कोरोना वायरस

विचार-रिपोर्ट | स्वास्थ्य

ट्रिपल म्यूटेशन वाला कोरोना वायरस अपने पिछले स्वरूपों से कितना ज्यादा खतरनाक है?

कोरोना वायरस का यह नया वेरिएंट - बी.1.618 - इसके तीन पुराने स्वरूपों के मेल से बना है और इसे बंगाल स्ट्रेन भी कहा जा रहा है

ब्यूरो | 22 अप्रैल 2021 | फोटो: पिक्साबे

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कोरोना वायरस के मामलों और इससे होने वाली मौतों का अब हर दिन ही नया रिकॉर्ड बन रहा है. इसके बीच वायरस के एक नए स्वरूप यानी वेरिएंट ने भी वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. बी.1.618 नाम के इस वेरिएंट में तीन म्यूटेशन (बदलाव) देखे गए हैं. बताया जा रहा है कि इस वेरिएंट में कोरोना वायरस के तीन अलग-अलग स्वरूपों का मेल है. म्यूटेशन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसके तहत वायरस वक्त के साथ अपनी संरचना में इस तरह के बदलाव करता है जिससे उसकी जीवित रहने और तादाद में बढ़ोतरी की क्षमता बढ़ जाए.

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बताया जा रहा है कि बी.1.618 भारत में ही विकसित हुआ है. जानकारों के मुताबिक महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे ज्यादा संक्रमण वाले राज्यों की इसमें बड़ी भूमिका हो सकती है. दुनिया भर में ट्रिपल म्यूटेंट से संक्रमण के जो मामले देखने को मिल रहे हैं उनमें 62 फीसदी से ज्यादा भारत में ही हैं. भारत में भी पश्चिम बंगाल में इसके मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं इसलिए कुछ वैज्ञानिक इसे बंगाल स्ट्रेन भी कहने लगे हैं. उधर, अपने यहां इस नए वेरिएंट के 100 से भी ज्यादा मामले मिलने के बाद ब्रिटेन ने भारत से आने वाली फ्लाइट्स पर प्रतिबंध लगा दिया है.

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वैज्ञानिकों के मुताबिक कोरोना वायरस के इस नए वेरिएंट में और भी तेजी से फैलने की क्षमता है. एनडीटीवी से बातचीत में कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और महामारी विशेषज्ञ मधुकर पई कहते हैं, ‘ये लोगों की एक बड़ी तादाद को बहुत जल्दी बीमार बना रहा है.’ उनके मुताबिक बी.1.618 के डीएनए से जुड़ी सारी जानकारी जल्द से जल्द जुटाने (जीनोम सीक्वेसिंग) की जरूरत है ताकि अगर महामारी के प्रबंधन में किसी बदलाव की जरूरत हो तो वह समय रहते किया जा सके. डॉ पई के मुताबिक कोरोना वायरस के डबल म्यूटेशन वाले वेरिएंट, जिसे आधिकारिक तौर पर बी.1.617 कहा जा रहा है, के मामले में ऐसा नहीं हो पाया था और यह भी एक वजह हो सकती है कि भारत में हालात इस समय इस कदर खराब हैं.

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कोरोना वायरस का यह नया वेरिएंट इस लिहाज से भी खतरनाक है कि यह पहले संक्रमित हुए लोगों के शरीर में इससे लड़ने के लिए बनी एंटीबॉडीज को भी चकमा दे सकता है. वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद से संबद्ध और नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ जेनॉमिक एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी में शोधकर्ता विनोद सकारिया ने एक ट्वीट के जरिये इससे जुड़ी कुछ जानकारियां साझा की हैं. उनके मुताबिक इस वायरस ने अपने जीन्स में एक ऐसा बदलाव किया है जिससे यह प्लाज्मा थेरेपी को भी बेकार की कवायद बना सकता है. इस थेरेपी में कोरोना वायरस के संक्रमण से उबर चुके लोगों के खून से मिले प्लाज्मा के जरिए दूसरे मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाती है.

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सवाल यह भी है कि क्या ट्रिपल म्यूटेशन वाला यह कोरोना वायरस फिलहाल इससे बचाव के लिए इस्तेमाल हो रहीं वैक्सीनों को भी चकमा दे सकता है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ऐसा हो सकता है क्योंकि जिन तीन वेरिएंट्स का यह मेल है उनमें से दो में वायरस के खिलाफ शरीर में बनने वालीं एंटीबॉडीज से बच जाने की क्षमता देखी गई है. हालांकि कइयों का मानना है कि वैक्सीनों की क्षमता पर इस नए वायरस का क्या असर पड़ेगा, इस बारे में किसी पक्के निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए अभी और डेटा का इंतजार करने की जरूरत है. वैसे इस पर सभी एकराय हैं कि इस दिशा में चौकस रहने की जरूरत तो है ही.

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