ब्रिटिश भारत में इस्तेमाल किए जाने वाले डाक टिकट

विचार-रिपोर्ट | आज का कल

भारत में पहला औपचारिक डाक टिकट जारी होने सहित 04 मई को घटी पांच प्रमुख घटनाएं

डाक टिकट | ऑस्कर | चार्ली चैप्लिन | मार्गरेट थैचर | रॉबर्ट मुगाबे

ब्यूरो | 04 मई 2019

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04 मई, 1854 को भारत की पहली डाक टिकट को औपचारिक तौर पर जारी किया गया. यह सफेद या भूरे रंग के कागज पर नीले रंग से बनाया गया स्टाम्प था जिसकी कीमत आधा आना थी. हालांकि इसके दो साल पहले से ही देश में डाक टिकटों का इस्तेमाल किया जा रहा था लेकिन इसके पहले तक देश भर में कहीं भी चिट्ठी भेजने की सुविधा नहीं थी.

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04 मई, 1927 को अमेरिका में ऑस्कर पुरस्कार देने वाली मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एकेडमी की स्थापना हुई थी. दरअसल, इस तारीख से पहले इस संस्थान का नाम ‘इंटरनेशनल मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एकेडमी’ था. बाद में इसमें से ‘इंटरनेशनल’ को हटा लिया गया था.

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04 मई, 1975 को ‘द किड’ और ‘ग्रेट डिक्टेटर’ जैसी मूक फिल्मों के स्टार चार्ली चैपलिन को बकिंघम पैलेस में नाइट की उपाधि प्रदान की गई. नाइट की उपाधि ब्रिटिश राजशाही द्वारा दिया गया एक तरह का नागरिक सम्मान है. यह उपाधि पहले उन सैनिकों या योद्धाओं को दी जाती थी जो युद्ध में बेहतरीन प्रदर्शन करते थे. अब यह सम्मान पब्लिक लाइफ में बेहतरीन काम करने वालों लोगो को दिया जाता है.

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04 मई, 1979 को मार्गरेट थैचर को ब्रिटेन की प्रधानमंत्री चुना गया. पूरे यूरोप में वह यह पद संभालने वाली पहली महिला थीं. थैचर को आज भी महिलाओं की बराबरी के लिए काम करने वाली सबसे बड़ी हस्तियों में शुमार किया जाता है.

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04 मई, 1980 को जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति नेता रॉबर्ट मुगाबे ने चुनाव में भारी जीत हासिल की और प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति बने. मुगाबे 1987 तक इस पद पर रहे. इसके बाद वे जिम्बाब्वे केदूसरे राष्ट्रपति के तौर पर चुने गए और 1987 से 2017 तक इसका कार्यभार संभाला.

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