पेट्रोल

विचार-रिपोर्ट | अर्थव्यवस्था

क्या ईरान से तेल खरीदने से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम घट जाएंगे?

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग के बीच मोदी सरकार ईरान से कच्चा तेल खरीदने के प्रयास कर रही है

ब्यूरो | 12 मार्च 2021 | फोटो : पिक्साबे

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पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम

ईंधन के दामों को लेकर पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है. इस समय देश के कई शहरों में पेट्रोल सौ रुपये और डीजल करीब 90 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. बीते मंगलवार को विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर संसद में काफी हंगामा किया. दोनों सदन कई बार स्थगित किए गए. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना था, ‘पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर की कीमत बीते कुछ दिनों में ही सातवें आसमान पर पहुंच गई है, गरीबों को काफी मुश्किल हो रही है. ऐसे में सरकार को कोई हल निकालना चाहिए.’ उधर, सरकार की तरफ से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का प्रमुख कारण अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल के दाम में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी को बताया जा रहा है.

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सरकार क्या उपाय कर रही है?

मोदी सरकार का कहना है कि वह पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी करने को लेकर हर संभव प्रयास कर रही है. सरकार इस कोशिश में है कि किसी तरह उसे कम कीमत पर बाहर से तेल मिल सके जिससे कि पेट्रोल-डीजल के दामों में गिरावट आये. सत्ताधारी भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं की मानें तो इसके लिए सरकार ईरान से तेल खरीदने के लिए भी प्रयास कर रही है. हाल में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी कहा था कि अमेरिका में सरकार बदलने के बाद भारत इस कोशिश में है कि वह ईरान से दोबारा तेल खरीद सके. साल 2019 में अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से भारत उससे तेल नहीं खरीद पा रहा है. हालांकि, अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन यह संकेत दे चुके हैं कि वे जल्द ही ईरान से प्रतिबंध हटा सकते हैं. उन्होंने चुनाव के दौरान यह वादा भी किया था.

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भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत कैसे तय होती है?

करीब 10 साल पहले भारत सरकार ने पेट्रोल से सब्सिडी खत्म कर उसकी कीमत बाजार के हवाले कर दी थी. उस दौरान जब कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर मिल रहा था तो भारत में पेट्रोल 60 रु प्रति लीटर के आसपास बिक रहा था. ऐसे में पिछले साल जब कच्चा तेल 20 डॉलर से भी नीचे आया तो पेट्रोल की कीमत पहले के मुकाबले काफी कम हो जानी चाहिए थी. लेकिन यह 70 रु प्रति लीटर के करीब ही थी. ऐसा इसलिए था कि तब केंद्र और राज्य सरकारों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर लगने वाले शुल्कों (एक्साइज ड्यूटी और वैट) में भारी बढो़तरी कर दी थी. इसलिए कच्चे तेल के भाव में बड़ी गिरावट के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतें उतनी ही रहीं. लेकिन अब जब कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है तो पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले टैक्स को स्थिर रखा जा रहा है जिससे कीमतों में उछाल आया हुआ है. यानी देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार से ज्यादा केंद्र और राज्य सरकारों की मर्जी के हिसाब से तय होती है.

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कच्चे तेल की कीमत में उछाल के बावजूद भारत को ईरान का तेल क्यों सस्ता पड़ेगा?

भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी तेल आयात करता है. इस मामले में वह इराक, सऊदी अरब, अमेरिका और नाइजीरिया पर निर्भर है. लेकिन, ईरान के मामले में काफी कुछ अलग है. ईरान भारतीय तेल कंपनियों को अच्छी-खासी छूट देता है. वह भारतीय कंपनियों से कच्चे तेल की कीमत का भुगतान तीन महीने में लेने के अलावा समुद्री भाड़ा भी सामान्य दर का 20 प्रतिशत ही वसूलता है. इसके चलते भारत को ईरानी कच्चे तेल की लागत काफी कम पड़ती है. इसी वजह से भारतीय तेल कंपनियां ईरानी तेल को ज्यादा तरजीह देती हैं. भारत सरकार को भी ईरान से तेल खरीदने का लाभ मिलता है. भारत ईरान को रुपए में ही तेल का भुगतान करता है. इससे एक तो भारत डॉलर में भुगतान से बच जाता है, दूसरा, जो पैसा भारत ईरान को देता है उससे ईरान भारतीय बाजार से खाद्यान्न, दवाएं और चिकित्सा उपकरण खरीद लेता है.

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और कहीं से राहत के संकेत नहीं

अर्थजगत के कुछ जानकारों की मानें तो सरकार इस समय भारी दवाब में है और पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाकर लोगों को राहत देने पर विचार भी कर रही है. लेकिन वह तभी ऐसा करेगी, जब उसे वैश्विक बाजार से कच्चा तेल कम दामों पर मिलेगा, जिसकी उम्मीद फिलहाल न के बराबर ही नजर आ रही है. इस हफ्ते अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल हो गई है. इसमें अभी और भी इजाफा होने की बात कही जा रही है क्योंकि भारत की अपील के बावजूद तेल निर्यातक देशों ने कच्चे का तेल का उत्पादन बढ़ाने का कोई संकेत नहीं दिया है. जाहिर है कि ऐसे में आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम और भी बढ़ सकते हैं. लेकिन जानकारों का कहना है कि अगर भारत सरकार की कोशिश रंग लाती है और अमेरिका की नयी सरकार उसे ईरान से तेल खरीदने की छूट दे देती है तो भारतीयों को सस्ता पेट्रोल-डीजल मिलने के आसार हैं क्योंकि फिर सरकार के लिए टैक्स में कमी करना थोड़ा आसान हो जाएगा.

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