अमित शाह

विचार-रिपोर्ट | राजनीति

क्या पश्चिम बंगाल में सीबीआई की कार्यवाही ने भाजपा को वह दे दिया है जिसकी उसे एक अरसे से तलाश थी?

सीबीआई ने कोयला तस्करी मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की पत्नी और साली से पूछताछ की है

अभय शर्मा | 24 फरवरी 2021 | फोटो : भाजपा/फेसबुक

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क्या हुआ है?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से दो महीने पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ा एक्शन लिया है. उसने कोयला तस्करी से जुड़े मामले की जांच के लिए तृणमूल कांग्रेस के सासंद अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजीरा बनर्जी से पूछताछ की. अभिषेक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं. सीबीआई रुजीरा की बहन मेनका से भी पूछताछ कर चुकी है. उन्हें रविवार को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस दिया गया था. इस नोटिस में साफ तौर पर लिखा था कि सीबीआई को ऐसा लगता है कि रूजीरा बनर्जी कोयला तस्करी मामले की परिस्थितियों से अवगत थीं और इसलिए जांच एजेंसी उनसे कुछ पूछताछ करना चाहती है. सीबीआई के नोटिस पर अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. अभिषेक ने एक ट्वीट में लिखा, ‘दोपहर दो बजे सीबीआई ने मेरी पत्नी के नाम पर नोटिस दिया है, हमें देश के कानून पर पूरा भरोसा है, लेकिन अगर वो सोचते हैं कि इन हथकंडों से हमें डराया जा सकता है, तो वो गलतफहमी में हैं. हम वो नहीं, जिन्हें कभी डराया जा सके.’ रविवार शाम को ममता बनर्जी ने भी एक कार्यक्रम में कहा, ‘मैं उनको बता देना चाहती हूं कि वे मुझे गिरा नहीं सकते. मैं जब तक जिंदा हूं मैं किसी भी धमकी से नहीं डरने वाली. आपको पता है मेरी इस एरोगेंस (गुस्से) के पीछे क्या कारण है? ये मेरी मातृभाषा बंगाली है, जिसने मुझे एक शेरनी की तरह लड़ना सिखाया है जिसे बिल्ली के आगे झुकना नहीं सिखाया गया. जो बंदूकों से लड़ी हो, उसे चूहों से डर नहीं लगता.’

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कोयला तस्करी का मामला क्या है?

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम कोल इंडिया लिमिटेड के स्वामित्व वाली कंपनी ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) पश्चिम बंगाल में कोयला खनन का काम करती है. राज्य में बीते कुछ सालों से ईसीएल की कई खदानों में खनन का काम आधिकारिक रूप से बंद पड़ा है. लेकिन बीते साल जब सतर्कता विभाग और ईसीएल टास्क फोर्स के अधिकारियों ने निरीक्षण किया तो पता चला कि इनमें से कइयों में अवैध कोयला खनन हो रहा था. अधिकारियों के मुताबिक इन खदानों से बड़े पैमाने पर कोयला निकालकर ट्रकों से बाहर भेजा जा रहा था. इसके बाद बीती 27 नवंबर को सीबीआई ने इसे लेकर एक मामला दर्ज किया. सीबीआई का कहना था कि ईसीएल के कई उच्चपदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ रेलवे और सीआईएसएफ के कुछ अधिकारी स्थानीय माफियाओं के साथ मिलकर यह अवैध काम कर रहे थे.

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रूजीरा बनर्जी से इस मामले का क्या लेना-देना?

