स्टूडेंट ऑफ द इयर2 में टाइगर श्रॉफ, तारा सुतारिया, अनन्या पांडेय

खरा-खोटा | सिनेमा

स्टूडेंट ऑफ द इयर-2: एक ऐसी फिल्म जो ड्रामा से ज्यादा ट्रॉमा है!

कलाकार : टाइगर श्रॉफ, अनन्या पांडे, तारा सुतारिया, आदित्य सील | निर्देशक: पुनीत मल्होत्रा | लेखक: अरशद सैयद | रेटिंग: 1.5/5

ब्यूरो | 10 जून 2019

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‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ की तकरीबन पूरी कहानी ट्रेलर बता चुका है. दूसरी जानने लायक बात यह है कि यह फिल्म एक तरह से करण जौहर की कई पुरानी फिल्मों की कतरनों को जोड़कर बनाई गई लगती है. कुछ लोगों को यह ‘जो जीता वही सिकंदर’ (1992) की धुंधली-खराब जेरॉक्स कॉपी भी लग सकती है. हॉलीवुड में एक जमाने में स्कूल/कॉलेज से जुड़ी ऐसी म्यूजिकल ड्रामा फिल्में खूब बना करती थीं लेकिन आज वह इन्हें लेकर बेहद संवेदनशील सिनेमा रच रहा है और हम आज भी बीस साल पहले के वक्त में अटके हैं.

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अगर आप टाइगर श्रॉफ के फैन हैं और उनके लिए इस बासी कहानी को बासी ट्रीटमेंट, आलसी पटकथा और साधारण गानों के साथ बर्दाश्त कर सकते हैं तो ही यह फिल्म देखने जाइए. बाकी दर्शकों की आशंकाओं पर टाइगर पूरी तरह खरे उतरते हैं. उनसे आज भी अभिनय नहीं होता है और संवाद अदायगी में भी वे अब तक कच्चे हैं. उनकी तारीफ इस बात के लिए की जा सकती है कि वे बहुत ही बढ़िया नाचते हैं, अच्छे दिखते हैं और एक्शन भी कमाल का करते हैं.

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अनन्या पांडे रईस और अकड़ू लड़की श्रेया के रोल में प्रभावित करती हैं. ऐसा शायद इसलिए होता है कि आपने उनसे जरा भी उम्मीद नहीं लगाई थी. ट्रेलर में वे इतनी अपरिपक्व लग रही थीं कि लगा था कि जिस तरह 19-20 साल की रॉ आलिया भट्ट को ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ में बर्बाद किया गया था वैसा ही हाल  इस बार 20 साल की अनगढ़ अनन्या पांडे का होगा. लेकिन अपने नैचुरल अभिनय से वे लुभाती हैं और उनके किरदार को दिए कुछ क्लीशे भी उनके जिंदादिल अभिनय के थोड़े काम आते हैं.

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तारा सुतारिया परदे पर आत्मविश्वासी लगती हैं और इस बात का इशारा देती हैं कि अगर उन्हें ढंग से लिखा गया कोई किरदार मिलता तो वे बेहतर अभिनय कर सकती थीं. शुरुआत में प्रभावित करने के बाद उन्हें बॉलीवुड की टिपिकल सेकंड लीड अभिनेत्री बना दिया जाता है और जरा किनारे कर स्टार किड्स पर फोकस किया जाता है. उनके अलावा फिल्म कई अच्छे कलाकारों जैसे मनोज पाहवा, आयशा रजा, गुल पनाग, समीर सोनी को भी बेकार कर देती है.

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करण जौहर के बेहद खास और ‘आई हेट लव स्टोरीज’ जैसा हादसा रच चुके पुनीत मल्होत्रा इस फिल्म के निर्देशक हैं. देखने में बेहद खूबसूरत दिख रही पुनीत की इस फिल्म में सब्सटेंस के नाम पर कुछ नहीं है. किरदार, कहानी, संवाद और यहां तक कि गाने भी इस तरह से लिखे गए हैं कि लगता है कि उन्हें लिखने के पहले सोचने की जहमत नहीं उठाई गई है. कुल मिलाकर यह ड्रामा से ज्यादा ट्रॉमा देने वाली फिल्म है.

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