व्लादिमीर पुतिन

विचार-रिपोर्ट | विदेश

क्यों आईएनएफ संधि से अमेरिका और रूस का अलग होना पूरी दुनिया पर असर डाल सकता है

यूरोप को सोवियत संघ के परमाणु खतरे से बचाने के लिए 31 साल पहले आईएनएफ संधि की गई थी

अभय शर्मा | 06 फरवरी 2019 | फोटो : रूसी रक्षा मंत्रालय

1

बीते शुक्रवार को अमेरिका ने रूस के साथ हुई ‘मध्यम दूरी की परमाणु शक्ति संधि’ यानी आईएनएफ से खुद को अलग करने की घोषणा कर दी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि रूस लगातार इसका उल्लंघन कर रहा है और जब तक वह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का निर्माण करता रहेगा, तब तक अमेरिका इस संधि का पालन नहीं करेगा. अमेरिका की इस घोषणा के अगले ही दिन रूस ने भी इस संधि से हटने का ऐलान कर दिया.

2

शीत युद्ध के समय जब सोवियत संघ ने यूरोपीय देशों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात कर दी थीं, तब इस संधि पर हस्ताक्षर किए गये थे. यह संधि अमेरिका और रूस को जमीन से मार करने वाली ऐसी मिसाइलें बनाने से रोकती है, जो परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम हों और जिनकी मारक क्षमता 500 से लेकर 5,500 किलोमीटर तक हो. आईएनएफ संधि से पश्चिमी देशों पर सोवियत संघ के परमाणु हमले का खतरा खत्म हो गया था.

3

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक बीते कुछ सालों से रूस न केवल लगातार मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल बना रहा है बल्कि, उसने ऐसी तैयारी भी कर रखी है कि चंद मिनटों में पूरे यूरोप पर ये मिसाइलें दागी जा सकती हैं. ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका ने रूस पर दबाव बनाने के कई प्रयास किए लेकिन वे कारगर साबित नहीं हुए.

4

ट्रंप के इस संधि से पीछे हटने की एक बड़ी वजह चीन भी है. बीते साल अमेरिकी रक्षा विभाग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि चीन जिस तरह की मिसाइलें बना रहा है, अगर उसे भी रूस के साथ हुई संधि में शामिल किया जाए तो उसकी अधिकांश मिसाइलें इसका उल्लंघन करेंगी. ऐसे में या तो उसे भी इस संधि में शामिल करना होगा या अमेरिका को इससे अलग हट जाना होगा.

5

यह भी माना जा रहा है कि इस संधि के टूटने का सबसे ज्यादा फायदा रूस को होगा. अब उसे मध्यम दूरी की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें बनाने और तैनात करने से कोई नहीं रोक सकेगा. इसके अलावा रूस हमेशा से नाटो को दो-फाड़ करने के प्रयास करता रहा है. इस संधि के टूटने के बाद उसकी ये मुराद भी पूरी हो सकती है. जानकारों के मुताबिक अब अमेरिका यूरोप में अपनी मिसाइलें तैनात करेगा जिसके लिए कुछ नाटो सदस्य देश शायद ही तैयार हों. बताया जाता है कि नाटों के सदस्य देश इसलिए भी उससे नाराज हैं क्योंकि उनको विश्वास में लिये बिना अमेरिका ने आईएनएफ संधि से हटने का फैसला कर लिया.

  • रियलमी नार्ज़ो 30 5जी मोबाइल फोन

    खरा-खोटा | मोबाइल फोन

    रियलमी नार्ज़ो 30 (5जी): मनोरंजन के लिए मुफीद एक मोबाइल फोन जो जेब पर भी वजन नहीं डालता है

    ब्यूरो | 03 जुलाई 2021

    ह्यूंदेई एल्कजार

    खरा-खोटा | ऑटोमोबाइल

    क्या एल्कजार भारत में ह्यूंदेई को वह कामयाबी दे पाएगी जिसका इंतजार उसे ढाई दशक से है?

    ब्यूरो | 19 जून 2021

    वाट्सएप

    ज्ञानकारी | सोशल मीडिया

    ‘ट्रेसेबिलिटी’ क्या है और इससे वाट्सएप यूजर्स पर क्या फर्क पड़ेगा?

    ब्यूरो | 03 जून 2021

    कोविड 19 की वजह से मरने वाले लोगों की चिताएं

    आंकड़न | कोरोना वायरस

    भारत में अब तक कोरोना वायरस की वजह से कितने लोगों की मृत्यु हुई होगी?

    ब्यूरो | 27 मई 2021