बच्चों की कोविड वैक्सीन

विचार-रिपोर्ट | कोविड-19

बच्चों की कोविड वैक्सीन से जुड़ी वे जरूरी बातें जिन्हें इस वक्त सभी माता-पिता जानना चाहते हैं

कहा जा रहा है कि कोविड-19 की तीसरी लहर बच्चों के लिए विशेष रूप से घातक हो सकती है

ब्यूरो | 24 मई 2021 | फोटो: पिक्साबे

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बच्चों के लिए किस वैक्सीन को मंजूरी मिली है?

अमेरिकी नियामक फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने अभी तक फाइजर-बायोएनटेक की कोविड वैक्सीन को ही बच्चों के लिए हरी झंडी दी है. यह मंजूरी 12 से 17 साल के बच्चों में इस्तेमाल के लिए मिली है. फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन दुनिया की पहली ऐसी कोविड वैक्सीन है जिसे बच्चों को लगाया जा सकता है. अगले कुछ महीनों में इस वैक्सीन के भारत में भी आने की उम्मीद जतायी जा रही है. फाइज़र के अलावा जल्द ही मॉडेर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीनों को भी बच्चों के लिए आपात आधार पर स्वीकृति दी जा सकती है. जानकारों के मुताबिक इस साल के आखिर या अगले साल की शुरुआत तक 12 साल से कम उम्र वाले बच्चों के लिए भी कोविड-19 की वैक्सीनों के दरवाजे खुल सकते हैं. मॉडेर्ना की वैक्सीन के बारे में तो यह भी कहा जा रहा है कि यह छह महीने तक के बच्चों को भी दी जा सकती है. फिलहाल इन सभी वैक्सीनों के परीक्षण चल रहे हैं.

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यह वैक्सीन कैसे काम करती है?

फाइजर-बायोएनटेक की कोविड वैक्सीन एक एमआरएनए वैक्सीन है. अब तक प्रचलित वैक्सीनों से यह इस मायने में अलग है कि इसमें कोरोना वायरस के जेनेटिक मटीरियल (आनुवंशिक सामग्री) का एक खास हिस्सा होता है. इसे मैसेंजर आरएनए या एमआरएनए कहते हैं. शरीर में दाखिल होने पर यह एमआरएनए हमारी ही कोशिकाओं को वायरस वाला वह प्रोटीन बनाने का निर्देश देने लगता है जिसकी मदद से असली कोरोना वायरस हम पर हमला बोलता है. नतीजतन हमारा इम्यून सिस्टम सचेत हो जाता है और एंटीबॉडीज बनाने लगता है. दुनिया में इस तरह की तकनीक से बनी वैक्सीन का इस्तेमाल पहले कभी नहीं किया गया है.

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क्या कोविड और कोई दूसरी वैक्सीन साथ-साथ लगाई जा सकती है?

अमेरिका स्थित सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) का हाल तक कहना था कि बच्चे हों या बड़े, कोविड वैक्सीन लगवाने से पहले या इसके बाद उन्हें कोई दूसरी वैक्सीन लगवानी हो तो कम से कम दो हफ्ते का फर्क रखा जाना चाहिए. हालांकि अब उसका कहना है कि यह फर्क शुरुआती सावधानी के मद्देजनर सुझाया गया था और अब कोविड के साथ-साथ कोई दूसरी वैक्सीन भी लगवाई जा सकती है. संस्था के मुताबिक जो साक्ष्य हैं उनसे पता चलता है कि दो वैक्सीनें साथ लगवाई जाएं या कुछ अंतराल पर, उनके असर और साइड इफेक्ट्स वैसे ही होते हैं. सीडीसी ने हालांकि यह भी कहा है कि अगर एक साथ ही दो या इससे ज्यादा वैक्सीनें लगानी हों तो इंजेक्शन शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दिए जा सकते हैं.

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क्या बच्चों और बड़ों में वैक्सीन के साइट इफेक्ट्स में कोई फर्क है?

बताया जा रहा है कि 12 से 15 साल के बच्चों में वैक्सीन का डोज लेने के बाद बुखार के मामले ज्यादा देखे गए हैं हालांकि बड़े लोगों के मुकाबले यह बढ़ोतरी बहुत ज्यादा नहीं है. एफडीए के मुताबिक परीक्षण के दौरान बच्चों में जो आम साइड इफेक्ट्स देखे जा रहे हैं वे हैं इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, थकान, सिर दर्द, हरारत, मांसपेशियों में दर्द और बुखार. इनकी अवधि एक से तीन दिन की है. विश्लेषकों के मुताबिक बच्चों में शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली ज्यादा ताकतवर तरीके से प्रतिक्रिया देती है और इसलिए संभव है कि एक ही वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स बच्चों में बड़ों से ज्यादा हों. इन लक्षणों से अगर बच्चा परेशान हो तो उसे पैरासिटामोल देने की सलाह दी जा रही है. जहां तक लंबी अवधि में दिखने वाले साइड इफेक्ट्स की बात है तो बताया जा रहा है कि अभी इस संबंध में ज्यादा डेटा तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन वैक्सीन में एमआरएनए तकनीक इस्तेमाल होने के चलते इसकी संभावना बहुत कम है.

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बच्चे को अगर किसी एलर्जी की शिकायत हो तो भी क्या यह वैक्सीन दी जा सकती है?

फाइजर की वैक्सीन उन बच्चों को देने की मनाही है जिनमें इस वैक्सीन के घटकों, जैसे कि पॉलीएथाइलीन ग्लाइकॉल, से एलर्जी का इतिहास रहा हो. हालांकि ऐसा बहुत दुर्लभ होता है. यह वैक्सीन किन-किन चीजों से मिलकर बनी है इसकी जानकारी के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. वैक्सीन में अंडे, प्रेजर्वेटिव्स या फिर लेटेक्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है. अगर बच्चे को किसी तरह की दवाइयों या खाने से एलर्जी है तो वैक्सीन का इंजेक्शन देने के बाद उसे आधे घंटे तक टीकाकरण स्थल पर रखने की सलाह दी जा रही है. सामान्य मामलों में यह आंकड़ा 15 मिनट होता है.

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