निसान मैग्नाइट

खरा-खोटा | ऑटोमोबाइल

क्या मैगनाइट बाजार को भाएगी और निसान की नैया पार लगाएगी?

भारत में करो या मरो की स्थिति में पहुंच गई निसान ने मैगनाइट से काफी उम्मीदें लगा रखी हैं

ब्यूरो | 24 नवंबर 2020 | फोटो: nissan.in

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स्पेसिफिकेशंस

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खूबियां

मैगनाइट बाहर से भी खूबसूरत दिखती है और भीतर से भी. निसान ने बड़ी ग्रिल, क्रोम और शार्प लाइन्स का मेल कुछ इस तरह से किया है कि बहुत से लोग गाड़ी को मुड़-मुड़कर देखेंगे. भीतर से भी मैगनाइट अपने सेगमेंट की दूसरी गाड़ियों के मुकाबले ज्यादा खुली-खुली लगती है. यह इस लिहाज से अहम है कि कॉम्पैक्ट एसयूवी गाड़ियों में पिछली सीट तंग होने की शिकायत आम होती है. लेकिन मैगनाइट में ऐसा नहीं है. और जो बात इसे और भी खास बनाती है वह यह है कि पिछली सीट पर अच्छा-खासा लेगरूम होते हुए भी बूट स्पेस में कोई कमी नहीं है, जैसा कि अमूमन दूसरे सब कॉम्पैक्ट एसयूवीज में होता है. इसमें मौजूद 360 डिग्री कैमरे का फीचर इस सेगमेंट में किसी दूसरी गाड़ी में नहीं मिलता. साथ ही प्रतिस्पर्धियों के उलट मैगनाइट में रियर वाइपर बेस मॉडल से ही मिल जाता है. गाड़ी में स्टोरेज स्पेस भी खूब है. 98 हॉर्स पॉवर और 160 न्यूटन मीटर की ताकत वाला मैगनाइट का टर्बो इंजन ड्राइविंग के शौकीनों को खूब भाएगा. दूसरा विकल्प यानी 70 हॉर्स पॉवर और 96 न्यूटन मीटर की ताकत वाला इसका नेचुरली एसपिरेटेड इंजन भी रोजमर्रा की ड्राइविंग के लिहाज से ठीक-ठाक है. मैगनाइट का सस्पेंशन थोड़ा सख्तमिजाज है जो तेज रफ्तार के समय गाड़ी की हैंडलिंग बेहतर बनाता है.

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खामियां

निसान मैगनाइट की खामियों में सबसे पहले इसकी बिल्ड क्वालिटी को रखा जा सकता है. इसकी समीक्षा करने वाले ज्यादातर जानकारों का कहना है कि इसमें काफी हार्ड प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया है जिसकी गुणवत्ता का अंदाजा इससे भी हो जाता है कि यह थोड़ा सा जोर डालने पर ही पिचकता दिखता है. इस कार की सीटें भी सैगमेंट की दूसरी गाड़ियों की तुलना में कमतर हैं और समीक्षकों के मुताबिक ये इतनी आरामदेह नहीं हैं जितनी होनी चाहिए थीं, यानी इनमें पर्याप्त कुशनिंग नहीं है. साथ ही, अपने तीन सिलेंडर वाले इंजन के चलते मैगनाइट एनवीएच (नॉइज़, वाइब्रेशन और हार्शनेस यानी शोर, कंपन और कठोरता) के मोर्चे पर चार सिलेंडर और बेहतर बिल्ड क्वालिटी वाले अपने दूसरे प्रतिस्पर्धियों से उन्नीस ठहरती है. सनरूफ जैसा फीचर भी इससे गायब है जो आजकल काफी ग्राहकों को अपनी तरफ खींच रहा है. मैगनाइट को लेकर एक आशंका सर्विस और स्पेयर पार्ट्स की भी हो सकती है. काफी कोशिशों के बावजूद निसान की माइक्रा, सन्नी, टिएना और टेरेनो जैसी गाड़ियां खास नहीं बिक सकीं और इन्हें बंद करना पड़ा. इसके बाद कंपनी ने अपने एसयूवी किक्स से उम्मीदें लगाई थीं, लेकिन क्रेटा, सेल्टॉस और डस्टर जैसे प्रतिद्वंदियों के सामने वह कहीं नहीं टिक पा रही. ऐसे में निसान के सर्विस सेंटरों का खास विस्तार नहीं हो सका है और यह बात भी ग्राहकों को मैगनाइट से दूर कर सकती है.

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विकल्प

सब कॉम्पेक्ट सेगमेंट में पहले से ही भयानक जंग मची पड़ी है. हर खिलाड़ी अपनी-अपनी खूबियों के साथ केक का सबसे बड़ा हिस्सा हासिल करने की जुगत में लगा है. जानकारों के मुताबिक इस सेगमेंट में बेहतर बिल्ड क्वालिटी चाहने वालों के लिए टाटा की नेक्सन और फोर्ड की इकोस्पोर्ट बेहतर विकल्प है. उधर, टर्बो इंजन की बात करें तो बहुत से जानकार ह्यूंदेई वेन्यू और किआ सोनेट की तरफ देखने की सलाह देते हैं. नेचुरली एसपिरेटेड इंजन के मामले में सेगमेंट लीडर मारुति सुजुकी की ब्रेजा है जिसका 1500 सीसी की क्षमता वाला पेट्रोल इंजन मैगनाइट के 999 सीसी वाले इंजन से कहीं ताकतवर और बेहतर है. जानकारों के मुताबिक ऐसे में निसान के इस नए प्रोडक्ट के सामने चुनौती बहुत बड़ी है.

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खरा या खोटा?

मैगनाइट की कीमत इसका सबसे बड़ा आकर्षण है. इससे वेन्यू या सोनेट जैसी गाड़ियों के बेस मॉडल की तरफ देख रहा ग्राहकों का एक हिस्सा इसकी तरफ मुड़ सकता है क्योंकि इस कीमत में उसे मैगनाइट का मिड ट्रिम मिल जाएगा जिसमें उनसे कहीं ज्यादा फीचर हैं. इस सैगमेंट की दूसरी गाड़ियों का टर्बो इंजन वाला ऑटोमेटिक मॉडल 10 लाख रु के आसपास पड़ता है, लेकिन मैगनाइट के लिए यह आंकड़ा करीब दो लाख कम है. तो ड्राइविंग के शौकीनों का एक बड़ा वर्ग भी इसकी तरफ देख सकता है. अगर ऐसा होता है तो मैगनाइट निसान के लिए वही काम कर सकती है जो इकोस्पोर्ट ने फोर्ड या फिर सेल्टॉस ने किआ के लिए किया.

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