बराक ओबामा

विचार-रिपोर्ट | विदेश

बराक ओबामा ने अपनी किताब – अ प्रॉमिस्ड लैंड – में किन भारतीयों का जिक्र किया है

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की आत्मकथा ‘अ प्रॉमिस्ड लैंड’ का पहला भाग हाल ही में प्रकाशित हुआ है

अभय शर्मा | 19 नवंबर 2020 | फाइल फोटो : व्हाइट हाउस / यूट्यूब

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की आत्मकथा ‘अ प्रॉमिस्ड लैंड’ का पहला भाग इसी महीने रिलीज हुआ है. उनकी यह नई किताब उनके निजी जीवन की तुलना में राजनीतिक अनुभवों पर अधिक केंद्रित है. रिलीज होने से पहले ही यह किताब भारत में भी तब चर्चा का विषय बन गयी, जब अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसकी विस्तृत समीक्षा प्रकाशित की. अखबार के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति ने इस किताब में भारत के कई चर्चित लोगों को लेकर अपना अनुभव साझा किया है जिनमें महात्मा गांधी से लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल हैं. बराक ओबामा ने अपनी आत्मकथा के दूसरे भाग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र भी किया है, यह भाग कुछ समय बाद में प्रकाशित होगा.

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बराक ओबामा ने ‘अ प्रॉमिस्ड लैंड’ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में लिखा है कि भारत के साथ उनके विशेष लगाव की सबसे बड़ी वजह महात्मा गांधी हैं जिन्हें वे अब्राहम लिंकन, मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला की श्रेणी में रखते हैं. वे लिखते हैं, ‘महात्मा गांधी के कार्यों ने मुझे उनकी बातों से ज्यादा प्रभावित किया, उन्होंने अपने जीवन को खतरे में डाला, जेल गए और अपना सब कुछ अपने लोगों के संघर्ष के लिए समर्पित कर दिया.’ बराक ओबामा 2010 में जब भारत आये थे तो मुंबई स्थित मणि भवन भी गए थे. मणि भवन में महात्मा गांधी ने डेढ़ दशक से ज्यादा का समय गुजारा था. ओबामा मणि भवन का जिक्र करते हुए लिखते हैं, ‘(मणि भवन) में मेरी बहुत इच्छा हो रही थी कि मैं गांधी से पूछूं कि इतने कम (संसाधनों) में, इतना बड़ा करने की ताकत और इच्छा शक्ति उन्होंने कहां से पायी. यह भी पूछना चाहता था कि निराशा से वे कैसे उबरते थे?’ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी आत्मकथा में गांधी जी के लिए यह भी लिखते हैं कि गांधी के अंदर असाधारण क्षमता थी, लेकिन फिर भी वे उस बंटवारे को नहीं रोक सके जिसमें लाखों लोगों की मौत हुई. ओबामा के मुताबिक महात्मा गांधी ने अपने अंतिम समय तक काफी मेहनत की, लेकिन फिर भी वे भारत की दमघोटूं जाति व्यवस्था को नहीं खत्म कर पाए.

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बराक ओबामा ने अपनी किताब में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जमकर तारीफ़ की है. उनके मुताबिक मनमोहन सिंह और उनके संबंधों में काफी गर्मजोशी थी जिसका उस दौरान भारत और अमेरिका को काफी फायदा हुआ था. बराक ओबामा लिखते हैं, ‘एक सीधे-सच्चे और मधुर बोलने वाले अर्थशास्त्री, जो 90 के दशक में भारत के वित्त मंत्री भी रहे और उस दौरान उनकी नीतियों ने लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में मैंने बुद्धिमान, विचारशील और बेहद ईमानदार नेता के रूप में जाना.’ ओबामा आगे यह भी लिखते हैं कि मनमोहन सिंह विदेश नीति को लेकर काफी सजग रहते थे, वे विदेश मामलों में उन भारतीय नौकरशाहों की सलाह को ही तवज्जो देते थे, जो (नौकरशाह) अमेरिका के इरादों को ऐतिहासिक रूप से शक की निगाह से देखते थे. लेकिन 2010 में चीजें बदली और मेरे पहले भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई ऐतिहासिक समझौते हुए.

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अपनी किताब में बराक ओबामा ने राहुल गांधी की मां और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का भी कई जगह पर जिक्र किया है. ओबामा ने सोनिया गांधी को चालाक और बेहद बुद्धिमान महिला बताते हुए लिखा है कि वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नीतिगत फैसलों को पलटने या टालने को लेकर काफी सावधानी बरतती थीं. किताब में एक अन्य जगह पर कांग्रेस पार्टी की आंतरिक राजनीति पर ओबामा लिखते हैं, ‘भारत की राजनीति अब भी जाति, धर्म और परिवारवाद के इर्द-गिर्द घूम रही है. हालांकि, इस संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि डॉ मनमोहन सिंह का पीएम के रूप में चुनाव इससे इतर देश की प्रगति की दिशा में हुआ एक प्रयास था. लेकिन इसके साथ ये भी सच है कि वे अपनी लोकप्रियता की वजह से प्रधानमंत्री नहीं बने बल्कि उनको सानिया गांधी ने पीएम बनाया. इस बारे में एक से अधिक राजनीतिक विश्‍लेषकों का मानना है कि सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह का चुनाव काफी सोच-समझ कर किया था. क्योंकि मनमोहन सिंह एक ऐसे बुजुर्ग सिख नेता थे जिनका कोई राष्ट्रीय राजनीतिक जनाधार नहीं था. ऐसे नेता से उन्हें अपने 40 वर्षीय बेटे राहुल के लिए कोई सियासी खतरा नहीं दिखा, जिसे वे कांग्रेस पार्टी को संभालने के लिए तैयार कर रहीं थीं.’

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बराक ओबामा के मुताबिक 2010 में एक डिनर पार्टी में उनकी मुलाकात राहुल गांधी से हुई थी. इस मुलाक़ात के बाद वे इस बात को लेकर काफी संशय में थे कि क्या भविष्य में राहुल वाकई अपनी मां की इच्छा को पूरा कर पाएंगे और क्या भाजपा की विभाजनकारी राष्ट्रवादी नीति के दौर में वे कांग्रेस पार्टी की नैय्या पार लगाने में सफल होंगे? अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी आत्मकथा में राहुल गांधी की राजनीतिक क्षमताओं को लेकर भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा है कि जब वे राहुल से एक दशक पहले मिले थे तो उन्हें ‘उनमें एक ऐसे नर्वस और अपरिपक्व छात्र के गुण दिखे, जिसने अपना होमवर्क कर लिया है और जो अपने टीचर को प्रभावित करने की कोशिश में है. लेकिन गहराई से देखें तो उसमें किसी विषय पर महारत हासिल करने के लिए या तो योग्यता की कमी है या जुनून की.’

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