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दो बच्चों की मौत के मामले में आसाराम को क्लीनचिट मिलने सहित आज के अखबारों की बड़ी खबरें

धर्मगुरु आसाराम | वाट्सएप | लोकसभा | सुप्रीम कोर्ट | निर्भया कोष

ब्यूरो | 27 जुलाई 2019 | फोटो: फ्लिकर

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न्यायाधीश डीके त्रिवेदी आयोग से आसाराम और नारायण साई को क्लीन चिट

न्यायाधीश डीके त्रिवेदी आयोग ने कथित धर्मगुरु आसाराम और उसके बेटे नारायण साई को दो बच्चों की मौत के मामले में क्लीनचीट दे दी है. जनसत्ता की खबर के मुताबिक शुक्रवार को आयोग की रिपोर्ट गुजरात विधानसभा में पेश की गई. इससे पहले साल 2013 में आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी. इस रिपोर्ट में आयोग ने कहा है कि इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि आरोपित पिता-पुत्र आश्रम में तांत्रिक क्रिया करते थे. आयोग ने इसके लिए आरोपितों द्वारा संचालित आवासीय स्कूल के प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदारी ठहराया है. दो बच्चों की मौत का यह मामला साल 2008 का है. इन बच्चों का शव पांच जुलाई को साबरमती नदी के किनारे मिला था. इससे दो दिन पहले ये छात्रावास से लापता हो गए थे.

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सरकार वाट्सएप के आपत्तिजनक मैसेज तलाश करने का तरीका विकसित करने पर जोर देगी : रविशंकर प्रसाद

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि सरकार वाट्सएप के आपत्तिजनक मैसेज तलाश करने का तरीका विकसित करने पर जोर देगी. केंद्रीय मंत्री का मानना है कि कई बार आतंकी संगठन और असामाजिक तत्व अपने नापाक मकसद को पूरा करने के लिए इसका दुरुपयोग करते हैं. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक रविशंकर प्रसाद ने व्हाट्सएप के ग्लोबल हेड विल कैथकार्ट से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने कहा कि कंपनी के शीर्ष अधिकारी ने इस बारे में कदम उठाने को लेकर आश्वासन दिया है. केंद्रीय मंत्री ने विल कैथकार्ट से शिकायतों के समाधान के लिए भारत में अधिकारी नियुक्त करने की भी मांग की. उन्होंने बताया कि वाट्सएप ने देश में अपना एक कार्यालय बनाया है. इससे पहले सरकार ने कंपनी से इसकी मांग की थी.

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विपक्ष ने विधेयकों को संसदीय समिति की समीक्षा के बिना पारित किए जाने पर चिंता जताई

विपक्ष ने केंद्र सरकार द्वारा अलग-अलग विधेयकों को संसदीय समिति की समीक्षा के बिना पारित कराने पर चिंता जताई है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक विपक्षी दलों के 17 नेताओं ने इस संबंध में राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को एक पत्र लिखा है. इसमें सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह संसदीय परंपराओं की अवहेलना कर जल्दबाजी में विधेयक पारित करवा रही है. इस पत्र में आगे कहा गया है कि अहम विधेयकों को संसद की स्थायी और प्रवर समितियों के पास भी नहीं भेजा जा रहा. इससे पहले गुरुवार को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में पेश किए गए विधेयकों का अध्ययन करने और इस पर अपना विचार बनाने के लिए वक्त न मिलने की शिकायत की थी. इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष को भरोसा दिया कि अगले सत्र से वे प्रस्तावित विधेयकों को सदन में पेश होने से दो दिन पहले सांसदों के पास पहुंचाने की कोशिश करेंगे.

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उन्मादी भीड़ की हिंसा से निपटने के लिए अपने निर्देशों का पालन न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के साथ 11 राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया

उन्मादी भीड़ की हिंसा से निपटने के लिए अपने निर्देशों का पालन न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के साथ 11 राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है. ये राज्य हैं -उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, हरियाणा, दिल्ली, असम, जम्मू-कश्मीर, गुजरात और पश्चिम बंगाल. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने यह नोटिस एंटी करप्शन काउंसिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट की याचिका पर जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके अलावा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी नोटिस जारी किया है. इससे पहले 17 जुलाई, 2018 को शीर्ष न्यायपालिका ने उन्मादी भीड़ की हिंसा को रोकने के लिए राज्यों को निर्देश जारी किए थे. उसने इस बारे में केंद्र सरकार को नया कानून बनाने को भी कहा था.

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निर्भया कोष से आवंटित रकम और इसके खर्च में बड़ा अंतर : केंद्र सरकार

देश में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए निर्भया कोष का इस्तेमाल न के बराबर हो रहा है. दैनिक जागरण के मुताबिक इसकी जानकारी महिला और बाल कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी ने शुक्रवार को संसद को दी. उन्होंने बताया कि निर्भया फंड से जुड़े कई काम या तो प्रगति पर हैं या फिर उनका कोई काम शुरू ही नहीं हुआ है. स्मृति ईरानी ने आगे कहा कि महिला सुरक्षा के लिए इस कोष से आवंटित रकम और खर्च किए गए पैसे में काफी बड़ा अंतर है. केंद्रीय मंत्री की मानें तो मार्च, 2018 में दिल्ली सहित सात राज्यों की राजधानियों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के मकसद से इस फंड से 2,840 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई. हालांकि, अब तक इसमें से केवल 734 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. केंद्र सरकार द्वारा हर साल इस फंड के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाते हैं.

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