अमित शाह

विचार-रिपोर्ट | राजनीति

विधानसभा चुनाव के चश्मे से देखें तो लोकसभा चुनाव में भाजपा को 179 सीटें मिलने वाली हैं

अमेरिका के प्रतिष्ठित शोध संस्थान ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन ने अगले लोकसभा चुनावों का अंदाजा विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों के आधार पर लगाया है

ब्यूरो | 18 दिसंबर 2018 | फोटो: bjp.org

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आम चुनाव के बारे में अंदाजा लगाने का एक सीधा सा तरीका यह है कि हर राज्य में किसी पार्टी को मिली विधानसभा सीटों के अनुपात में उसे मिलने वाली लोकसभा सीटों की गणना की जाए. यानी कि उसे मिली विधानसभा सीटों की संख्या में कुल विधानसभा सीटों से भाग दिया जाए और फिर इस संख्या से उस राज्य की कुल लोकसभा सीटों का गुणा कर दिया जाए. इस तरह से हर राज्य में किसी पार्टी को मिली सीटों को जोड़ने से उसे पूरे देश में मिलने वाली सीटों का अंदाजा लगाया जा सकता है.

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इस तरह की गणना के मुताबिक भाजपा को अगले लोकसभा चुनाव में कुल 103 सीटों का नुकसान हो सकता है और उसके सहयोगी दलों को सात सीटों का. इस तरह से अगले आम चुनाव में भाजपा को मिली कुल सीटों की संख्या होगी 179 और एनडीए को कुल 207 सीटें मिल सकती हैं. यह आंकड़ा लोकसभा में बहुमत से 65 सीटें कम है.

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पूरे देश की विधानसभा सीटों के हिसाब से देखें तो अगले आम चुनाव में कांग्रेस को 2014 के मुकाबले काफी फायदा होने की उम्मीद है. लेकिन इसके बाद भी उसे सिर्फ 107 सीटें ही हासिल होंगी. अगर इसमें उसके वर्तमान सहयोगियों की सीटें भी जोड़ दें तो यूपीए की कुल सीटों की संख्या 163 हो जाती है जो एनडीए के मुकाबले 44 सीटें कम है.

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इस गणना के आधार पर बाकी बची 173 सीटों में से सबसे ज्यादा तृणमूल कांग्रेस, एआईएडीएमके, बीजू जनता दल, तेलुगू देशम पार्टी और तेलंगाना राष्ट्र समिति को मिलने वाली हैं.

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लेकिन यह गणना बिलकुल गलत भी साबित हो सकती है, और इसके कई कारण हैंएक तो भारतीय वोटर राज्य और केंद्र के चुनावों को अलग तरीके से देखते आये हैं. दूसरा, यह कि कुछ राज्यों में चुनाव हुए बहुत वक्त बीत चुका है और पहले से स्थितियां काफी बदल चुकी हैं. तीसरा, चुनाव से पहले और बाद में हुए गठबंधन भी इस गणना को सर के बल खड़ा कर सकते हैं. और चौथा यह कि राज्य के चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों को राष्ट्रीय पार्टियों से ज्यादा फायदा होने की उम्मीद रहती है.

ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन के इस लेख पर आधारित

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