डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग-उन

विचार-रिपोर्ट | विदेश

क्यों लाख चाहने के बाद भी अमेरिका उत्तर कोरिया पर सैन्य कार्रवाई नहीं कर सकता

पिछले डेढ़ महीने से उत्तर कोरिया मिसाइलों और हथियारों का परीक्षण कर लगातार अमेरिका को उकसा रहा है

ब्यूरो | 22 अगस्त 2019 | फोटो : incontextinternational.org

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग-उन के बीच बीते साल जून में वार्ता हुई थी. इसमें ट्रंप ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया के वार्षिक सैन्याभ्यास को स्थगित कर दिया था और दक्षिण कोरिया से अपने सैनिकों को वापस बुलाने पर विचार करने का आश्वासन दिया था. इसके बदले उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्त बनाने और भविष्य में कोई मिसाइल परीक्षण न करने का वादा किया था.

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लेकिन इस बैठक के करीब साल भर बाद परिस्थितियां फिर से पहले जैसी ही दिख रही हैं. पिछले डेढ़ महीने में उत्तर कोरिया कई मिसाइलों और हथियारों का परीक्षण कर चुका है. उधर, अमेरिका ने भी दक्षिण कोरिया के साथ उत्तर कोरिया के नजदीक सैन्याभ्यास शुरू कर दिया है. यानी कि न केवल उत्तर कोरिया अपने वादे से पलट चुका है बल्कि लगातार अमेरिका को उकसा भी रहा है. ऐसे में अब अमेरिका के पास एकमात्र विकल्प सैन्य कार्रवाई का ही बचता है. लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो अमेरिका लाख चाहने के बाद भी ऐसा करने की हालत में नहीं है.

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जानकार इसकी पहली वजह उत्तर कोरिया की सैन्य ताकत को बताते हैं. 12 लाख से ज्यादा सैनिकों वाली उसकी सेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सेना है. और उसके पास परमाणु क्षमता भी है. ऊपर से उत्तर कोरिया के पास ऐसी मिसाइलों की कमी नहीं है जो अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम हैं. इस लिहाज से उत्तर कोरिया की सैन्य ताकत सीरिया और अफगानिस्तान सरीखे उन देशों से कहीं ज्यादा है, जहां बीते सालों में अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की है.

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अमेरिका की एक बड़ी चिंता दक्षिण कोरिया और जापान को लेकर भी है. अगर युद्ध हुआ तो अमेरिका के लिए इन दोनों देशों को बचा पाना बेहद मुश्किल होगा. दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल उत्तर कोरियाई सीमा से महज 35 मील दूर ही है. और उत्तर कोरिया कई बार कह चुका है कि युद्ध छिड़ने पर वह सबसे पहले सियोल को ही अपना निशाना बनाएगा.

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अमेरिका के उत्तर कोरिया पर हमला न करने की एक और बड़ी वजह चीन और उत्तर कोरिया के बीच की एक संधि भी है. इसके तहत यदि इन दोनों में से किसी भी देश पर हमला होता है तो दोनों देशों को तुरंत एक-दूसरे का सहयोग करना पड़ेगा. ऐसे में साफ़ है कि अमेरिका को उत्तर कोरिया से निपटने के लिए या तो चीन को अपने साथ लेना होगा या फिर उससे भी युद्ध करना पड़ेगा.

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