आतिशी मार्लेना

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भाजपा पर आतिशी मार्लेना के खिलाफ आपत्तिजनक पर्चे बंटवाने के आरोप सहित आज के बड़े समाचार

आम आदमी पार्टी | कांग्रेस | तेज बहादुर यादव | पाकिस्तान | ईरान प्रतिबंध

ब्यूरो | 09 जून 2019 | फोटो : आतिशी मार्लेना / फेसबुक

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आप ने गौतम गंभीर पर पार्टी उम्मीदवार आतिशी मार्लेना के खिलाफ आपत्तिजनक पर्चे बंटवाने का आरोप लगाया

दिल्ली में एक पर्चे को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है. इस पर्चे में पूर्वी दिल्ली से आम आदमी पार्टी उम्मीदवार आतिशी मार्लेना को लेकर कई आपत्तिजनक बातें हैं. पार्टी का आरोप है कि ये पर्चा पूर्वी दिल्ली से ही भाजपा के उम्मीदवार गौतम गंभीर ने बंटवाया है. पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक ट्वीट कर कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि गौतम गंभीर इस स्तर तक गिर सकते हैं. उधर, आतिशी ने सवाल किया कि ऐसा शख्स सांसद बनने के बाद अपने क्षेत्र की महिलाओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगा. दूसरी तरफ, गौतम गंभीर ने ऐसा कोई भी पर्चा बंटवाने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी ये साबित कर दे कि इसमें उनका कोई हाथ है तो वे मैदान से हट जाएंगे.

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प्रधानमंत्री खुद वायु सेना के विमानों को प्राइवेट टैक्सी की तरह इस्तेमाल करते हैं : कांग्रेस

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा आईएनएस विराट के पर्सनल टैक्सी की तरह इस्तेमाल के नरेंद्र मोदी के आरोप पर कांग्रेस ने पलटवार किया है. प्रधानमंत्री ने ये दावा बात बुधवार को दिल्ली में एक रैली में किया था. पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे निराधार बताया. उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से प्रधानमंत्री की घबराहट दिखती है. पार्टी के ही एक अन्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि उल्टे प्रधानमंत्री ने वायु सेना के विमानों को प्राइवेट टैक्सी की तरह इस्तेमाल किया है. उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए ये बात कही. रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने चुनावी दौरों के लिए भी वायु सेना के विमानों का इस्तेमाल किया है और इनके भाड़े के रूप में 744 रुपये जैसी नाममात्र की रकम भी चुकाई गई है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी नरेंद्र मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री उनके पिता पर जरूर बात करें, लेकिन ये भी बताएं कि उन्होंने रफाल मामले में क्या किया और क्या नहीं किया.

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सुप्रीम कोर्ट ने तेज बहादुर यादव की याचिका खारिज की, चुनाव लड़ने की उम्मीद खत्म

तेज बहादुर यादव के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उनका नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर की गई उनकी याचिका खारिज कर दी. शीर्ष अदालत ने कहा कि तेज बहादुर की दलीलों में दम नहीं है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि तेज बहादुर की शिकायत के हर बिंदु पर गौर किया जाए. अदालत ने आयोग को जवाब देने के लिए आज तक का वक्त किया था. तेज बहादुर को सपा-बसपा महागठबंधन ने अपना उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया था. लेकिन चुनाव आयोग ने उनका नामांकन रद्द कर दिया था. इसके खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. वाराणसी में आम चुनाव के सातवें चरण के तहत 19 मई को मतदान होना है.

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सिंधु जल समझौते को लेकर पाकिस्तान विश्व बैंक पहुंचा, मध्यस्थता न्यायालय की मांग की

सिंधु जल समझौते पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की चेतावनी के बाद पाकिस्तान विश्व बैंक पहुंच गया है. उसने दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी इस विवाद के समाधान के लिए कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन यानी मध्यस्थता न्यायालय की मांग की है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैज़ल ने कहा कि भारत दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते का उल्लंघन कर रहा है. इससे पहले केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच इस समझौते का आधार शांतिपूर्ण संबंध और दोस्ती थी, जो मौजूदा हालात में पूरी तरह से गायब है. उन्होंने कहा था कि इसलिए भारत इस समझौते का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है.

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तेल और गैस के बाद अब अमेरिका ने ईरान के धातु उद्योग पर भी प्रतिबंध लगाया

अमेरिका और ईरान के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक आदेश जारी करते हुए ईरान के धातु उद्योग पर प्रतिबंध लगा दिया है. उन्होंने ये कदम ईरान के उस बयान के बाद उठाया है जिसमें कहा गया था कि वो परमाणु समझौते से जुड़ी कुछ शर्तों से बाहर निकल रहा है. ईरान के निर्यात में तेल और गैस के बाद सबसे बड़ा हिस्सा धातु उद्योग का ही है. इससे पहले अमेरिका ईरान के तेल और गैस कारोबार पर भी प्रतिबंध लगा चुका है. उधर, ईरान के साथ परमाणु समझौते में शामिल ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने उसे इस समझौते के नियमों को न तोड़ने की चेतावनी दी है. उनका कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो ईरान को बुरे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. ये समझौता 2015 में हुआ था. इसके तहत ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम सीमित करना था और बदले में उस पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जानी थी.

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