ह्यूंदेई एल्कजार

खरा-खोटा | ऑटोमोबाइल

क्या एल्कजार भारत में ह्यूंदेई को वह कामयाबी दे पाएगी जिसका इंतजार उसे ढाई दशक से है?

भारत में ह्यूंदेई को ढ़ाई दशक हो चुके हैं लेकिन उसकी कामयाबी की गाड़ी क्रेटा वाले सेगमेंट से आगे नहीं बढ़ सकी है

ब्यूरो | 19 जून 2021 | फोटो: www.hyundai.com

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स्पेसिफिकेशंस

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खूबियां

6/7 सीटर एल्कजार को ह्यूंदेई क्रेटा का बड़ा भाई कहा जा रहा है. यह इस कार के हेडलैंप्स डिजाइन से लेकर इंटीरियर लेआउट तक कई मामलों में साफ दिखता भी है. दूसरे शब्दों में कहें तो देखने में एल्कजार भी क्रेटा की तरह एक नई डिजाइन शैली की कार है. एल्कजार स्पेनी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है महल. 2760 एमएम के सेगमेंट लीडिंग व्हीलबेस और 180 लीटर के बेस्ट इन क्लास बूटस्पेस को देखें तो कहा जा सकता है कि यह गाड़ी अपने नाम को सही साबित करती दिखती है. गाड़ी का डीजल वेरिएंट तो क्रेटा वाले और बेहद लोकप्रिय 1.5 सीआरडीआई इंजन के साथ ही पेश किया गया है, लेकिन पेट्रोल वेरिएंट के लिए ह्यूंदेई क्रेटा से अलग 2.0 लीटर का नेचरली एस्पिरेटेड इंजन लेकर आई है. 191 न्यूटनमीटर के शानदार टॉर्क के साथ यह नया इंजन ड्राइविंग के शौकीनों को खूब लुभाएगा. बाकी फीचर्स के मामले में ह्यूंदेई काफी समय से दूसरों से इक्कीस साबित होती रही है और यह एल्कजार के मामले में भी देखा जा सकता है. वॉयस एनेबल्ड स्मार्ट पैनॉरमिक सनरूफ हो या वेंटिलेटेड सीट्स या फिर 10.25 इंच टचस्क्रीन वाला बोस का प्रीमियम साउंड सिस्टम, ह्यूंदई के मुताबिक उसने हर मोर्चे पर यह ध्यान रखा है कि ग्राहकों के लिए एल्कजार एक बेहतरीन अनुभव साबित हो.

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खामियां

क्रेटा से 150 एमएम ज्यादा लंबी एल्कजार चौड़ाई के मामले में अपने छोटे भाई के बराबर ही है. इसलिए इसे चला चुके कुछ समीक्षकों का कहना है कि इसके 7 सीटर वर्जन में भी सात के बजाय छह लोग ही आराम से बैठ पाएंगे. इन जानकारों के मुताबिक ह्यूंदेई को एल्कजार की चौड़ाई भी थोड़ा बढ़ानी चाहिए थी. खासी लंबी होने के बावजूद प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले इस कार की सबसे पिछली सीटें बच्चों के लिए ही ज्यादा सही हैं और बड़े उनमें बस किसी तरह काम ही चला सकते हैं, वह भी छोटी ट्रिप्स पर. इसके अलावा पेट्रोल कारों में भी टर्बोचार्ज्ड इंजन अब खूब इस्तेमाल होने लगे हैं और मिडरेंज में टर्बो की तेज लहर का स्वाद चख चुके लोगों को एल्कजार के पेट्रोल वेरिएंट का नेचरली एस्पिरेटेज इंजन थोड़ा निराश कर सकता है. हालांकि दम के मामले में यह किसी से कम नहीं है और इसका अंदाजा आप इससे भी लगा सकते हैं कि सिर्फ 9.5 सेकेंड में जीरो से 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ने में सक्षम एल्कजार इस मामले में पेट्रोल इंजन वाली अपने सेगमेंट की दूसरी सारी कारों को पीछे छोड़ती है. कुछ जानकारों को हैंडलिंग भी एल्कजार का एक कम मजबूत पक्ष लगती है जो स्पोर्टी से ज्यादा कंफर्ट की तरफ झुकी है. इस वजह से कई लोगों को यह कार इसके प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कम फुर्तीली लग सकती है.

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विकल्प

ह्यूंदेई की एल्कजार का मुकाबला टाटा सफारी, एमजी हेक्टर प्लस और महिंद्रा एक्सयूवी 500 से है. कई जानकारों के मुताबिक रोड प्रेजेंस और राइड कंफर्ट के मामले में सफारी सब पर भारी है और इसलिए बिक्री के मामले में वह इस सेगमेंट में शीर्ष पर बनी हुई है. पॉवर और रिफाइनमेंट के मामले में हेक्टर प्लस भी बहुतों को पसंद आ रही है. महिंद्रा की सबसे ज्यादा बिकने वाली गाड़ियों में शामिल रही एक्सयूवी 500 जल्द ही बिल्कुल नए रूप में आने वाली है. यानी एल्कजार जिस मैदान में उतर रही है वहां मुकाबला कड़ा है.

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खरा या खोटा?

ह्यूंदेई ने 2015 में क्रेटा लॉन्च की थी. तब से अब तक वह इस कार की छह लाख से ज्यादा यूनिट्स बेच चुकी है. ह्यूंदेई मोटर इंडिया के डायरेक्टर (सेल्स, मार्केटिंग एंड सर्विस) तरुण गर्ग ने हाल ही में कहा था कि कंपनी की रिसर्च के मुताबिक इनमें से बहुत से ग्राहक ऐसे हैं जो जिंदगी में काफी तरक्की कर चुके हैं और अब अपनी कार अपग्रेड करना चाहते हैं. ह्यूंदेई की नजर इन्हीं पर है. तरुण गर्ग का कहना है कि एल्कजार में लक्जरी, वर्सेटैलिटी और यूटिलिटी का आदर्श मेल है जिसकी वजह से हर मिजाज के ग्राहक इसे पसंद करेंगे. भारत में ह्यूंदेई को ढ़ाई दशक हो चुके हैं और सफलता के कई झंडे गाड़ चुकी यह कंपनी आज भारतीय कार बाजार में दूसरी सबसे बड़ी खिलाड़ी है. लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी कामयाबी की गाड़ी क्रेटा वाले सेगमेंट से आगे नहीं बढ़ सकी है. टेरक्कन से लेकर सेंटाफे, ट्यूसॉन और एलांट्रा तक उसके कई महंगे मॉडल कुछ खास नहीं कर सके. देखना दिलचस्प होगा कि एल्कजार इस सिलसिले को तोड़ पाती है या नहीं.

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