भी इनमें से एक था. वित्त मंत्रालय द्वारा सात जून 2017 को जारी एक बयान में कहा गया था कि जीएसटी को लागू करने के लिए एक जुलाई, 2017 से स्वच्छ भारत सेस सहित कई सेस खत्म कर दिए जाएंगे. वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने भी छह मार्च 2018 को राज्यसभा में यह बात कही थी.

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लेकिन जुलाई 2017 के बाद भी लोगों से स्वच्छ भारत सेस वसूला जा रहा है. आरटीआई से मिली जानकारी से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 4242.07 करोड़ रुपये और 2018-19 के दौरान 149.40 करोड़ रुपये स्वच्छ भारत सेस के रूप में वसूले गए हैं.

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स्वच्छ भारत सेस 2015 से शुरू किया गया था. इसमें सेवा कर पर 0.5 फीसदी का सेस वसूलने का प्रावधान था. वित्त अधिनियम 2015 की धारा 119 के तहत इस सेस को स्वच्छ भारत अभियान की फंडिंग और इसे बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किया गया था.

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आरटीआई आवेदन में सरकार ने यह जानकारी नहीं दी है कि स्वच्छ भारत सेस के तहत जमा पैसे को किस काम के लिए खर्च किया गया है. पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने सिर्फ यह बताया है कि इस सेस के तहत कुल 20,600 करोड़ रुपये की राशि इकट्ठा की गई है. उसके मुताबिक इसमें से अब तक उसे 16,300 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं. यानी अभी भी 4,300 करोड़ रुपये की रकम जारी होनी बाकी है.

(द वायर की रिपोर्ट पर आधारित)

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