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सामान्य आरक्षण पर 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सहित आज के अखबारों की पांच बड़ी खबरें

द टाइम्स ऑफ इंडिया | द हिंदू | द इंडियन एक्सप्रेस | अमर उजाला | दैनिक जागरण

ब्यूरो | 29 मार्च 2019 | फोटो: विकीमीडिया कॉमन्स

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मेरी सरकार ने हर क्षेत्र में सर्जिकल स्ट्राइक की : नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को विपक्षी दलों को एक बार फिर निशाने पर लिया. साथ ही, उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक मेरठ में एक रैली में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इस चौकीदार की सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइकें करने की हिम्मत दिखाई. भारत को विकसित होना चाहिए और दुश्मनों से सुरक्षित रहना चाहिए.’ नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, ‘जमीन हो, आसमान हो या अंतरिक्ष हो, मेरी सरकार ने हर क्षेत्र में सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस दिखाया है.’ वहीं, कांग्रेस की प्रस्तावित ‘न्याय’ योजना पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग बैंक खाते नहीं खोल सके वे उनमें सीधे पैसे भेजने की बात कर रहे हैं.’

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देशभर के 100 से अधिक फिल्मकारों ने भाजपा को वोट न करने की अपील की

देशभर के 100 से अधिक फिल्मकारों ने लोगों से इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट न करने की अपील की है. इनमें आनंद पटवर्धन, एसएस शशिधरन और कबीर सिंह चौधरी शामिल हैं. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक इन फिल्मकारों का कहना है कि भाजपा के शासन में ध्रुवीकरण और नफरत की राजनीति में बढ़ोतरी हुई है. उनका यह भी कहना है कि मुसलमानों-दलितों-किसानों को हाशिए पर डाल दिया गया है. इनका यह भी आरोप है कि मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) और गौरक्षा के जरिए देश को सांप्रदायिक आधार पर तोड़ा जा रहा है.

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आठ अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में सामान्य आरक्षण पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य आरक्षण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के लिए आठ अप्रैल की तारीख तय की है. द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील राजीव धवन ने शीर्ष अदालत को बताया कि सामान्य आरक्षण का फैसला मंडल आयोग मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है. इससे पहले केंद्र सरकार ने 103वें संविधान संशोधन के जरिए सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान लागू किया था.

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दाभोलकर और पानसरे मामले की जांच की गति पर बॉम्बे हाई कोर्ट की नाराजगी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्या की जांच की गति पर नाराजगी जाहिर की है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक हाई कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री के पास इन मामलों का जायजा लेने का वक्त नहीं है. उसने करीब हर जांच में अदालत के दखल की जरूरत को शर्मनाक बताया. न्यायाधीश एमसी धर्माधिकारी की पीठ ने कहा, ‘मुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं? उनके पास गृह सहित 11 विभाग हैं. लेकिन, मामले का जायजा लेने के लिए वक्त नहीं है.’ वहीं, महाराष्ट्र सीआईडी के वकील ने अदालत को बताया कि पानसरे हत्या की जांच करने के लिए अधिकारियों की संख्या दोगुनी कर दी गई है. दूसरी ओर, दाभोलकर हत्याकांड की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई के पास है.

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रफाल मामले से जुड़े कांग्रेस के विज्ञापनों को मंजूरी नहीं

मीडिया प्रमाणीकरण और निगरानी समिति (एमसीएमसी) ने कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई की ओर से बनाए गए रफाल लड़ाकू विमान से जुड़े विज्ञापनों को मंजूरी नहीं दी है. दैनिक जागरण में छपी खबर के मुताबिक समिति ने यह फैसला इस आधार पर लिया है कि रफाल मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. इसके बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस समिति इस मामले को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के सामने उठाने की तैयारी में है. बताया जाता है कि पार्टी ने रफाल मामले पर भाजपा को घेरने के लिए चार विज्ञापन बनाए हैं. इनका प्रसारण टीवी और सोशल मीडिया पर किए जाने की तैयारी थी.

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