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विचार-रिपोर्ट | विदेश

चीन मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित क्यों नहीं होने देता?

जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करवाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फिर एक प्रस्ताव लाया गया है

अभय शर्मा | 07 मार्च 2019 | फोटो : यूट्यूब

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पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के खिलाफ एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया गया है. अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव का मकसद मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करवाना है.

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यूएन सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव पहले भी कई बार लाया जा चुका है. लेकिन, सुरक्षा परिषद के पांच सदस्य देशों में से एक चीन हर बार इसमें अड़ंगा लगा देता है. इस बार भी चीन ने इसे लेकर कोई आश्वासन नहीं दिया है. कूटनीतिक मामलों की समझ रखने वाले अधिकांश जानकार कहते हैं कि मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित न होने देने के पीछे चीन के कई बड़े हित छिपे हुए हैं.

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ये लोग बताते हैं कि इस मामले पर चीन काफी आगे की सोच कर चल रहा है. उसे पता है कि हाफिज सईद के बाद अगर भारत ने मसूद अजहर को भी आतंकी घोषित करवा लिया तो वो पाकिस्तान को आतंकवाद फैलाने वाला राष्ट्र घोषित कराने के काफी करीब पहुंच जाएगा. अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश पाकिस्तान पर तमाम प्रतिबंध लगा देंगे. इसका इस्लामाबाद के साथ-साथ बीजिंग पर भी खासा असर पड़ेगा. क्योंकि चीन को पाकिस्तान के सबसे बड़े सहयोगी के रूप में देखा जाता है.

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पिछले पांच सालों में चीन ने पाकिस्तान में बड़ा निवेश किया है. इसमें 50 अरब डॉलर से बनने वाला आर्थिक गलियारा भी शामिल है. चीन को डर है कि अगर उसने मसूद अजहर का समर्थन नहीं किया तो जैश-ए-मोहम्मद सहित कई आतंकी गुट पाकिस्तान सरकार के ही खिलाफ हो सकते हैं. इससे उसका अरबों डॉलर का निवेश डूब सकता है.

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जैश-ए-मोहम्मद को लेकर इतिहास भी कुछ ऐसा ही कहता है. 2002 में पाकिस्तान सरकार ने इस संगठन को बैन किया था तब उसे इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था. इस कार्रवाई के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति मुशर्रफ पर कई हमले तक हुए थे. इसके अलावा पाकिस्तान में चीन का आर्थिक गलियारा उन इलाक़ों से होकर भी गुजर रहा है जहां कई आतंकी संगठन सक्रिय हैं. बताते हैं कि इन इलाकों में पाकिस्तानी सेना के अलावा मसूद अजहर का संगठन भी उसकी और चीनी नागरिकों की रखवाली करता है.

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