सीबीआई ने इस मामले का सबसे बड़ा सरगना अनूप मांझी उर्फ लाला को बताया. बताया जाता है कि अनूप मांझी के ठिकानों पर सीबीआई ने कई महीनों तक छापामारी की जिसके बाद इसमें यूथ टीएमसी के नेता और अभिषेक बनर्जी के करीबी विनय मिश्रा की बड़ी भूमिका का पता चला. सीबीआई ने इस बाबत मिश्रा और अनूप मांझी को कई बार नोटिस जारी किये. जब वे जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए तो उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट और लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया. सीबीआई से जुड़े सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों इस मामले में की गई छापामारी के दौरान एक डायरी बरामद हुई. इसमें इस बात का पूरा ब्योरा था कि कोयले के अवैध काम के बदले किस अधिकारी और किस थाने को कितने पैसे दिए जाते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डायरी में राजनेताओं को दिये गये करोड़ों रुपयों का जिक्र भी था. हालांकि, इस मामले में दर्ज किसी भी एफआईआर में अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजीरा बनर्जी या उनकी साली मेनका पर कोई गंभीर आरोप नहीं है. ना ही सीबीआई ने आधिकारिक तौर पर उनकी भूमिका के बारे में अब तक कुछ बताया है. लेकिन, संस्था से जुड़े सूत्रों के मुताबिक एजेंसी को शक है कि कोयला घोटाले से जुड़े कुछ लेन-देन इन दोनों के बैंक खातों के जरिये हो सकते हैं. सीबीआई के एक अधिकारी का मीडिया से बातचीत में कहना था, ‘इस समय यह मान लेना गलत होगा कि ये दोनों आरोपित हैं. लेकिन हां, हम बिना किसी सबूत के किसी को समन नहीं भेजते हैं. हम कुछ वित्तीय लिंक की जांच कर रहे हैं जो उन तक पहुंचते हैं. इसलिए पहले हम उनसे कुछ सवाल करना चाहते हैं.’

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भाजपा के नेता अब तक क्यों परेशान थे?

कुछ साल पहले तक पश्चिम बंगाल में भाजपा का कोई ख़ास वजूद नहीं था. लेकिन उसने टीएमसी के कुछ प्रमुख नेताओं को अपनी ओर खींचकर धीरे-धीरे राज्य में अपने पैर जमाये और बीते लोकसभा चुनाव में अच्छी सफलता भी हासिल की. आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी भाजपा की नीति टीएमसी के नेताओं को अपनी ओर खींचने की रही है और वह इसमें सफल भी हुई है. बीते छह महीनों में टीएमसी के दो दर्जन से ज्यादा बड़े नेताओं ने भाजपा का दामन थामा है. जानकारों की मानें तो ऐसा करने के बाद अब भाजपा ने अपनी एक और रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. इसका मकसद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को घेरना है. बीते कुछ सालों से पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा मुद्दा शारदा चिट फंड घोटाला बना हुआ है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई दोनों ही संस्थाएं इसकी जांच कर रही हैं. टीएमसी के कई नेताओं पर इस घोटाले में शामिल होने के आरोप लगे हैं. लेकिन, इसकी आंच सीधे-सीधे ममता बनर्जी या उनके परिवार तक नहीं पहुंची है. यानी अब तक भाजपा के पास ममता बनर्जी और उनके परिवार को घेरने के लिए भाई-भतीजावाद के आरोपों के अलावा कोई बड़ा मुद्दा नहीं था. जानकारों की मानें तो ऐसे में कोयला तस्करी के मामले ने चुनाव से दो महीने पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है.

ममता और अभिषेक बनर्जी | फोटो: अभिषेक बनर्जी/फेसबुक

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भाजपा अब एक और वजह से खुश क्यों है?

भाजपा पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान हिंदुत्व के बाद सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार के मुद्दे को ही उठा रही है. लेकिन जानकारों की मानें तो अब तक उसकी यह कवायद असरदार साबित नहीं हो पा रही थी. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि इस वक्त पश्चिम बंगाल में भाजपा के तीन सबसे बड़े चुनावी प्रबंधक – मुकुल रॉय, सुवेंदु अधिकारी और सोवन चटर्ची – तृणमूल कांग्रेस छोड़कर उसमें आए हैं और इन तीनों पर ही भ्रष्टाचार के आरोप हैं. भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय तो शारदा चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपित ही हैं. ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के नेता अपनी लगभग हर रैली में राज्य के लोगों को यह बताते हैं कि टीएमसी के भ्रष्टाचारी नेता अब उनकी पार्टी छोड़कर भाजपा में जा चुके हैं. विश्लेषकों की मानें तो इस वजह से ही पश्चिम बंगाल में भाजपा भ्रष्टाचार के मुद्दे को सफलता से नहीं उठा पा रही है. हो सकता है कि कोयला तस्करी के मामले में आगे जाकर ममता बनर्जी के परिवार को क्लीन चिट मिल जाए, लेकिन इन विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल भाजपा इसके जरिये भ्रष्टाचार के अपने मुद्दे को प्रभावी बनाने का काम कर सकती है.

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