1857 की क्रांति

विचार-रिपोर्ट | आज का कल

1857 की क्रांति की पहली चिंगारी भड़कने सहित 26 फरवरी को घटी पांच प्रमुख घटनाएं

1857 की क्रांति | असम | अमेरिका | कुवैत | आर्वी सैटेलाइट स्टेशन

ब्यूरो | 26 फरवरी 2019 | फोटो: विकीमीडिया कॉमन्स

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26 फरवरी, 1957 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के खिलाफ सर्वप्रथम बहरामपुर के सैनिकों ने 26 फरवरी, 1857 को विद्रोह कर दिया और विद्रोह की यह आंच देखते-देखते एक जन विद्रोह में बदल गई. दरअसल ब्रिटिश सरकार ने दिसंबर, 1856 में पुरानी बंदूकों के स्थान पर नई राइफल का प्रयोग शुरू किया, जिसके कारतूस पर लगे कागज को मुंह से काटना पड़ता था. बंगाल की सेना को पता चल गया कि इस कारतूस में गाय और सुअर की चर्बी मिली हुई है.

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26 फरवरी, 1858 को पियाली बरूआ और दीवान मणिराम दत्ता को असम के शाही परिवार को फिर से गद्दी पर बिठाने के प्रयासों के कारण फांसी पर लटका दिया गया. मणिराम दत्ता असम में चाय बागानों की स्थापना करने वाले शुरूआती व्यक्तियों में से एक थे. वे और पियाली अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने वाले असम के मुख्य क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं.

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26 फरवरी, 1993 को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर बम हमले में 6 लोग मारे गए और 100 से ज्यादा घायल हुए. इस हमले ने अमेरिका के लोगों को हैरान कर दिया क्योंकि महाशक्ति पर यह इस तरह का पहला हमला था.

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26 फरवरी, 1991 को तकरीबन सात महीने तक कुवैत पर कब्जे के बाद इराकी फौजों को अमेरिका और सहयोगी देशों की सेना ने कुवैत से खदेड़ बाहर किया. सद्दाम हुसैन ने इराकी रेडियो पर कुवैत से अपने सैनिकों की वापसी की घोषणा की.

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26 फरवरी, 1972 को वर्धा के निकट आर्वी में बनाए गए विक्रम अर्थ सेटेलाइट स्टेशन को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरि ने देश को समर्पित किया था.

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