कोरोना वायरस वैक्सीन

विचार-रिपोर्ट | कोविड-19

क्या कोरोना वायरस से उबर चुके लोगों को भी वैक्सीन की दो खुराकें ही देने की जरूरत है?

कुछ गंभीर अध्ययन बताते हैं कि कोविड-19 से उबर चुके लोगों की वैक्सीन की जरूरत उनसे अलग है जो अभी तक कोरोना वायरस से बचे हुए हैं

ब्यूरो | 19 अप्रैल 2021 | फोटो: पिक्साबे

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दिसंबर 2020. कोरोना वायरस से सुरक्षा देने के लिए विकसित वैक्सीनों का इस्तेमाल शुरू होने लगा था. इसी दौरान अमेरिका के लॉस एंजेलस शहर में स्थित सीडर्स-सिनाई मेडिकल सेंटर के 1000 से भी ज्यादा कर्मचारी स्वेच्छा से एक अध्ययन में शामिल हुए. यह एक महत्वपूर्ण अध्ययन था जिसका मकसद यह पता लगाना था कि क्या अलग-अलग लोगों का रोग प्रतिरोधक तंत्र यानी इम्यून सिस्टम वैक्सीन के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रिया देता है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में इस अध्ययन से जुड़ी जानकारियां साफ हुई हैं और ये चौंकाने वाली हैं.  

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डॉ. सुजैन चेंग, जिनकी अगुवाई में यह अध्ययन हुआ था, के मुताबिक कोविड-19 से उबर चुके जिन लोगों को वैक्सीन लगाई गई थी, उनमें इसके पहले डोज ने ही ऐसा असर दिखाया जैसा वायरस से कभी संक्रमित न हुए लोगों में वैक्सीन के दो डोज लेने के बाद दिखा. इसका मतलब साफ है कि अगर आपको कोविड हो चुका है तो भी आपको वैक्सीन लेने की तो जरूरत है लेकिन तब आपके लिए उसका एक डोज ही काफी हो सकता है. उधर, इटली में हुआ एक शोध तो यह तक कहता है कि अगर किसी को कोरोना वायरस का संक्रमण हो चुका है तो उसे वैक्सीन का एक ही डोज उससे भी ज्यादा सुरक्षा दे सकता है जितनी सामान्य मरीजों को दो डोज के बाद मिलती है. यह शोध प्रतिष्ठित न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है.

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कोविड-19 से उबर चुके लोगों को वैक्सीन का एक ही डोज देने पर बीते कुछ समय से दुनिया भर में काफी चर्चा हो रही है. इसकी एक वजह तो यह है कि जॉनसन एंड जॉनसन और एस्ट्रा जेनेका द्वारा विकसित की गई वैक्सीनों को लेकर सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े हो रहे हैं. दूसरी और ज्यादा अहम बात यह है कि वैक्सीन की मांग अभी उत्पादन से काफी ज्यादा है जिसकी वजह से कई देशों में इसकी कमी हो गई है. अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड में इम्यूनॉलॉजिस्ट मोहम्मद सज्जादी और उनके सहयोगियों का आकलन है कि अगर संक्रमित हो चुके लोगों को वैक्सीन का सिर्फ एक शॉट दिया जाए तो 11 करोड़ डोज बच सकते हैं जो जरूरतमंदों की एक बड़ी तादाद के काम आएंगे.

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मोहम्मद सज्जादी ने भी इस बारे में अध्ययन किया है. उनके मुताबिक कोविड-19 से उबर चुके लोगों का इम्यून सिस्टम कोरोना वायरस को याद रखता है, इसलिए उनके लिए पहला डोज ही बूस्टर डोज का काम कर देता है. उनके मुताबिक इस सिलसिले में हुए तमाम अध्ययन यह बात कह रहे हैं. इजराइल स्थित नेशनल सेंटर फॉर इंफ्लूएंजा एंड रेसपिरेटरी वायरसेज के मुखिया माइकल मेंडेलबॉएम के मुताबिक उनके अध्ययन में भी यही बात सामने आई है कि कोविड-19 से उबर चुके लोगों के लिए वैक्सीन का एक ही डोज पर्याप्त है. इजराइल कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है जहां 57 फीसदी आबादी का टीकाकरण हो चुका है.

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इजराइल ने शुरुआत में तो यह फैसला किया था कि कोरोना वायरस से उबर चुके लोगों को वैक्सीनेशन की जरूरत नहीं है. लेकिन बीते फरवरी से वह ऐसे लोगों को वैक्सीन का एक डोज लगा रहा है. फरवरी से ही यूरोप के कई देशों ने भी यह नीति अपना ली है. इनमें फ्रांस, स्पेन, इटली और जर्मनी शामिल हैं जो कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में आते हैं. अमेरिका में ऐसे लोगों को अभी दो डोज ही दिए जा रहे हैं, लेकिन नए अध्ययनों के मद्देनजर इन्हें घटाने की मांग भी होने लगी है. हालांकि वहां कई विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ऐसा करने के लिए मौजूदा साक्ष्य काफी नहीं हैं और पर्याप्त डेटा आने तक इंतजार करना चाहिए.

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