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विचार-रिपोर्ट | विदेश

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव से चीन परेशान क्यों है?

भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव को लेकर चीन लगातार दोनों देशों से इसे कम करने की अपील करता दिखा है

ब्यूरो | 14 मार्च 2019 | फोटो: यूट्यूब

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माना जाता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कमोबेश चीन के लिए फायदे की स्थिति ही होती है. लेकिन, पुलवामा हमले और उसके बाद की घटनाओं पर चीन का जो रुख रहा, वह कइयों के लिए चौंकाने वाला है. चीन इस घटनाक्रम के बाद से ही भारत और पाकिस्तान से तनाव कम करने की अपील करता आ रहा है. साथ ही वह इस पूरे मामले पर तटस्थ दिखने की कोशिश में भी है. उसने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को कम करने के लिए न सिर्फ अपने विदेश उप मंत्री को पाकिस्तान भेजा बल्कि, इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रस्ताव भी दे दिया.

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चीन पाकिस्तान को अपना ‘सदाबहार मित्र’ कहता है. उसके दक्षिण एशिया में सबसे घनिष्ठ आर्थिक, कूटनीतिक और सैन्य संबंध पाकिस्तान से ही हैं. इसके अलावा चीन ने वहां सीपीईसी परियोजना में भी बड़ा निवेश किया है. जाहिर है कि ऐसे में वह ऐसा कोई फैसला नहीं ले सकता जो पाकिस्तान को ठीक न लगता हो.

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लेकिन जानकारों की मानें तो बीते एक साल में बहुत कुछ ऐसा हुआ है जिससे भारत भी चीन के लिए बहुत अहम हो गया है. डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी सामानों पर आयात शुल्क लगाने के बाद से चीन की अर्थव्यवस्था को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है. ट्रंप के फैसले के चलते चीन की आर्थिक विकास दर साल 2018 में केवल 6.6 फीसदी ही रही, जो पिछले 28 वर्षों का सबसे निचला स्तर है.

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इस स्थिति में चीन को भारतीय बाजार से सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं. इसी वजह से बीते साल उसने अचानक डोकलाम विवाद पर मिट्टी डालते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत किया था. इसके बाद से ही भारत और चीन के बीच व्यापार में 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है. जाहिर है कि ऐसी स्थिति में चीन कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहता जिससे भारत नाराज हो जाए.

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चीन की एक दुविधा यह भी है कि भारत ने बालाकोट में जो हवाई कार्रवाई की वो केवल आतंकियों के खिलाफ थी. चीन ने खुद आतंक विरोधी कार्रवाई करते हुए शिनजियांग में लाखों वीगर मुस्लिमों को बंदी बना रखा है. इसका पूरी दुनिया में विरोध हो रहा है लेकिन भारत ने इस मामले में अब तक कुछ नहीं कहा है. इसके अलावा बालाकोट में की गई भारतीय कार्रवाई की पश्चिमी देशों ने भी कोई आलोचना नहीं की है. इस वजह से चीन इस मामले में बिलकुल अलग भी नहीं दिखना चाहता.

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