बाल ठाकरे की भूमिका में नवाजुद्दीन सिद्दीकी

खरा-खोटा | सिनेमा

पांच बातें जो ‘ठाकरे’ का ट्रेलर इस फिल्म के बारे में कहता है

शिव सेना के संस्थापक बाल ठाकरे के जीवन पर आधारित ‘ठाकरे’ में उनकी भूमिका नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने निभाई है

ब्यूरो | 27 दिसंबर 2018

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सोशल मीडिया पर ‘ठाकरे’ से जुड़ी चर्चाओं में सबसे ज्यादा जिक्र इस बात का रहा कि इसमें मुख्य भूमिका एक उत्तर भारतीय-मुसलमान अभिनेता निभाई है. शिव सेना और बाल ठाकरे की राजनीति हमेशा हिंदूवादी और मराठियों को वरीयता देने-दिलाने पर आधारित रही है, इसलिए इस संयोग पर सवाल उठना स्वाभाविक ही है. इस पर कई लोगों की राय यह भी रही कि इसके बहाने फिल्म के निर्माता और शिव सेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत कुछ राजनीतिक समीकरण भी साध लेना चाहते हैं.

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करीब तीन मिनट की लंबाई वाला यह ट्रेलर ज्यादातर वक्त दंगे और राजनीतिक उथल-पुथल मचते हुए दिखाता है. इसके जरिए यह बाल ठाकरे की राजनीतिक ताकत और लोकप्रियता की झलक दिखाने की कोशिश करता है. यहां पर ट्रेलर धमाधम बजते संगीत और कुछ दिलचस्प संवादों के बीच शिव सेना के बनने और बाल ठाकरे के राजनीति सफर की कहानी दिखाने का वादा भी कर जाता है.

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इन झलकियों में ठाकरे के जबरदस्त किरदार के अलावा टाइगर है, भगवा और हरा झंडा है, ‘योंडू-गोंडू’ से उलझता मराठी मानुष है, यहां तक कि थोड़ा सा पाकिस्तान और सीमा पर लड़ते जवान भी हैं. यह सबकुछ न सिर्फ किसी पॉलिटिकल थ्रिलर के लिए बल्कि देश में पॉलिटिकल थ्रिल लाने के लिए काफी हो सकता है. कहा जा सकता है कि ‘ठाकरे’ न सिर्फ राजनीति पर आधारित है बल्कि शिव सेना की राजनीति का आधार मजबूत करने का काम भी भरपूर कर सकती है.

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अभिनय पर आएं तो बाल ठाकरे की भूमिका में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने उनका चेहरा हूबहू अपनाया है. लेकिन बोली और देहबोली को अपनाने में वे पूरी तरह से चूक गए हैं, यह बात ट्रेलर आपको खुलकर बता देता है. ठाकरे, जिनका व्यक्तित्व ढेर सारी ठसक, लबालब आत्मविश्वास और अनोखे स्टाइल के लिए जाना जाता है, उसे नवाज ट्रेलर की इन झलकियों में नहीं दिखा पाए हैं. इसके अलावा फिल्म में उनका मराठीनिष्ठ हिंदी उच्चारण न अपनाना भी यहां पर खटकता है.

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‘ठाकरे’ की फटाफट भागती इन झलकियों में अलग-अलग दौर की झलक मिलती है और इन्हें इस तरह रचा गया है कि आसानी से पहचाना जा सकता है. गुजरे वक्त की झलक के लिए भी फिल्म का टिकट बुक किया जा सकता है. बाकी ‘ठाकरे’ बाल ठाकरे के जीवन से कितना रोमांच, कितना मनोरंजन और कितना सच-झूठ निकालकर परदे पर लाती है, इसका पता तो 25 जनवरी को फिल्म रिलीज होने के साथ ही चलेगा.

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