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विचार-रिपोर्ट | अर्थव्यवस्था

‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ से भारत में क्या बड़ा बदलाव आने वाला है?

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) स्वतंत्र भारत में रेलवे से जुड़ी सबसे बड़ी परियोजना है

ब्यूरो | 02 जनवरी 2021 | फोटो: पिक्साबे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में पूरी तरह से माल ढुलाई के लिए बने रेल गलियारे यानी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के एक हिस्से का उद्घाटन किया. 351 किलोमीटर लंबा यह हिस्सा उत्तर प्रदेश के खुर्जा से भाऊपुर को जोड़ता है. इस रूट पर 10 स्टेशन बनाए गए हैं. कहा जा रहा है कि इससे फिरोजाबाद के कांच, खुर्जा के पॉटरी और अलीगढ़ के ताला-हार्डवेयर उद्योग को काफी फायदा होगा. खुर्जा-भाऊपुर लाइन का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री ने भी कहा कि इस कॉरिडोर से उद्योगों के लिए माहौल बेहतर होगा.

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2843 किलोमीटर लंबे डीएफसी को स्वतंत्र भारत में रेलवे से जुड़ी सबसे बड़ी परियोजना बताया जा रहा है. इसकी शुरुआत 2006 में हुई थी. डीएफसी की दो शाखाएं हैं. बीते दिनों प्रधानमंत्री ने जिस हिस्से का उद्घाटन किया वह 1839 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न डीएफसी का हिस्सा है. ईस्टर्न डीएफसी पंजाब के साहनेवाल से शुरू होकर पश्चिम बंगाल के डानकुनी में खत्म होगा. डीएफसी की दूसरी शाखा करीब डेढ़ हजार किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डीएफसी है जो उत्तर प्रदेश के दादरी से शुरू होकर मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक जाएगा. डीएफसी पूरी तरह से नया नेटवर्क है इसलिए इसके ज्यादातर स्टेशनों के नाम से पहले न्यू लगाया गया है जैसे न्यू खुर्जा, न्यू भाऊपुर आदि.

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डीएफसी के पूरा होने पर भारतीय रेलवे के नेटवर्क पर दौड़ने वाली करीब 70 फीसदी मालगाड़ियों को इस नए कॉरिडोर पर शिफ्ट कर दिया जाएगा. इससे यात्री गाड़ियों की संख्या में बढ़ोतरी का रास्ता साफ होगा. उदाहरण के लिए डीएफसी का खुर्जा से भाऊपुर वाला हिस्सा शुरू हो जाने से दिल्ली से कानपुर वाली रेलवे की मेन लाइन पर बोझ घटेगा जो अभी क्षमता से 150 फीसदी ज्यादा है. रोज करीब 50 यात्री ट्रेनें और 60 मालगाड़ियां इससे होकर गुजरती हैं. बोझ घटने से इस लाइन पर न सिर्फ ज्यादा यात्री ट्रेनें चलाई जा सकेंगी बल्कि उनका समय पर आना-जाना भी बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सकेगा. डीएफसी से आर्थिक विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे क्योंकि इसके इर्द-गिर्द नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और लॉजिस्टिक पार्क भी बनने वाले हैं.

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अभी मालगाड़ियों की औसत गति 20 किलोमीटर प्रति घंटा है जो काफी कम है. यह इसलिए है कि अक्सर ही यात्री गाड़ियों को पास देने के लिए मालगाड़ियों को लूप लाइन में खड़ा होना होता है. डीएफसी में ऐसा नहीं होगा क्योंकि इस पर सिर्फ मालगाड़ियां चलेंगी जिनकी औसत रफ्तार का आंकड़ा 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकता है. इस वजह से डीएफसी से माल ढुलाई सड़कों की तुलना में सस्ती और तेज होगी. इसके अलावा नये नेटवर्क की पटरियों की भार वहन क्षमता भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क की ज्यादातर पटरियों से ज्यादा है. बताया जा रहा है कि इस पर चलने वाली ट्रेनों में कंटेनरों की संख्या 400 तक ले हो सकती है.

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डीएफसी पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अच्छी खबर है. कहा जा रहा है कि इसके पूरा हो जाने के बाद रेलवे के जरिये माल ढुलाई बढ़ेगी. इससे सड़क मार्गों पर दबाव कम होगा जिससे ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में काफी कमी आएगी. एक अनुमान के मुताबिक डीएफसी पर चलने वाली एक मालगाड़ी सड़क से 1300 ट्रकों का लोड कम कर सकती है. एर्न्स्ट एंड यंग के एक अनुमान के मुताबिक डीएफसी के चलते अगले 30 साल के दौरान भारत से होने वाले कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में 45 करोड़ टन की कमी आने की संभावना है.

  • पोल्ट्री

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