कबीर सिंह में शाहिद कपूर और कियारा आडवाणी

खरा-खोटा | सिनेमा

कबीर सिंह: मर्दानगी की सदियों पुरानी परिभाषा से रचे गए नायक की उतनी ही पुरानी कहानी

कलाकार: शाहिद कपूर, कियारा आडवाणी, सुरेश ओबेरॉय, कामिनी कौशल | निर्देशक: संदीप रेड्डी वांगा | रेटिंग: 2/5

ब्यूरो | 21 जून 2019

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अगर आपको किसी ऐसे जीवित आदमी का उदाहरण चाहिए जिसे सिर्फ नापसंद किया जा सके और वो इतना बुरा हो कि खुद भी खुद को बरबाद कर देना चाहता हो, तो फिल्म कबीर सिंह के नायक से मिल लीजिए. कबीर सिंह एक ऐसा किरदार है जिसे मॉर्डन देवदास कहा जा सकता है. लेकिन यह देवदास अपने दुख के साथ-साथ अपने गुस्से को भी काबू नहीं कर सकता है. इसके अलावा इसके पास चुन्नी बाबू सरीखे शराब पिलाने वाले दोस्त तो हैं लेकिन पारो या चंद्रमुखी जैसी मजबूत नायिकाएं नहीं हैं.

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कबीर सिंह 2017 में आई सुपरहिट तेलुगु फिल्म अर्जुन रेड्डी का हिंदी रीमेक है. अर्जुन रेड्डी की तरह ही कबीर सिंह भी अपने सरफिरे नायक कबीर को एक ब्रिलियंट डॉक्टर लेकिन पागल प्रेमी बताती है. फ्लैशबैक में जाकर कबीर और नायिका प्रीति की प्रेम कहानी दिखाते हुए फिल्म पूरे उत्साह से मिसॉजनी और बचकानी बुलीइंग को सेलिब्रेट करती है. और भी बुरा यह है कि कई प्रेम दृश्य रचने के बावजूद निर्देशक ने गलती से भी कहीं नायिका का नजरिया दिखाने वाला एंगल नहीं अपनाया है.

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मूल फिल्म अर्जुन रेड्डी में शीर्षक भूमिका निभाने वाले विजय देवर्कोंडा ने अपने किरदार को मर्दानगी के टुच्चे लक्षणों से ही सही लेकिन एक मजबूत और यादगार भारतीय मर्द की छवि दी थी. मेडिकल स्टूडेंट बनते हुए उनकी उम्र ने भी उनका भरपूर साथ दिया था. शाहिद कपूर के मामले ये दोनों ही बातें उतनी असरकारी नहीं हो पाई हैं. अभिनय करते हुए वे कुछ जगहों पर अटकते हुए से भी लगते हैं और अपने चॉकलेटी चेहरे का वो जादू नहीं दोहरा पाते जो उन्होंने कभी ‘जब वी मेट’ या ‘कमीने’ में दिखाया था.

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कियारा आडवाणी की बात करें तो वे अपनी तरफ से अपने किरदार को जो दे सकती हैं, देने की कोशिश करती हैं. लेकिन प्रीति बनकर वे फिल्म का सबसे पकाऊ और उपेक्षित हिस्सा ही बन पाती हैं. सपोर्टिंग कास्ट में कबीर सिंह के पिता की भूमिका में सुरेश ओबेरॉय और दादी बनकर कामिनी कौशल बहुत ग्रेसफुल और बढ़िया अभिनय करते हैं. लेकिन इन किरदारों ज्यादा स्क्रीन स्पेस नहीं मिलता है.

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तकरीबन तीन घंटे लंबी कबीर सिंह आपको ज्यादातर वक्त अपने नायक की बेचारगी दिखाती है. इसके बावजूद निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा के रचे इस नायक का दर्द आप जरा भी महसूस नहीं कर पाते. अपनी कमियों को अपनी खूबियां बनाकर पेश करने वाली कबीर सिंह एक सुपरहिट फिल्म तो हो सकती है लेकिन बेहतरीन सिनेमा कभी नहीं!

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