क्रिकेट विश्व कप ट्रॉफी

विचार-रिपोर्ट | खेल

क्यों इस बार का क्रिकेट विश्व कप अपने फॉर्मेट के चलते भी रोमांचक होने वाला है

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) छह विश्व कप टूर्नामेंट्स के बाद इस फॉर्मेट को वापस लेकर आई है

ब्यूरो | 29 मई 2019 | फोटो : फोटो : आईसीसी क्रिकेट विश्व कप

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30 मई से शुरू हो रहे क्रिकेट विश्व कप 2019 की तैयारियां पूरी हो गई हैं और इसमें भाग लेने वाली सभी टीमें इंग्लैंड पहुंच चुकी हैं. इस विश्व कप में टीमों की जीत और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को लेकर भविष्यवाणियां भी की जाने लगी हैं. लेकिन, विश्व कप में इस बार जो चीज सबसे ध्यान खींच रही है, वो है इसका फॉर्मेट जो पिछले छह विश्व कप टूर्नामेंट्स से अलग है. इस बार सभी 10 टीमों को एक ही ग्रुप में रखा गया है और सभी टीमों को सेमीफाइनल में पहुंचने से पहले एक-दूसरे से भिड़ना होगा.

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जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने इस विश्व कप के फॉर्मेट की घोषणा की थी तो ज्यादातर जानकारों ने इसे लेकर ख़ुशी जताई थी. इन लोगों का मानना था कि विश्व कप का यह फॉर्मेट सभी टीमों को ज्यादा मौका देता है और हर एक टीम के पास आखिर तक वापसी करने का मौका बना रहता है.

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1992 का क्रिकेट विश्व कप टूर्नामेंट भी इसी फॉर्मेट के तहत खेला गया था. यह फॉर्मेट कैसे हर टीम को अंत तक मौका देता है इसका बड़ा उदाहरण 1992 में विश्व कप का विजेता बनी पाकिस्तानी टीम है. उसने इस विश्व कप के अपने शुरुआती पांच में से केवल एक मैच ही जीता था. इसके बाद किसी को भी उसके सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद नहीं थी.

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लेकिन, लीग स्टेज के आखिरी तीनों मैच जीतकर उसने सेमीफाइनल में अपनी जगह बना ली थी. इसके बाद सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड और फाइनल में इंग्लैंड को हराकर पाकिस्तान ने विश्व कप अपने नाम कर लिया. खेल विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर 1992 का विश्व कप दो ग्रुप वाले फॉर्मेट पर आधारित होता तो पाकिस्तान पहले दौर में ही विश्व कप से बाहर हो जाता.

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विश्व कप के एक ग्रुप वाले फॉर्मेट में टीमों पर टूर्नामेंट के अंत तक लगातार बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव होता है. साथ ही इसमें टीमों को आईपीएल की तरह नेट रन रेट का भी ध्यान रखना होता है. क्योंकि लीग राउंड में टीमों के पॉइंट्स बराबर होने की स्थिति में नेट रन रेट से ही उनके सेमीफाइनल में पहुंचने का फैसला किया जाता है. इन्हीं वजहों से भारतीय कप्तान विराट कोहली का कहना है कि यह उनके जीवन का सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण विश्वकप साबित होने वाला है.

  • ममता बनर्जी

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