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गरीब रथ ट्रेनों को बंद किए जाने के प्रस्ताव से रेल मंत्रालय के इनकार सहित आज के अखबारों की बड़ी खबरें

रेल मंत्रालय | एनआरसी | भाजपा | मायावती | क्रिकेट

ब्यूरो | 20 जुलाई 2019 | फोटो: पिक्साबे

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गरीब रथ हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं : रेल मंत्रालय

रेल मंत्रालय ने शुक्रवार को साफ किया है कि गरीब रथ ट्रेनों को हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक इससे पहले इन किफायती वातानुकूलित ट्रेनों का परिचालन बंद करने की खबरें आई थीं. रेल मंत्रालय ने यह भी कहा है कि काठगोदाम-जम्मू और काठगोदाम-कानपुर रेल मार्गों पर भी गरीब रथ ट्रेनों को मेल या एक्सप्रेस गाड़ियों से बदलने का फैसला वापस ले लिया गया है. मंत्रालय की मानें तो चार अगस्त से इन मार्गों पर फिर से इन ट्रेनों का परिचालन शुरु किया जाएगा. दूसरी ओर, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्रेनों में फ्लेक्सी किराया योजना को खत्म करने से इनकार किया है. उन्होंने कहा है कि इससे रेलवे को अधिक राजस्व हासिल हुआ है.

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बांग्लादेश के सीमावर्ती जिलों में लाखों लोगों को एनआरसी में शामिल किया गया : केंद्र सरकार

केंद्र और असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को प्रकाशित किए जाने की समय-सीमा (31 जुलाई) में बढ़ोतरी की मांग की है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक उनका कहना है कि बांग्लादेश के सीमावर्ती जिलों में अधिकारियों की मिलीभगत से लाखों लोगों को एनआरसी में शामिल किया गया है जबकि कई पात्र लोगों को बाहर रखा गया है. केंद्र ने आगे शीर्ष अदालत से इसका पता लगाने के लिए 20 फीसदी नमूना सर्वेक्षण के सत्यापन की मांग की है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ का कहना है, ‘एनआरसी समन्वयक की रिपोर्ट से साफ है कि 27 फीसदी लोगों का फिर से सत्यापन हुआ है. आप 20 फीसदी का सत्यापन चाहते हैं. क्या इसकी जरूरत है?’ इसके बाद केंद्र ने इस रिपोर्ट में चूक होने की आशंका जताई है. लेकिन, पीठ ने समन्वयक की रिपोर्ट पर ध्यान देने को कहकर सुनवाई 23 जुलाई तक टाल दी.

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भाजपा के नए अध्यक्ष का चुनाव कराने की जिम्मेदारी राधामोहन सिंह को सौंपी गई

भाजपा के नए अध्यक्ष का चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद राधामोहन सिंह को सौंपी गई है. दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी नियुक्त किया है. साथ ही, उत्तर प्रदेश के सांसद विनोद सोनकर, महाराष्ट्र के पूर्व सांसद हंसराज गंगाराम अहीर और कर्नाटक के विधायक सीटी रवि को सह-चुनाव अधिकारी बनाया गया है. बताया जाता है कि अगले दो महीनों में राज्यों में पार्टी संगठन चुनाव का काम शुरू हो जाएगा. इसके बाद दिसंबर तक राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी होगी. इससे पहले राधामोहन सिंह संगठन में सदस्यता अभियान के संयोजक की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. वे पार्टी अनुशासन समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं.

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मायावती ने भाजपा पर गरीबों का वोट खरीदने का आरोप लगाया

बसपा प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है. साथ ही, उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार के खिलाफ आयकर विभाग की कार्रवाई की निंदा भी की. राजस्थान पत्रिका के मुताबिक मायावती ने कहा, ‘केंद्र की बीजेपी सरकार के इन हथकंडों के सामने बसपा डरने और झुकने वाली नहीं है. भाजपा अपने विपक्षियों को साजिश के तहत जबरन फर्जी मामलों में फंसाकर उन्हें प्रताड़ित कर रही है.’ उन्होंने आगे कहा कि इस क्रम में उनके भाई सहित पूरे परिवार को परेशान किया जा रहा है. वहीं, बसपा सुप्रीमो ने भाजपा पर लोकसभा चुनाव में गरीबों के वोट खरीदने का भी आरोप लगाया. मायावती ने आगे कहा, ‘चुनाव के दौरान बीजेपी के खाते में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक आए लेकिन, उसने इसका अब तक खुलासा नहीं किया कि इतनी मोटी रकम कहां से आई.’ उन्होंने इसकी जांच की मांग की है.

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सीओए ने कोहली और रवि शास्त्री को खिलाड़ियों की पत्नी-प्रेमिकाओं की यात्राओं का हिसाब रखने को कहा

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का कामकाज देखने के लिए नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) का एक फैसला नए विवाद को जन्म देता हुआ दिख रहा है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक सीओए ने टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री से खिलाड़ियों की पत्नी और प्रेमिकाओं की यात्राओं का हिसाब रखने को कहा है. साथ ही, समिति ने इन दोनों से विदेशी दौरों का रिकॉर्ड भी मांगा है. बताया जाता है कि इससे पहले यह काम क्रिकेट बोर्ड का था. इस फैसले पर पूर्व न्यायाधीश आरएम लोढ़ा ने हैरानी जताई है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में बोर्ड के लोकपाल को ही कोई फैसला करना चाहिए. सीओए का गठन जस्टिस लोढ़ा के निर्देश पर ही किया गया था. वहीं, बीसीसीआई के एक अधिकारी का कहना है कि कोच और कप्तान को इस तरह के अधिकार देना सीधे तौर पर हितों का टकराव है.

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