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विचार-रिपोर्ट | अर्थव्यवस्था

पैसे वाले भारतीय इतनी बड़ी संख्या में देश छोड़कर क्यों जा रहे हैं?

दूसरे देशों में निवेश के बदले वहां की नागरिकता चाहने वालों में भारतीय करोड़पति दुनिया में सबसे आगे हैं

ब्यूरो | 27 अप्रैल 2021 | फोटो: फ्लिकर

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2018 में आई चर्चित वित्तीय संस्था मॉर्गन स्टैनली की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 2014 से करीब 23 हजार करोड़पति भारत छोड़ चुके हैं. हाल की बात करें तो ग्लोबल वेल्थ माइग्रेशन रिव्यू नाम की एक रिपोर्ट बता रही है कि अकेले 2020 में ही लगभग पांच हजार करोड़पति भारत छोड़कर चले गए. यह संख्या भारत के कुल ‘हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स’ की दो फीसदी है. ‘हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स’ ऐसे धनी लोगों को कहा जाता है जिनके पास पांच करोड़ रु से ज्यादा की निवेश करने योग्य सरप्लस रकम हो. नागरिकता के मामले में परामर्श देने वाली लंदन स्थित चर्चित संस्था एच एंड पी द्वारा तैयार एक सूची बताती है कि निवेश के बदले दूसरे देशों की नागरिकता चाहने वालों में ऐसे भारतीय पहले नंबर पर हैं.

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बताया जा रहा है कि इन भारतीयों के देश छोड़ने की एक बड़ी वजह टैक्स अधिकारियों द्वारा उन्हें परेशान किया जाना है. दिल्ली में अपना जमा-जमाया कारोबार होने के बावजूद 2015 में दुबई जा बसने वाले राहुल (बदला हुआ नाम) बीबीसी से बातचीत में कहते हैं,‘अब मुझे इसकी ज्यादा चिंता नहीं रहती कि कभी भी टैक्स वसूली का कोई नोटिस आ जाएगा.’ राहुल के मुताबिक टैक्स अधिकारी उन्हें बहुत परेशान करते थे और उनके भारत छोड़ने की एक प्रमुख वजह यह भी रही. दुबई बसने के साथ-साथ राहुल ने निवेश के जरिये एक कैरेबियाई देश की नागरिकता भी ले ली है. उनका कहना है कि विदेशी पासपोर्ट होने की वजह से अब लाल-फीताशाही के चलते उन्हें होने वाली परेशानियां बहुत कम हो गई हैं.

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एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते कुछ साल के दौरान भारत के टैक्स विभाग द्वारा मारे जाने वाले छापों की संख्या में तीन गुनी से भी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. सरकार के मुताबिक यह इसलिए किया जा रहा है कि काला धन खत्म हो और ज्यादा से ज्यादा लोग टैक्स दें. लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह अति सक्रियता एक बड़ी हद तक राजस्व संग्रह के लक्ष्य हासिल करने के लिए नौकरशाहों पर बनाए जा रहे दबाव का नतीजा है. विपक्ष इसे टैक्स आतंकवाद कहता है और आरोप लगाता है कि इसने कारोबार जगत को तबाह कर दिया है. उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दावा है कि टैक्स आतंकवाद पहले हुआ करता था और उनकी सरकार इस मामले में पारदर्शिता लेकर आई है.

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हालांकि टैक्स अधिकारियों का डर राहुल के भारत छोड़ने की अकेली वजह नहीं है. उनके मुताबिक वे देश में ‘बांटो और राज करो’ की राजनीति के बढ़ते चलन से भी चिंतित थे. राहुल की मानें तो वे नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे एक ऐसे समाज में रहें जहां तेजी से ध्रुवीकरण हो रहा हो. उनका दावा है कि उनके कई दोस्त भी भारत की नागरिकता या फिर यहां का ‘रेजिडेंट स्टेटस’ छोड़ रहे हैं. अमीर भारतीयों के देश छोड़ने के इस चलन को कोविड-19 तेज कर रहा है. एच एंड पी की मानें तो उसके पास भारत से इतनी डिमांड आ रही है कि बीते साल लॉकडाउन के दौरान ही उसने यहां अपना एक दफ्तर खोल लिया. कंपनी के शीर्ष अधिकारियों में से एक डॉमिनिट वोलेक के मुताबिक इन भारतीयों को लगता है कि कोरोना महामारी ने जो अनिश्चितताएं पैदा की हैं उनसे पर्याप्त सुरक्षा भारत में नहीं मिल सकती.

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विशेषज्ञों के मुताबिक भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह चलन अच्छा नहीं है क्योंकि ऐसे कारोबारियों के साथ देश की उद्यमशीलता का एक हिस्सा भी बाहर चला जाता है. इसके अलावा उनका जाना दुनिया में भारत के कारोबारी माहौल के बारे में भी अच्छा संदेश नहीं भेजता. जैसा कि बिजनेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए जोहानसबर्ग स्थित एक वित्तीय परामर्शदाता संस्था न्यू वर्ल्ड वेल्थ से जुड़े एंड्र्यू एमॉलिस कहते हैं, ‘यह संकेत हो सकता है कि आने वाले दिन अच्छे नहीं हैं.’ उनके मुताबिक अमीर लोग अक्सर सबसे पहले भागने वालों में से होते हैं क्योंकि उनके पास ऐसा करने के लिए जरूरी साधन होते हैं.

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