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अमेरिका : कैसे डोनाल्ड ट्रंप को मिली क्लीन चिट ने अगले राष्ट्रपति चुनाव के समीकरण पलट दिए हैं

2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल को लेकर दो साल से चल रही जांच में बीते हफ्ते डोनाल्ड ट्रंप को क्लीन चिट मिली है

ब्यूरो | 07 अप्रैल 2019 | फोटो : डोनाल्ड ट्रंप / सोशल मीडिया

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बीते हफ्ते अमेरिका में वो हुआ जिसकी बहुत कम लोगों को उम्मीद थी. 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल को लेकर चल रही जांच में डोनाल्ड ट्रंप को क्लीन चिट मिल गई. जांच के दौरान ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे ये साबित हो सके कि राष्ट्रपति चुनाव में अपनी जीत के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ मिलकर कोई साजिश रची थी. जांच के इस नतीजे ने डोनाल्ड ट्रंप को बड़ी राहत दी है, लेकिन इससे विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी में खलबली मच गई है.

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अमेरिका की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों की मानें तो पिछले कुछ समय से डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चलाए जाने की संभावना काफी प्रबल थी. रॉबर्ट म्युलर की जांच के दौरान जिस तरह से ट्रंप के कई सिपहसालार पकड़े गए उससे ऐसा लग रहा था कि इसमें ट्रंप भी जरूर फंसेंगे. लेकिन अब उनके खिलाफ महाभियोग चलाये जाने की गुंजाइश बिलकुल खत्म हो गई है.

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हालांकि विपक्ष का अभी भी ये मानना है कि पूरी रिपोर्ट सामने आने पर इसमें कुछ न कुछ ऐसा जरूर होगा जिसे अगले चुनाव में ट्रंप के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सके. लेकिन ज्यादातर जानकारों की मानें तो अब ‘रूसी जांच’ का बड़ा मुद्दा बन पाना मुश्किल है. सीएनएन के एक हालिया सर्वे से भी ऐसे ही संकेत मिलते हैं. इसमें किसी ने भी ‘रूसी जांच’ को मतदान के लिए निर्णायक मुद्दा नहीं माना है.

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ऐसे में ज्यादातर जानकारों का मानना है कि ट्रंप के सर से महाभियोग की तलवार हटने के बाद विपक्ष के लिए उनसे मुकाबला कर पाना आसान नहीं है. इसका अंदाजा 2018 के मध्यावधि चुनाव से भी मिलता है. इसमें रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति उससे बेहतर रही थी, जितनी मानी जा रही थी. अब इस जांच में मिली क्लीन चिट ने डोनाल्ड ट्रंप को और मजबूत कर दिया है.

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इसका फायदा डोनाल्ड ट्रंप को अपनी पार्टी में भी होना तय है. रिपब्लिकन पार्टी के कई नेता ट्रंप के रूसी जांच में फंसते ही अगले राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी दावेदारी का ऐलान कर सकते थे. लेकिन जांच के नतीजे सामने आने के बाद विपक्ष के साथ-साथ उनके भी हौसले पस्त हो गए हैं.

  • अमित शाह, भाजपा

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