आलोक वर्मा

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आलोक वर्मा के मोदी सरकार पर निशाने सहित आज के अखबारों की पांच बड़ी खबरें

द टाइम्स ऑफ इंडिया | द इंडियन एक्सप्रेस | अमर उजाला | नवभारत टाइम्स | हिंदुस्तान

ब्यूरो | 11 जनवरी 2019 | फोटो: यूट्यूब

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क्या केंद्र सरकार सवर्ण आरक्षण की शर्तों में बदलाव कर सकती है?

केंद्र सरकार द्वारा सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए लाए गए आरक्षण के दायरे में कौन लोग आएंगे, यह अभी तय नहीं हुआ है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने यह बात कही है उन्होंने कहा कि आठ लाख रुपये से कम आय और पांच एकड़ जमीन होने संबंधी मानदंडों पर अंतिम निर्णय लिया जाना अभी बाकी है. रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित विधेयक के नियम तय किए जाने के समय इन दोनों शर्तों में बदलाव किया जा सकता है. हाल ही में संसद ने केंद्रीय शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के प्रावधान वाला एक विधेयक पारित किया है.

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सीबीआई की साख को बर्बाद करने की कोशिशें हो रही थीं, मैंने इसे बचाने की कोशिश की : आलोक वर्मा

पद से हटाए जाने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने पहली प्रतिक्रिया दी है. द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा है कि इस पद पर रहते हुए उन्होंने संस्थान की साख को बचाने की कोशिश की जिसे बर्बाद करने की कोशिशें की जा रही थीं. आलोक वर्मा ने सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का नाम लिए बिना कहा कि एक व्यक्ति द्वारा लगाए गए ‘झूठे, अप्रमाणित और हल्के’ आरोपों के आधार पर उन्हें हटा दिया गया. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एक समिति ने गुरुवार को आलोक वर्मा को सीबीआई के मुखिया के पद से हटा दिया था. इससे एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस पद बहाल किया था. यह विवाद बीते साल शुरू हुआ था जब आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच चल रहा टकराव सार्वजनिक हो गया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने इन दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया था.

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नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर साहित्यकार, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता पर राजद्रोह का मामला

नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करने पर साहित्यकार हीरेन गोहेन, सामाजिक कार्यकर्ता अखिल गोगोई और पत्रकार मंजीत महंत के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है. अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक तीनों आरोपित एनजीओ ‘नागरिक समाज’ के तहत इस विधेयक के खिलाफ अभियान चला रहे थे. इस बारे में गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए राजद्रोह के साथ आपराधिक साजिश (धारा-120बी) और सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या फिर भड़काने से संबंधित धारा-121 व 123 के तहत मामला दर्ज किया गया है. उधर, इस विवादित विधेयक को लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी है. आज असम बंद भी बुलाया गया है.

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एक साथ तीन तलाक पर फिर से अध्यादेश को मंजूरी

केंद्र सरकार ने एक साथ तीन तलाक को लेकर प्रस्तावित कानून के संसद से पारित न होने के बाद इसे अध्यादेश के रूप में लागू करने का फैसला किया है. इससे पहले जारी अध्यादेश की समय-सीमा 22 जनवरी को खत्म हो रही है. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र अब बजट सत्र में फिर से इससे जुड़े विधेयक को संसद में रखने की तैयारी में है. इससे पहले वरीयता सूची में रहने के बाद भी इस विधेयक को राज्य सभा से पारित कराने में सरकार को कामयाबी हासिल नहीं हो पाई थी. इस पर विपक्ष का कहना है कि सरकार इस विधेयक को बिना सबकी सहमति हासिल किए हड़बड़ी में लाई है. संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक अध्यादेश की अवधि छह महीने या फिर संसद सत्र के शुरू होने के छह हफ्ते तक रहती है.

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पूरे देश में 92,000 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून लागू होने के करीब नौ साल बाद भी देश में 92,000 स्कूल एक-एक शिक्षक के कंधों पर हैं. हिन्दुस्तान में प्रकाशित खबर के मुताबिक बीते चार वर्षों में सभी राज्य सरकारों ने कुल मिलाकर केवल 15,000 एकल शिक्षक स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक बहाल करने में कामयाबी हासिल की है. इनमें अकेले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 8,773 है. दूसरी ओर, एकल शिक्षक स्कूल के मामले में मध्य प्रदेश और राजस्थान सभी राज्यों में अव्वल हैं. वहीं, झारखंड में इस तरह के स्कूलों की संख्या घटने की जगह बढ़ रही है. साल 2013 से 2017 के बीच इस राज्य में 973 स्कूलों का इजाफा हुआ है. इसके साथ ही, दिल्ली और उत्तराखंड में भी एकल स्कूल शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है.

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