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1984 के दंगों के 15 आरोपित सुप्रीम कोर्ट से बरी होने सहित आज के अखबारों की पांच बड़ी खबरें

द टेलीग्राफ | नवभारत टाइम्स | अमर उजाला | हिंदुस्तान | द इंडियन एक्सप्रेस

ब्यूरो | 01 जून 2019 | फोटो: विकीमीडिया कॉमन्स

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मुख्य न्यायाधीश पर आरोप लगाने वाली महिला जांच से पीछे हटी

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली महिला ने इस मामले में की जा रही ‘आतंरिक जांच’ का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है. द टेलीग्राफ के मुताबिक शिकायतकर्ता ने कहा है कि जांच करने वाली इस समिति से उसे न्याय नहीं मिल सकेगा. पीड़िता ने आगे बताया कि आंतरिक जांच को लेकर उसने सुप्रीम कोर्ट से बाहर के न्यायाधीशों को नियुक्त करने की मांग की थी, लेकिन जांच की जिम्मेदारी उन न्यायाधीशों दी गई जो मुख्य न्यायाधीश के अधीनस्थ काम कर रहे हैं.

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ओडिशा : कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से पांच की मौत

ओडिशा के भद्रक जिले में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से पांच लोगों की मौत हो गई. साथ ही, 28 को बीमार बताया जा रहा है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक यह घटना बीती 29 अप्रैल को राज्य की सभी लोकसभा और विधानसभा सीटों के लिए मतदान खत्म होने बाद हुई. स्थानीय लोगों का कहना है कि पीड़ितों ने बीते सोमवार को मतदान से पहले राजनीतिक दलों के पैसे से शराब खरीदी थी. वहीं, पुलिस ने कहा है कि इस घटना की छानबीन की जा रही है. दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने भी इस मामले की जांच करने की बात कही है.

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सुप्रीम कोर्ट ने सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में दोषी साबित 15 लोगों को बरी किया

सुप्रीम कोर्ट ने साल 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में दोषी साबित 15 लोगों को बरी कर दिया. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं था. साथ ही, प्रत्यक्षदर्शियों ने भी सीधे तौर पर आरोपितों की पहचान नहीं की थी. इससे पहले दिल्ली स्थित एक निचली अदालत ने साल 1996 में इस मामले में 107 लोगों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल की सजा सुनाई थी. इसके बाद इनमें से 89 ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की थी. 2018 में हाई कोर्ट ने इनमें से 70 लोगों की सजा बरकरार रखी थी. फिर इनमें से 15 ने सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. इन पर नवंबर, 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद त्रिलोकपुरी में 95 लोगों की जान लेने का आरोप था.

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दहेज प्रताड़ना की शिकायत विवाहिता के पिता भी कर सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ किया है कि विवाहिता को दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने की शिकायत उसके पिता भी कर सकते हैं. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने कहा, ‘आईपीसी की धारा-498(ए) में यह कहीं नहीं लिखा है कि यह शिकायत उस महिला द्वारा ही की जाएगी, जिसे उसके पति या फिर रिश्तेदारों ने दहेज प्रताड़ित किया है.’ यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मामले में पति की याचिका खारिज कर दी.

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यदि मैं वाराणसी से लड़ती तो पूर्वी उत्तर प्रदेश के पार्टी उम्मीदवारों को निराशा होती : प्रियंका गांधी वाड्रा

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने वाराणसी से बतौर उम्मीदवार न उतरने के फैसले का बचाव किया है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के फैसले का पालन किया है. प्रियंका गांधी का कहना था, ‘मैंने वरिष्ठ नेताओं और उत्तर प्रदेश में अपने सहकर्मियों से सलाह ली थी. उन्हें यह महसूस हुआ कि मुझ पर 41 सीटों की जिम्मेदारी है और सभी उम्मीदवार अपने क्षेत्रों में मेरा इंतजार कर रहे हैं. प्रत्याशियों को निराशा होती यदि मैं केवल एक जगह पर ध्यान देती.’ पूर्वी उत्तर प्रदेश की चुनाव प्रभारी ने साफ किया कि उनके वाराणसी से न लड़ने पर कोई गलत संकेत नहीं जा रहे हैं. उन्होंने पार्टी के इस फैसले पर खुशी भी जाहिर की.

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