डिएगो माराडोना

विचार-रिपोर्ट | खेल

डिएगो माराडोना को लियोनल मेसी से ज्यादा महान क्यों माना जाता है?

आंकड़ों में तुलना करने पर लियोनल मेसी का पलड़ा भारी दिखता है लेकिन कई वजहों से महानता की बहस डिएगो माराडोना के पक्ष में ही खत्म होती है

अभय शर्मा | 26 नवंबर 2020 | डिएगो माराडोना / विकिमीडिया कॉमन्स

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अर्जेंटीना के लियोनल मेसी पिछले डेढ़ दशक से फुटबॉल की दुनिया पर छाए हुए हैं. अपने क्लब बार्सिलोना को उन्होंने कई खिताब दिलवाए हैं. उनके व्यक्तिगत कौशल का लोहा सभी मानते हैं. लेकिन, जब बात उन्हें महानतम खिलाड़ी मानने की होती है तो उनके सबसे बड़े समर्थक भी थोड़ा ठहर जाते हैं. तब वे उनकी तुलना उनके हमवतन और पूर्व खिलाड़ी डिएगो माराडोना से करने लगते हैं. यहां से फुटबॉल की दुनिया की एक बड़ी बहस शुरू हो जाती है – डिएगो माराडोना ज्यादा महान हैं या लियोनल मेसी. इन दोनों की तुलना कई पैमानों पर की जाती जिनमें कहीं मेसी तो कहीं माराडोना भारी दिखाई देते हैं. लेकिन अक्सर यह बहस खत्म माराडोना के पक्ष में ही होती है.

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फोटो: अंजलि मिश्रा

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आंकड़ों में डिएगो माराडोना और लियोनल मेसी की तुलना करने पर मेसी का पलड़ा भारी दिखता है. मेसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 142 मैचों में 71 गोल किए हैं जबकि माराडोना ने 91 मैचों में सिर्फ 34 गोल किए. क्लब स्तर पर तो मेसी के सामने माराडोना कहीं नहीं टिकते, मेसी जहां अपने क्लब बार्सिलोना के लिए 742 मैचों में 640 गोल कर चुके हैं वहीं माराडोना ने 588 मैचों में सिर्फ 312 गोल ही किए थे. मेसी ने बार्सिलोना की ओर से चार यूरोपीय कप जीते जबकि माराडोना एक भी नहीं जीत पाए. मेसी को छह बार दुनिया का श्रेष्ठ फुटबॉलर घोषित किया जा चुका है जबकि माराडोना केवल एक बार यह सम्मान हासिल कर पाए थे.

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कुछ जानकार डिएगो माराडोना के पक्ष में यह तर्क देते हैं कि लियोनल मेसी जब 13 साल के थे, तब उनका शारीरिक विकास रुक गया था. इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें कई सालों तक ‘ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन’ लेने की सलाह दी थी. मेसी अब भी इस हॉर्मोन का इस्तेमाल करते हैं. यह उनके लिए जरूरी है. लेकिन इसका एक फायदा यह भी है कि इससे खिलाड़ी की फिटनेस बहुत अच्छी हो जाती है. कोई खिलाड़ी घुटने की गंभीर चोटों से जल्द उबर सकता है और एक सीजन में पूरे जोश के साथ 70 मैच खेल सकता है. 1990 के दशक तक ऐसी चोटें खिलाड़ी का करिअर खत्म कर देती थीं. माराडोना इस हार्मोन के बिना ही खेले थे इसलिए कई जानकार उनको महानतम साबित करने के लिए इस तथ्य का हवाला देते हैं.

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अधिकांश जानकार मानते हैं कि अपनी विलक्षण क्षमता और संतुलन के मामले में मेसी कई तरह से माराडोना से मिलते-जुलते हैं. उन्होंने कई गोल हूबहू माराडोना वाले जादुई अंदाज में ही किए हैं, लेकिन उनके इन गोलों ने अर्जेंटीना को कभी विश्व कप विजेता नहीं बनाया. मेसी ने 2014 में अर्जेंटीना को फीफा विश्व कप फाइनल में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी. फाइनल तक के सफर में उन्होंने चार मैन ऑफ द मैच पुरस्कार हासिल किए. यहां तक कि उन्हें गोल्डन बॉल का अवार्ड भी मिला, लेकिन माराडोना की तरह वे अपनी टीम को विश्व कप ट्रॉफी नहीं दिला पाए. माराडोना के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपने दम पर ही अर्जेंटीना को 1986 में मेक्सिको में हुआ विश्व कप जितवाया था. इसी टूर्नामेंट में उन्होंने वे दो गोल किए थे जिनकी गिनती सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ गोलों में होती है. क्वार्टरफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ किए गए इन गोलों को दुनिया ‘हैंड ऑफ गॉड’ और ‘द गोल ऑफ द सेंचुरी’ के नाम से जानती है.

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अर्जेंटीना के लिए लियोनल मेसी ने अब तक 71 गोल किए हैं, इनकी बदौलत फुटबॉल के दीवाने इस दक्षिण अमेरिकी देश ने 2008 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक के साथ-साथ कई अन्य खिताब भी जीते. लेकिन माना जाता है कि जब तक मेसी अर्जेंटीना को कोई विश्व खिताब नहीं दिलाते, तब तक महानता का उनका सफर पूरा नहीं हो सकता. एक साक्षात्कार में खेल पत्रकार अलेक्जेंडर नेथर्टन कहते हैं, ‘2014 विश्व कप मेसी के लिए एक बहुत बड़ा मौका था, अगर वे यह विश्व कप दिला देते तो सारे गिले-शिकवे शर्तिया दूर हो जाते और वे अर्जेंटीना के फुटबॉल प्रेमियों के लिए माराडोना से बड़े हीरो बन जाते.’

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