अरुण जेटली

समाचार | अख़बार

2000 रु के नोटों की छपाई पर सरकार की सफाई सहित आज के अखबारों की पांच बड़ी खबरें

द इंडियन एक्सप्रेस | द इकनॉमिक टाइम्स | अमर उजाला | नवभारत टाइम्स | हिंदुस्तान

ब्यूरो | 05 जनवरी 2019 | फोटो: यूट्यूब

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सरकार के साथ दोस्ती मीडिया के लिए जरूरी नहीं, पर दुश्मनी भी नहीं होनी चाहिए

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि पत्रकारिता लोकतंत्र के स्वास्थ्य की सूचक है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यह जितनी मजबूत होगी लोकतंत्र की सेहत उतनी ही अच्छी रहेगी. राजनाथ सिंह का यह भी कहना था कि सरकार के साथ दोस्ती मीडिया के लिए जरूरी नहीं है, लेकिन दोनों के बीच कोई दुश्मनी भी नहीं होनी चाहिए.

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2000 रु के नोटों की छपाई बंद होने की खबरों पर सरकार की सफाई

केंद्र सरकार ने उन खबरों को खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि 2000 रु के नोटों की छपाई बंद हो गई है. द इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने एक ट्टीट में यह भी कहा कि नोटों की छपाई का फैसला जरूरत के हिसाब से लिया जाता है. उन्होंने कहा कि 2000 रु के नोटों की कोई कमी भी नहीं है. सुभाष चंद्र गर्ग कहना था, ‘इस समय जितनी भी मुद्रा प्रचलन में है उसमें 2000 रु के नोट 35 फीसदी से भी ज्यादा हैं.’ 2000 के नए नोट को नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद लाया गया था.

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बांग्लादेश : सत्ताधारी आवामी लीग की सहयोगी पार्टी को अब विपक्ष की भूमिका

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में लोकतांत्रिक ढांचे का एक नया ही रूप सामने आ रहा है. शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की फिर से सरकार बनने के बाद विपक्ष के स्तर पर भी उसे राहत मिलती हुई दिख रही है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक सत्ताधारी पार्टी की प्रमुख सहयोगी जातीय पार्टी ही अब विपक्ष की भूमिका में नजर आएगी. बताया जाता है कि बांग्लादेश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बीएनपी द्वारा चुनावी नतीजों को अस्वीकार करने के कारण इस पार्टी ने विपक्ष की भूमिका में आने का फैसला किया है. हालांकि, इसके लिए पार्टी अब अवामी लीग की अगुवाई वाले गठबंधन से अलग होगी.

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सिविल सेवा परीक्षा के उम्मीदवार को अपना आवेदन रद्द करने का मौका

सिविल सेवा परीक्षा के उम्मीदवारों को परीक्षा की तारीख से तीन महीने पहले अपना आवेदन रद्द करने का मौका दिया जाएगा. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक यदि कोई उम्मीदवार आवेदन करने के बाद परीक्षा नहीं देना चाहता तो वह अपने फॉर्म से जुड़ी जानकारी संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को देगा. इसके बाद उसे वन टाइम पासवर्ड हासिल (ओटीपी) हासिल होगा. इसके बाद वह अपना आवेदन खारिज कर सकता है. बताया जाता है कि आयोग ने यह फैसला संसाधनों की बर्बादी रोकने के लिए उठाया है. फिलहाल स्थिति यह है कि कुल आवेदन करने वालों मेें से आधे उम्मीदवार ही इस परीक्षा में बैठते हैं. वहीं, यूपीएससी को सभी उम्मीदवारों के लिए व्यवस्था करनी पड़ती है.

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा – ‘सितंबर, 2018 से अब तक लोकपाल खोज समिति को लेकर क्या किया?’

सुप्रीम कोर्ट ने लोकपाल गठन के मामले में केंद्र सरकार से जवाब-तलब किया है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने केंद्र को सितंबर, 2018 से अब तक लोकपाल खोज समिति के संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी 17 जनवरी, 2019 तक देने को कहा है. वहीं, शीर्ष अदालत में केंद्र की ओर अटॉर्नी जनरल ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि इसके लिए अब तक कई कदम उठाए गए हैं. उधर, इस मामले में याचिका दायर करने वालेे एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा है कि सरकार की ओर से खोज समिति के सदस्यों के नाम भी वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए गए हैं.

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