मायावती, बसपा

समाचार | बयान

आरएसएस को आरक्षण विरोधी मानसिकता छोड़ने की मायावती की सलाह सहित आज के बड़े बयान

मायावती | भूपेंद्र सिंह हुड्डा | अशोक गहलोत | रघुराम राजन | पी चिदंबरम

ब्यूरो | 20 अगस्त 2019 | फोटो: फेसबुक-मायावती

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‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपनी आरक्षण विरोधी मानसिकता छोड़ देनी चाहिए.’

— मायावती, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष

मायावती ने यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कही. इसी ट्वीट से उन्होंने यह भी कहा, ‘अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण पर आरएसएस बहस की बात कर रही है. उसका यह बयान संदेह की स्थिति पैदा करता है.’ मायावती ने आगे कहा, ‘आरक्षण एक मानवतावादी संवैधानिक व्यवस्था है जिससे छेड़छाड़ करना अनुचित और अन्याय जैसा होगा.’ इससे पहले इसी रविवार को मोहन भागवत ने आरक्षण पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में विचार-विमर्श जरूरी बताया था.

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‘भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती निश्चय ही चिंताजनक है.’

— रघुराम राजन, रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर

रघुराम राजन ने यह बात एक इंटरव्यू के दौरान कही. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘सरकार को बिना किसी देरी के गैर बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र की समस्याएं सुलझानी चाहिए और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में बढ़ना चाहिए.’ इस मौके पर उन्होंने पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमण्यम के शोध निबंध का हवाला देते हुए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना के तरीके पर नए सिरे से गौर करने का सुझाव भी दिया. उन्होंने कहा, ‘निजी क्षेत्र के विश्लेषकों ने भी आर्थिक वृद्धि को लेकर अनुमान लगाए हैं जिनमें से कई अनुमान संभवत: सरकार के अनुमानों से काफी नीचे हैं.’

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‘अगर आप आश्चर्य में है कि कश्मीर में क्या हो रहा है तो कृपया समझें कि वह नई तरह से ‘सामान्य’ है.’

— पी चिदंबरम, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता

पी चिदंबरम ने यह बात एक ट्वीट के जरिये जम्मू-कश्मीर में लगी पाबंदियों को लेकर केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कही. इसी ट्वीट से उन्होंने यह भी कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में स्कूल खुले हैं पर कोई विद्यार्थी नहीं है. इंटरनेट सेवाएं एक बार फिर बंद कर दी गई हैं. महबूबा मुफ्ती की बेटी नजरबंद है. जब वह इसकी वजह पूछती हैं तो सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिलता.’

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‘अगर कमेटी कहेगी कि राजनीति छोड़ दो, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा.’

— भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह बात दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा, ‘राजनीति में मेरे भविष्य का फैसला 25 सदस्यों वाली एक समिति करेगी. इसके सदस्यों को चुनने के लिए एक बैठक आयोजित होगी और एक-दो दिन में इस समिति का गठन भी कर दिया जाएगा.’ इससे पहले इसी रविवार कांग्रेस की राय से इतर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने धारा 370 के ज्यादातर प्रावधानों के हटाए जाने का समर्थन किया था. साथ ही यह भी कहा था कि कांग्रेस ‘भटक’ गई है और यह पहले वाली पार्टी नहीं रह गई है.

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‘कांग्रेस ने देश में लोकतंत्र को मजबूत रखा जिसकी वजह से ही नरेंद्र मोदी आज प्रधानमंत्री हैं.’

— अशोक गहलोत, राजस्थान के मुख्यमंत्री

अशोक गहलोत ने यह बात जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कही. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा, ‘यह गलत धारणा है कि 2014 में मोदी सरकार आने के बाद ही देश में विकास हुआ है. यह सच्चाई है कि देश के विकास और आधुनिकीकरण में कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों ने अहम योगदान दिया है.’ अशोक गहलोत का यह भी कहना था, ‘1970-80 के दशक में धीरे-धीरे चीजें बदलीं. उसी दौरान देश में कम्प्यूटर युग शुरुआत हुई जो कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सोच का परिणाम है.’

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