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संसद में सरकारी अस्पतालों की बदहाली की गूंज सहित आज के अखबारों की पांच बड़ी खबरें

अमर उजाला | नवभारत टाइम्स | हिंदुस्तान | दैनिक जागरण | द एशियन एज

ब्यूरो | 28 मई 2019 | प्रतीकात्मक फोटो : countercurrents.org

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कमजोर मानसून के चलते खरीफ की फसल की कम बुआई

इस साल कमजोर मानसून लगातार चिंता का विषय बना हुआ है. अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार कमजोर पड़ रहा है. वहीं, मौसम विभाग ने बताया कि बुधवार को खत्म हुए मानसून के लगातार चौथे हफ्ते में 24 फीसदी कम बारिश हुई है. यह आंकड़ा पिछले 50 साल के औसत से काफी कम है. उधर, एक जून से अब तक पूरे देश में औसत से 36 फीसदी कम बारिश हुई है. बताया जाता है कि कमजोर मानसून की वजह से खरीफ की फसल की बुआई बुरी तरह प्रभावित हुई है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 21 जून तक किसानों ने 91 लाख हेक्टेयर भूमि में बुआई की है. यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 12.5 फीसदी कम है.

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असम : पुलिस की गलती के चलते तीन साल तक हिरासत में रहने के बाद महिला रिहा

असम के चिरांग में तीन साल तक एक महिला को विदेशी मानकर हिरासत शिविर में रखे जाने के बाद रिहा कर दिया गया है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि संबंधित महिला गलत पहचान का शिकार हुई है. इससे पहले असम बॉर्डर पुलिस ने इस महिला को हिरासत में लिया था. बताया जाता है कि पुलिस मधुबाला दास नाम की अवैध प्रवासी को ढूंढ रही थी. लेकिन, गलती से उसने मधुमाला मंडल नाम की इस महिला को हिरासत में ले लिया. इन दोनों का संबंध एक ही गांव से है. अब यह बात सामने आई है कि मधुबाला की मौत कई साल पहले हो चुकी थी. इससे पहले इस मामले को प्रशासन के सामने कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाया था.

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उत्तराखंड : बाघों के लिए मैदानी क्षेत्र में संकट की स्थिति, हिमालय की ऊंचाई वाले इलाकों में दिखे

उत्तराखंड के तराई स्थित जंगलों में प्राकृतिक आवास, घूमने के लिए क्षेत्र और आहार की किल्लत के चलते बाघ अब हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में पहुंचने लगे हैं. हिन्दुस्तान में प्रकाशित खबर के मुताबिक राज्य में बाघ आम तौर पर 1,000 फीट से निचले इलाकों में पाए जाते हैं. लेकिन, हिमालय से लगे केदारनाथ और अस्कोट अभयारण्य में बाघ दिखाई देने लगे हैं. वहीं, बाघों के जानकार जीएस कार्की का कहना है, ‘बाघों का पर्वतीय और बर्फीले इलाकों में मिलना कोई नई घटना नहीं है. कैमरा ट्रैप के माध्यम से यह बात पुख्ता हुई है. हम अगर पहले कैमरा लगाते तो ये हमें पहले भी दिख सकते थे. बताया जाता है कि एक बाघ को रहने के लिए 20 किलोमीटर तक का क्षेत्र चाहिए. लेकिन कार्बेट नेशनल पार्क और इससे सटे जंगलों में एक बाघ को पांच किलोमीटर का इलाका भी नहीं मिल पा रहा है.

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केंद्रीय नौकरियों में एसटी के 6955 बैकलॉग पद खाली

युवाओं के बीच बेरोजगारी के संकट के बीच केंद्र सरकार के विभागों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के करीब 7,000 बैकलॉग के पद खाली हैं. दैनिक जागरण के मुताबिक इसकी जानकारी सरकार ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में दी. केंद्र ने बताया कि एसटी की 22,829 बैकलॉग सीटों में से दिसंबर, 2016 तक 15,874 पर नियुक्तियां कर दी गई हैं. इसके बाद 6,955 पदों पर नियुक्ति नहीं हो पाई है. वहीं, सभी आरक्षित वर्गों के लिए खाली पदों के बारे में सरकार का कहना है संबंधित प्राधिकारों और नियोजन एजेंसियों के स्तर से नियुक्तियों की प्रक्रिया जारी है.

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टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने संसद में सरकारी अस्पतालों की बदहाली का मुद्दा उठाया

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद सौगत रॉय ने देश में सरकारी अस्पतालों की बदहाली का मुद्दा गुरुवार को लोकसभा में उठाया. द एशियन एज की खबर के मुताबिक उन्होंने केंद्र सरकार से इनकी स्थिति दुरुस्त करने की मांग की. साथ ही, उन्होंने इन अस्पतालों में बच्चों की मौत का मामला भी उठाया. सौगत रॉय ने बताया कि दिल्ली के कलावती सरण बाल अस्पताल में पिछले छह वर्षों में 6,000 बच्चों की मौत हो चुकी है. वहीं, उन्होंने बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार (एईएस) का मामला भी सदन में उठाया. तृणमूल सांसद ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने इस बारे में संसद में कोई बयान नहीं दिया. एईएस की वजह से बिहार में अब तक आधिकारिक रूप से 150 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.

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