नरेंद्र मोदी और मून जेई-इन

विचार-रिपोर्ट | विदेश

क्यों भारत से कहीं ज्यादा इस समय दक्षिण कोरिया को उसकी जरूरत है

हाल के सालों में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बहुत कुछ ऐसा हुआ है, जो पहले नहीं हुआ था

अभय शर्मा | 22 फरवरी 2019 | फोटो : पीआईबी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरूवार को अपनी दो दिवसीय यात्रा पर दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल पहुंचे. बतौर प्रधानमंत्री वे दूसरी बार दक्षिण कोरिया गये हैं. इससे पहले वे जुलाई 2015 में वहां गए थे. मून जेई-इन भी पिछले साल भारत आ चुके हैं.

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इन यात्राओं के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक संबंधों के अलावा सामरिक मामलों को लेकर भी बहुत कुछ ऐसा हुआ जो पहले नहीं हुआ था. इन यात्राओं के दौरान ही दक्षिण कोरिया ने भारत को अपना ‘विशेष रणनीतिक साझेदार’ घोषित किया. दक्षिण कोरिया की इस सूची में रूस, चीन, जापान और अमैरिका जैसे कुछ गिने-चुने देश ही शामिल हैं. इसके अलावा दक्षिण कोरिया ने भारत में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी बड़ी आर्थिक मदद दी है.

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दोनों देशों के गहरे होते रिश्तों के बीच और भी बहुत कुछ ऐसा देखने को मिला जो सामान्य नहीं था. बीते नवंबर में भारत ने कोरियाई राष्ट्रपति की पत्नी को अपने यहां आमंत्रित किया था. उन्होंने बनारस और अयोध्या में आय़ोजित किये गये कई कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया.

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विदेश मामलों के जानकार मानते हैं कि भारत के लिए तकनीक से सम्पन्न दक्षिण कोरिया हर लिहाज से महत्वपूर्ण है. लेकिन, पिछले कुछ सालों में जिस तरह से दक्षिण कोरिया ने भारत के लिए अपनी बाहें फैलाई हैं, वह चौंकाने वाला है. जानकारों के मुताबिक दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से निर्यात पर आधारित है. उसके सबसे बड़े निर्यातक देश चीन, अमेरिका और रूस हैं. लेकिन, पिछले सालों में इन देशों में जो स्थिति बनी उससे कोरिया की अर्थवयवस्था को नुकसान उठाना पड़ा है.

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अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से वह रूस को उतना निर्यात नहीं कर पा रहा है. और चीनी अर्थव्यवस्था में लगातार जारी गिरावट का खमियाजा भी दक्षिण कोरियाई कंपनियों को उठाना पड़ रहा है. लेकिन दक्षिण कोरिया चीन पर अपनी निर्भरता एक और वजह से कम करना चाहता है. चीन ने पिछले दिनों कई बार दक्षिण कोरिया की खुद पर निर्भरता का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की है. ऐसे हालात में दक्षिण कोरिया दूसरे विदेशी बजारों में अपना निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. जाहिर सी बात है कि भारत इसमें कोरिया के बहुत काम आ सकता है.

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