अंधा कानून में रजनीकांत, अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी

खरा-खोटा | जन्मदिन

रजनीकांत की पहली हिंदी फिल्म ‘अंधा कानून’ देखकर कौन सी पांच बातें दिमाग में आती हैं

साल 1983 में रिलीज हुई, रजनीकांत की हिंदी डेब्यू फिल्म ‘अंधा कानून’ में अमिताभ बच्चन मेहमान भूमिका में नजर आए थे

ब्यूरो | 13 दिसंबर 2018

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रजनीकांत ने हिंदी फिल्मों में साल 1983 में रिलीज हुई ‘अंधा कानून ’से एंट्री की थी. यह फिल्म सुपरहिट तमिल फिल्म ‘सत्तम ओरू इरुत्तराई’ का हिंदी रीमेक थी. इससे पहले करीब आठ साल के अपने फिल्मी करियर में रजनीकांत कई सफल तमिल और तेलुगु फिल्में दे चुके थे और तीन राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीत चुके थे. शायद यही वजह थी कि अमिताभ बच्चन जैसे सुपरस्टार ने भी अंधा कानून में गेस्ट अपीयरेंस करना स्वीकार कर लिया था.

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रजनीकांत ने ही दक्षिण भारतीय फिल्मों में अविश्वसनीय एक्शन और कविताई संवाद बोलने का चलन शुरू किया था, जो आज भी कायम है. अंधा कानून के जरिये उत्तर भारत में भी न सिर्फ उनका स्टाइल बल्कि वे गॉगल्स भी खासे डिमांड में आ गए, जो उन्होंने फिल्म में पहने थे. इस फिल्म के कुछ दृश्यों में रजनीकांत का ब्लैक लेदर जैकेट और ब्लैक गॉगल्स वाला लुक, आपको रोबोट फ्रेंचाइज की फिल्मों में नज़र आने वाले चिट्टी – द रोबो की याद भी दिला देता है.

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फिल्म में रजनीकांत के किरदार पर आएं तो उन्हें विजय यानी वह नाम दिया गया था जो सबसे ज्यादा बार अमिताभ बच्चन का स्क्रीन नेम रहा था. देखा जाए तो अकेला यह नाम ही उनके कंधों पर ढेर सारा बोझ लादने के लिए काफी था. उस पर फिल्म में अमिताभ बच्चन खुद भी मौजूद थे और उनके अलावा हेमा मालिनी और रीना रॉय जैसी अभिनेत्रियां भी थीं. इनके भारी-भरकम सितारा कद के बावजूद फिल्म में एक भी ऐसा दृश्य नहीं जिसमें रजनीकांत जरा भी साइड में चले गए हों.

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नायकत्व के जिस ग्रे-शेड को क्रांतिकारी बताते बॉलीवुड आज अघाता नहीं है, रजनीकांत ने ‘अंधा कानून’ में वही शेड अपनाया था. फिल्म में वे इस बात के लिए पूरी तरह कॉन्फिडेंट नज़र आते हैं कि वे जो भी कर रहे हैं, उसे जस्टिफाई करने की जरा भी जरूरत नहीं है. इससे पहले भी, रिवेंज फिल्मों में इस तरह की कहानियां दिखाई जाती रही थीं, लेकिन उनमें नायक के अपराधी बनने को जस्टिफाई करने का दबाव हमेशा नज़र आता था.

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डेब्यू करने वाले किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह होती है कि बड़े नामों के आगे भी दर्शक यह न भूलें कि फिल्म का नायक वह है. रजनीकांत ने पूरी फिल्म में यह बात याद रखवाने में पूरी सफलता हासिल की थी. उनका यह मिज़ाज आज भी कायम है. यही वजह है कि सालों-साल उनकी फिल्मों की टिकटें असल से कई गुना अधिक कीमत में बिकती आई हैं. नवंबर 2018 में रिलीज हुई ‘2.0’ की टिकटों की कीमत तो लगभग 1600 रुपए तक पहुंच गई थी. वह भी तब जब आलोचकों ने भर-भरकर इस फिल्म की बुराइयां लिखी थीं. ऐसी ही ढेर सारी खासियतें मिलकर रजनीकांत को थलाइवा बनाती हैं. थलाइया यानी ‘बॉस.’

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